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Mahendragarh-Narnaul News: मरीज दिल्ली-जयपुर में भटक रहे और हम नाम में फंसे हैं

Mon, 11 Aug 2025 10:53 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 11 Aug 2025 10:53 PM IST
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Patients are wandering in Delhi-Jaipur and we are stuck in the name
फोटो 28नारनौल के निजी होटल में पंचायत समिति के प्रतिनिधि व सरपंच प्रेस वार्ता को संबोधित करते
नारनौल। जिले के 250 पंचायत प्रतिनिधियों ने महर्षि च्यवन ऋषि मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर राव तुलाराम रखे जाने के आंदोलन से खुद को अलग कर लिया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने नाम परिवर्तन आंदोलन से कॉलेज में अटकी मेडिकल सुविधाओं पर दुख व्यक्त किया।
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कहा, जबसे नामकरण विवाद शुरू हुआ है न तो यहां इलाज हो रहा है न कक्षाएं शुरू हो पाई हैं। मरीज दिल्ली-जयपुर के बड़े अस्पतालों में भटक रहे हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर स्पष्ट किया कि उन्हें मेडिकल कॉलेज कोरियावास के नामकरण से कोई मतलब नहीं है। उनकी मांग बस बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर है।
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रामबास के सरपंच सहित अन्य प्रतिनिधियों ने कहा, कॉलेज के नामकरण आंदोलन को लेकर उनसे कोई बात नहीं हुई थी। उन्हें बस यह कहा गया था कि गांव के युवाओं को कॉलेज में रोजगार दिलाने के लिए ज्ञापन दिया जा रहा है।
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जनप्रतिनिधियों ने कहा, एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम भेजा जाएगा। इस ज्ञापन में 300 ग्राम पंचायतों के सरपंचों के साथ ही पंचायत समितियों के चेयरमैन, पंचायत समिति सदस्य, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं पार्षदों के हस्ताक्षर हैं।
सुविधाएं बढ़ाने के लिए 6 माह का अल्टीमेटम
पंचायत समिति नांगल चौधरी के प्रतिनिधि कर्मपाल यादव ने नसीबपुर में स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम के नाम पर भव्य और आधुनिक शहीद स्मारक निर्माण की मांग की। साथ ही मेडिकल कॉलेज में उच्च योग्यता वाले स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्त कर उच्चस्तरीय मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग उठाई। चेतावनी दी कि अगर दोनों मांगें छह माह में पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

तीन माह से ओपीडी चालू...पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव
2018 में च्यवन ऋषि मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ था। इसके बाद लोगों को आस जगी थी कि जल्द ही बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलनी शुरू हो जाएगी। अब यह मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार भी हो चुका है। इसमें करीब तीन माह से ओपीडी भी चल रही है लेकिन चिकित्सकों व जांच सुविधाओं के अभाव में अभी भी लोग जयपुर दिल्ली जाने को मजबूर हैं।
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