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नोटबंदी के 50 दिन: लाइन टूटी न मिल रहा कैश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:38 PM IST
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बैंकों में लगी लाइन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी को 50 दिन का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक न तो बैंकों के हालात सुधरे हैं न बाजार की स्थिति सुधरी है। 50 दिन बाद भी लोगों को बैंकों के बाहर लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। अनपढ़ और छोटे दुकानदार अभी तक डिजिटल लेनदेन की जानकारी से वंचित हैं। उनका काम हार्ड कैश से ही हो रहा है। व्यापारियों को स्वैप मशीनों के लिए डिमांड किए एक महीने से अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक प्रतिष्ठानों पर स्वैप मशीनें नहीं लग पाई हैं। इससे व्यापारियों की दुकानदारी प्रभावित हो रही है। 50 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड से पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन प्रतिष्ठानों पर स्वैप मशीन नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं और दुकानदारों को परेशानी हो रही है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं को कम कैश में घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया फिर भी उपभोक्ता जैसे-तैसे अपना काम कर रहे हैं।
सरकारी कार्यालय नहीं हुए कैशलेस
नोटबंदी को 50 दिन का समय हो चुका है। सरकारी कार्यालयों में अभी तक कैशलेस नहीं हुए हैं। शहर का एसडीएम आफिस-1, नगर पालिका-1, बिजली निगम-5, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग-2 में स्वैप मशीनें लगनी थी परंतु किसी भी विभाग में स्वैप मशीनें नहीं लग पाई हैं। उपभोक्ता डेबिट कार्ड से पेमेंट करने को कहते हैं तो उन्हें मना कर दिया जाता है। अभी हार्ड कैश से ही बिल भरे जा रहे हैं। उपभोक्ताओं कैश के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
50 प्रतिशत लेन-देन हुआ डिजिटल
नगर में 50 प्रतिशत पेमेंट डिजिटल हो रहा है। बाजारों लोग नेट बैंकिंग, स्वैप मशीन, पे-टीएम, ई-वैलेट आदि से भुगतान कर रहे हैं। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र के जागरूक लोग अधिकतर भुगतान डिजिटल ही कर रहे हैं। जिनके पास पे-टीएम की सुविधा नहीं है वे चेक के माध्यम से बाजार में खरीदारी कर रहे हैं। कैश की समस्या को लेकर डिजिटल भुगतान में 50 प्रतिशत फर्क पड़ा है।
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निजी स्कूलों की हालत खस्ता
नोटबंदी के बाद निजी स्कूलों पर भी काफी असर पड़ा है। स्कूलों में मात्र 50 प्रतिशत बच्चों की फीस आ रही है। बच्चों के परिजनों को बैंक से कैश नहीं मिलने के कारण बच्चों की फीस देने में असमर्थ हो रहे हैं। जिन स्कूलों में स्वैप मशीनें लगी हैं उनके फीस का ग्राफ बढ़ रहा है लेकिन मध्यम श्रेणी के स्कूलों में बच्चों की फीस का ग्राफ बहुत ज्यादा घट चुका है। स्कूल संचालकों को स्कूल स्टाफ का वेतन देने में बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है।
20 प्रतिशत बाजार लैसकेश
शहर में अभी तक 20 प्रतिशत दुकानों पर लेसकैश सिस्टम शुरू हुआ है। बाकी 80 प्रतिशत व्यापारी अभी हार्ड कैश से लेन-देन कर रहे हैं जबकि नगर के 50 प्रतिशत उपभोक्ता पेटीएम और डेबिट कार्ड से लेनदेन कर रहे हैं। बड़े व्यापारियों ने कैशलेस सिस्टम बना लिया है लेकिन छोटे दुकानदार डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी नहीं होने के कारण कैश से ही काम कर रहे हैं।
बैंकों में कैश की समस्या बरकरार
नोटबंदी के 50 दिन बीत जाने के बाद भी बैंकों में कैश की समस्या ज्यों की त्यों है। लोगों की लाइन अभी तक नहीं छूट पाई है। लोग पहले की तरह ही सुबह आकर बैंकों के बाहर लाइन में खड़े हो रहे हैं। बैंकों में कैश की कमी के कारण उपभोक्ताओं को 24000 की बजाय 4000 से 6000 रुपये ही दिए जा रहे हैं। कुछ बैंकों में तो कैश ही नहीं होता। इसके अतिरिक्त नेट बैंकिंग, चेक बुक वितरित, चेक क्लियर के काम भी सुचारु रूप से नहीं चल पा रहे हैं।
