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दस हजार की आबादी वाले शहर में मात्र एक सार्वजनिक शौचालय
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अटेली में बनाया गया सार्वजनिक शौचालय। संवाद
- फोटो : Narnol
स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत मिशन के तहत शहर और गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन योजनाओं के उचित क्रियान्वयन के बिना करोड़ों रुपयों के बजट की फाइलें महज औपचारिकता बनकर रह गई हैं।
अटेली की बात करें तो बेशक इसे तहसील का दर्जा मिल गया है। लेकिन शहर की साफ-सफाई व सार्वजनिक शौचालयों के अभाव की समस्याएं आज भी हैं। 2017 में सरकार जन सुविधा योजना के तहत अटेली तहसील ही नहीं पूरे जिले को ओडीएफ घोषित कर चुकी है, लेकिन हकीकत में अटेली कस्बे के दुकानदार व आमजन सार्वजनिक शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार 9200 की आबादी वाला अटेली शहर 11 वार्डों में बंटा हुआ है, जिसमें खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय, पुलिस स्टेशन, बिजली कार्यालय, तहसील कार्यालय, खजाना कार्यालय, नपा कार्यालय, अनाज मंडी, सब्जी मंडी के अलावा विभिन्न बैंक शाखाएं स्थापित हैं। अटेली क्षेत्र के लगभग 50 गांव के लोग प्रतिदिन कस्बे में आते हैं। इसके अतिरिक्त दो महाविद्यालय, दो वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा दर्जनभर निजी स्कूल भी हैं। जिनमें ग्रामीण क्षेत्र से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को शौच आदि के लिए इधर-उधर खुले में जाना पड़ता है। लगभग 5 किलोमीटर की परिधि वाले अटेली शहर में नए और पुराने बस स्टैंड, झंडा चौक, रेलवे रोड, कनीना चौक, नांगल बेरियल व धनोंदा रोड बाजार बने हुए हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से सिर्फ झंडा चौक पर ही सार्वजनिक शौचालय बनाया गया है। जो इतने विस्तृत शहर के लिए नाकाफी है। सार्वजनिक शौचालय की कमी को देखते हुए लोगों ने कई बार इस समस्या को प्रशासन तक पहुंचाई है, लेकिन नपा प्रशासन व सरकार द्वार इस बारे में कोई योजना तैयार नहीं की गई है।
सार्वजनिक शौचालय के अभाव में लोगों को मजबूरी में शौच के लिए खुली में जाना पड़ता है। आम जन के लिए इस प्रकार की जन सुविधाएं प्रदान करवाना प्रशासन व नगरपालिका का कार्य है। इसलिए इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। -नरपत चौहान।
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शहर में सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण गांवों से आने वाले लोगों को काफी समस्या होती है। शौच इत्यादि के लिए उनको इधर-उधर खुले में जाना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि मुख्य बाजारों में सार्वजनिक शौचालय बनवाए। महेंद्र सिंह।
अटेली में सार्वजनिक शौचालयों की कमी एक आम समस्या है। शहर में आसपास के दर्जनों गांवों के लोग खरीदारी के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय के अभाव में उनको इधर-उधर भटकना पड़ता है। बने सिंह।
शहर के सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय का होना जरूरी है। इतने बड़े शहर में सिर्फ एक ही शौचालय नाकाफी है। लोग दीवारों के साथ छुपकर तथा खुले में पेशाब करते हुए नजर आते हैं। ऐसे में ‘स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत’ अभियान असफल होता दिखाई पड़ रहा है। राजू जाट।
शौचालय की कमी को महसूस किया जा रहा है। उच्च अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया है। आबादी को देखते हुए शौचालय की व्यवस्था होना अति आवश्यक है। जैसे ही शौचालय निर्माण के लिए जगह का प्रस्ताव सरकार की ओर से उपलब्ध हो जाएगा, उसी समय उनका निर्माण भी आरंभ करा दिया जाएगा। जतिन अग्रवाल, नपा चेयरमैन, मंडी अटेली।
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अटेली की बात करें तो बेशक इसे तहसील का दर्जा मिल गया है। लेकिन शहर की साफ-सफाई व सार्वजनिक शौचालयों के अभाव की समस्याएं आज भी हैं। 2017 में सरकार जन सुविधा योजना के तहत अटेली तहसील ही नहीं पूरे जिले को ओडीएफ घोषित कर चुकी है, लेकिन हकीकत में अटेली कस्बे के दुकानदार व आमजन सार्वजनिक शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार 9200 की आबादी वाला अटेली शहर 11 वार्डों में बंटा हुआ है, जिसमें खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय, पुलिस स्टेशन, बिजली कार्यालय, तहसील कार्यालय, खजाना कार्यालय, नपा कार्यालय, अनाज मंडी, सब्जी मंडी के अलावा विभिन्न बैंक शाखाएं स्थापित हैं। अटेली क्षेत्र के लगभग 50 गांव के लोग प्रतिदिन कस्बे में आते हैं। इसके अतिरिक्त दो महाविद्यालय, दो वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा दर्जनभर निजी स्कूल भी हैं। जिनमें ग्रामीण क्षेत्र से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को शौच आदि के लिए इधर-उधर खुले में जाना पड़ता है। लगभग 5 किलोमीटर की परिधि वाले अटेली शहर में नए और पुराने बस स्टैंड, झंडा चौक, रेलवे रोड, कनीना चौक, नांगल बेरियल व धनोंदा रोड बाजार बने हुए हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से सिर्फ झंडा चौक पर ही सार्वजनिक शौचालय बनाया गया है। जो इतने विस्तृत शहर के लिए नाकाफी है। सार्वजनिक शौचालय की कमी को देखते हुए लोगों ने कई बार इस समस्या को प्रशासन तक पहुंचाई है, लेकिन नपा प्रशासन व सरकार द्वार इस बारे में कोई योजना तैयार नहीं की गई है।
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सार्वजनिक शौचालय के अभाव में लोगों को मजबूरी में शौच के लिए खुली में जाना पड़ता है। आम जन के लिए इस प्रकार की जन सुविधाएं प्रदान करवाना प्रशासन व नगरपालिका का कार्य है। इसलिए इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। -नरपत चौहान।
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शहर में सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण गांवों से आने वाले लोगों को काफी समस्या होती है। शौच इत्यादि के लिए उनको इधर-उधर खुले में जाना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि मुख्य बाजारों में सार्वजनिक शौचालय बनवाए। महेंद्र सिंह।
अटेली में सार्वजनिक शौचालयों की कमी एक आम समस्या है। शहर में आसपास के दर्जनों गांवों के लोग खरीदारी के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय के अभाव में उनको इधर-उधर भटकना पड़ता है। बने सिंह।
शहर के सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय का होना जरूरी है। इतने बड़े शहर में सिर्फ एक ही शौचालय नाकाफी है। लोग दीवारों के साथ छुपकर तथा खुले में पेशाब करते हुए नजर आते हैं। ऐसे में ‘स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत’ अभियान असफल होता दिखाई पड़ रहा है। राजू जाट।
शौचालय की कमी को महसूस किया जा रहा है। उच्च अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया है। आबादी को देखते हुए शौचालय की व्यवस्था होना अति आवश्यक है। जैसे ही शौचालय निर्माण के लिए जगह का प्रस्ताव सरकार की ओर से उपलब्ध हो जाएगा, उसी समय उनका निर्माण भी आरंभ करा दिया जाएगा। जतिन अग्रवाल, नपा चेयरमैन, मंडी अटेली।