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Mahendragarh-Narnaul News: अभिभावक बच्चों की दूसरों से तुलना न करें डॉ. अनिल
Wed, 14 May 2025 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 14 May 2025 12:22 AM IST
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फोटो 3 मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल यादव।
नारनौल। जिले में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई का परीक्षा परिणाम मंगलवार को जारी हो गया है। छात्रों काे उम्मीद के मुताबिक नंबर मिले हैं, उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होगा।
वहीं ऐसे भी छात्र हैं जिनके नंबर कम आए हैं या फिर फेल हो गए हैं। ऐसे समय में बच्चों को शर्मिंदा करने या उन्हें डांटने-फटकारने की बजाय उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। मनोरोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल डॉ. अनिल यादव का कहना है कि परीक्षा में कम अंक लाने वाले बच्चों की दूसरों के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। हर बच्चे की अलग-अलग क्षमता होती है।
अभिभावक इस समय बच्चों की तुलना उसके सहपाठियों या फिर मोहल्ले के बच्चों के साथ न करें और उनका हौसला बढ़ाए। अब उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। अगर बच्चा ज्यादा तनाव में चला जाता है तो माता-पिता को उसका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
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जो छात्र-छात्राएं फेल हो गए हैं या जिन्हें अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं ला सके, उन्हें निराश और हताश होने की जरूरत नहीं है। कई बार छात्र के मेहनत करने के बावजूद भी पेपर अच्छा नहीं होता है। वहीं अनेक बार जिस विषय में छात्र को कम अंक मिले हैं, उसमें रुचि का नहीं होना भी एक मुख्य कारण हो सकता है।
परीक्षा परिणाम में कम अंक आने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे के कॅरिअर के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। छात्र को अपनी रुचि के अनुसार नए कॅरिअर विकल्पों को भी अपनाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस समय डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल भी छात्र के लिए बेहद जरूरी है।
इंसेट
योग से तनाव को कम करें छात्र
परीक्षा परिणाम आने के बाद कुछ छात्र हीनभावना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस समय जिन छात्रों को कम अंक मिले हैं, उन्हें नियमित रूप से योग, ध्यान और व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे दिमाग शांत रहेगा और एकाग्रता भी बढ़ेगी।
वर्जन
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वहीं ऐसे भी छात्र हैं जिनके नंबर कम आए हैं या फिर फेल हो गए हैं। ऐसे समय में बच्चों को शर्मिंदा करने या उन्हें डांटने-फटकारने की बजाय उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। मनोरोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल डॉ. अनिल यादव का कहना है कि परीक्षा में कम अंक लाने वाले बच्चों की दूसरों के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। हर बच्चे की अलग-अलग क्षमता होती है।
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अभिभावक इस समय बच्चों की तुलना उसके सहपाठियों या फिर मोहल्ले के बच्चों के साथ न करें और उनका हौसला बढ़ाए। अब उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। अगर बच्चा ज्यादा तनाव में चला जाता है तो माता-पिता को उसका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
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जो छात्र-छात्राएं फेल हो गए हैं या जिन्हें अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं ला सके, उन्हें निराश और हताश होने की जरूरत नहीं है। कई बार छात्र के मेहनत करने के बावजूद भी पेपर अच्छा नहीं होता है। वहीं अनेक बार जिस विषय में छात्र को कम अंक मिले हैं, उसमें रुचि का नहीं होना भी एक मुख्य कारण हो सकता है।
परीक्षा परिणाम में कम अंक आने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे के कॅरिअर के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। छात्र को अपनी रुचि के अनुसार नए कॅरिअर विकल्पों को भी अपनाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस समय डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल भी छात्र के लिए बेहद जरूरी है।
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योग से तनाव को कम करें छात्र
परीक्षा परिणाम आने के बाद कुछ छात्र हीनभावना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस समय जिन छात्रों को कम अंक मिले हैं, उन्हें नियमित रूप से योग, ध्यान और व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे दिमाग शांत रहेगा और एकाग्रता भी बढ़ेगी।
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