स्वैप मशीनों की डिमांड बढ़ी
कैश की समस्या को देखकर व्यापारियों की स्वैप मशीनों मांग बढ़ती जा रही है। सभी बैंकों में प्रतिदिन पांच स्वैप मशीनों की डिमांड आ रही हैं लेकिन नोटबंदी के बाद 4-5 स्वैप मशीनों को छोड़कर कहीं भी स्वैप मशीनें नहीं लगी हैं। पटियाला बैंक में 20, एचडीएफसी-25, एसबीआई-20 (शहर की दोनों ब्रांच शामिल), पीएनबी-11 डिमांड आ चुकी है। किसी भी बैंक ने अभी तक स्वैप मशीनें नहीं लगाई जबकि व्यापारियों को स्वैप मशीन की डिमांड किए एक महीने से ऊपर का समय हो चुका है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता भी बैंक से नेट बैंकिंग, एटीएम और चेक बुक जारी करवा रहे हैं। हर रोज औसत 170 चेक बुक की डिमांड आ रही है। इसके अतिरिक्त नेट बैंकिंग और एटीएम की भी प्रतिदिन 200 उपभोक्ताओं की प्रति बैंक डिमांड आ रही है।
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बैंकों के बाहर चार घंटे लाइन में खड़े होने पर भी कैश नहीं मिल पा रहा। इस समय घर खर्च चलाने में बड़ी परेशानी हो रही है। बैंकों से कैश सीमित ही मिल रहा है। बच्चों की फीस आदि भरने में भी दिक्कतेें आ रही हैं। - गौरव धींगड़ा
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नोटबंदी के बाद घर चलाने में परेशानी हो रही है। जैसे तैसे मैनेज कर रहे हैं। कैश कमी के कारण डिजिटल भुगतान से शॉपिंग कर रहे हैँ। - रजनी
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50 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड से भुगतान करने को कहते हैं लेकिन बैंक ने अभी स्वैप मशीन नहीं लगाई है जिससे बड़ी दिक्कत आ रही है। बाजार में 50 प्रतिशत मंदी चल रही है। - प्रदीप मैहता
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बाजार में 60 प्रतिशत आर्थिक मंदी चल रही है। अभी विवाह शादी नहीं होने के कारण भी बाजार प्रभावित है। डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले आते है लेकिन अभी स्वैप मशीन बैंक ने लगाई नहीं है। - प्रवीण तायल।
कोट
स्वैप मशीनों की डिमांड भेजी गई है जल्द ही मांग करने वाले प्रतिष्ठानों पर लगवा दी जाएगी। जिले में 93 करोड़ रुपये प्रतिदिन कैश की आवश्यकता होती है और पीछे से लगभग छह करोड़ रुपये कैश आ रहा है, वो पूरा उपभोक्ताओं में वितरित कर दिया जाता है। -श्रवण कुमार पाठक-एलडीएम
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सरकारी कार्यालय नहीं हुए कैशलेस
नोटबंदी को 50 दिन का समय हो चुका है। सरकारी कार्यालयों में अभी तक कैशलेस नहीं हुए हैं। शहर का एसडीएम आफिस-1, नगर पालिका-1, बिजली निगम-5, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग-2 में स्वैप मशीनें लगनी थी परंतु किसी भी विभाग में स्वैप मशीनें नहीं लग पाई हैं। उपभोक्ता डेबिट कार्ड से पेमेंट करने को कहते हैं तो उन्हें मना कर दिया जाता है। अभी हार्ड कैश से ही बिल भरे जा रहे हैं। उपभोक्ताओं कैश के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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50 प्रतिशत लेन-देन हुआ डिजिटल
नगर में 50 प्रतिशत पेमेंट डिजिटल हो रहा है। बाजारों लोग नेट बैंकिंग, स्वैप मशीन, पे-टीएम, ई-वैलेट आदि से भुगतान कर रहे हैं। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र के जागरूक लोग अधिकतर भुगतान डिजिटल ही कर रहे हैं। जिनके पास पे-टीएम की सुविधा नहीं है वे चेक के माध्यम से बाजार में खरीदारी कर रहे हैं। कैश की समस्या को लेकर डिजिटल भुगतान में 50 प्रतिशत फर्क पड़ा है।
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निजी स्कूलों की हालत खस्ता
नोटबंदी के बाद निजी स्कूलों पर भी काफी असर पड़ा है। स्कूलों में मात्र 50 प्रतिशत बच्चों की फीस आ रही है। बच्चों के परिजनों को बैंक से कैश नहीं मिलने के कारण बच्चों की फीस देने में असमर्थ हो रहे हैं। जिन स्कूलों में स्वैप मशीनें लगी हैं उनके फीस का ग्राफ बढ़ रहा है लेकिन मध्यम श्रेणी के स्कूलों में बच्चों की फीस का ग्राफ बहुत ज्यादा घट चुका है। स्कूल संचालकों को स्कूल स्टाफ का वेतन देने में बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है।
20 प्रतिशत बाजार लैसकेश
शहर में अभी तक 20 प्रतिशत दुकानों पर लेसकैश सिस्टम शुरू हुआ है। बाकी 80 प्रतिशत व्यापारी अभी हार्ड कैश से लेन-देन कर रहे हैं जबकि नगर के 50 प्रतिशत उपभोक्ता पेटीएम और डेबिट कार्ड से लेनदेन कर रहे हैं। बड़े व्यापारियों ने कैशलेस सिस्टम बना लिया है लेकिन छोटे दुकानदार डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी नहीं होने के कारण कैश से ही काम कर रहे हैं।
बैंकों में कैश की समस्या बरकरार
नोटबंदी के 50 दिन बीत जाने के बाद भी बैंकों में कैश की समस्या ज्यों की त्यों है। लोगों की लाइन अभी तक नहीं छूट पाई है। लोग पहले की तरह ही सुबह आकर बैंकों के बाहर लाइन में खड़े हो रहे हैं। बैंकों में कैश की कमी के कारण उपभोक्ताओं को 24000 की बजाय 4000 से 6000 रुपये ही दिए जा रहे हैं। कुछ बैंकों में तो कैश ही नहीं होता। इसके अतिरिक्त नेट बैंकिंग, चेक बुक वितरित, चेक क्लियर के काम भी सुचारु रूप से नहीं चल पा रहे हैं।
स्वैप मशीनों की डिमांड बढ़ी
कैश की समस्या को देखकर व्यापारियों की स्वैप मशीनों मांग बढ़ती जा रही है। सभी बैंकों में प्रतिदिन पांच स्वैप मशीनों की डिमांड आ रही हैं लेकिन नोटबंदी के बाद 4-5 स्वैप मशीनों को छोड़कर कहीं भी स्वैप मशीनें नहीं लगी हैं। पटियाला बैंक में 20, एचडीएफसी-25, एसबीआई-20 (शहर की दोनों ब्रांच शामिल), पीएनबी-11 डिमांड आ चुकी है। किसी भी बैंक ने अभी तक स्वैप मशीनें नहीं लगाई जबकि व्यापारियों को स्वैप मशीन की डिमांड किए एक महीने से ऊपर का समय हो चुका है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता भी बैंक से नेट बैंकिंग, एटीएम और चेक बुक जारी करवा रहे हैं। हर रोज औसत 170 चेक बुक की डिमांड आ रही है। इसके अतिरिक्त नेट बैंकिंग और एटीएम की भी प्रतिदिन 200 उपभोक्ताओं की प्रति बैंक डिमांड आ रही है।
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बैंकों के बाहर चार घंटे लाइन में खड़े होने पर भी कैश नहीं मिल पा रहा। इस समय घर खर्च चलाने में बड़ी परेशानी हो रही है। बैंकों से कैश सीमित ही मिल रहा है। बच्चों की फीस आदि भरने में भी दिक्कतेें आ रही हैं। - गौरव धींगड़ा
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नोटबंदी के बाद घर चलाने में परेशानी हो रही है। जैसे तैसे मैनेज कर रहे हैं। कैश कमी के कारण डिजिटल भुगतान से शॉपिंग कर रहे हैँ। - रजनी
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50 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड से भुगतान करने को कहते हैं लेकिन बैंक ने अभी स्वैप मशीन नहीं लगाई है जिससे बड़ी दिक्कत आ रही है। बाजार में 50 प्रतिशत मंदी चल रही है। - प्रदीप मैहता
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बाजार में 60 प्रतिशत आर्थिक मंदी चल रही है। अभी विवाह शादी नहीं होने के कारण भी बाजार प्रभावित है। डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले आते है लेकिन अभी स्वैप मशीन बैंक ने लगाई नहीं है। - प्रवीण तायल।
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स्वैप मशीनों की डिमांड भेजी गई है जल्द ही मांग करने वाले प्रतिष्ठानों पर लगवा दी जाएगी। जिले में 93 करोड़ रुपये प्रतिदिन कैश की आवश्यकता होती है और पीछे से लगभग छह करोड़ रुपये कैश आ रहा है, वो पूरा उपभोक्ताओं में वितरित कर दिया जाता है। -श्रवण कुमार पाठक-एलडीएम