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उत्तर-पश्चिमी हवा ने बढ़ाई ठिठुरन, जमाव बिंदु कें नजदीक पहुंचा पारा
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खेतों में गिरा पाला।
- फोटो : Narnol
नारनौल। जिले में चल रही शीत लहर के कारण मंगलवार को नारनौल का न्यूनतम तापमान 1.3 अंक गिरकर 0.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस सीजन की यह सबसे सर्द रात रही है। वहीं साल 2018 व 2019 का भी रिकॉर्ड तोड़ते हुए भी 29 दिसंबर की सबसे सर्द रात रही। इससे कई जगहों पर पाला गिरा। सोमवार को न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। जबकि मंगलवार को न्यूनतम तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 20.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
ग्रामीण आंचल में पाला गिरने से खेत-खलिहानों और खाली मैदान में सुबह पाले की सफेद चादर जमी नजर आई। हालांकि मंगलवार की सुबह आसमान साफ रहने से जल्दी ही धूप खिलने से लोगों ने राहत महसूस की। दिसंबर के शुरूआती दिनों में तापमान में लगातार उतार चढ़ाव चल रहा है। लेकिन माह के अंतिम दिनों में ठिठुरन बढ़ने से लोगों को कंपकंपी छूटनी शुरू हो गई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण जम्मू कश्मीर व हिमाचल में हुई बर्फबारी व पंजाब में हुई हल्की बारिश ने मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ा दी है। देर रात पहाड़ों की तरफ से आ रही उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवा के कारण रात के तापमान में गिरावट हो रही है। अगले तीन दिनों में उत्तर पश्चिमी हवाएं मैदानी क्षेत्रों में चलने की संभावना से रात के तापमान में और गिरावट के साथ पाला पड़ने की भी संभावना है। कृषि मौसम विज्ञान विभाग, चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अनुसार पाला आमतौर पर दिसंबर से फरवरी तक पड़ने की संभावना बनी रहती है। दोपहर बाद हवा के न चलने तथा रात में आसमान साफ रहने पर पाला पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है। पाले के कारण फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार पौधों व नर्सरी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फसलों व सब्जियों व छोटे फलदार तनों, फूलो, फलों में उपस्थित द्रव बर्फ के रूप में जम जाता है तथा ये पौधों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते है तथा पत्तियों को झुलसा देता है।
पाले से फसलों का ऐसे करे बचाव
कृषि विभाग के अनुसार पाले का हानिकारक प्रभाव अगेती सरसों, आलू, फलों व सब्जियों की नर्सरी तथा छोटे फलदार पौधों पर पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए किसान यदि पानी उपलब्ध हो तो फसलों, सब्जियों व फलदार पौधों में सिंचाई करे ताकि जमीन का तापमान बढ़ सके। किसान खेत के किनारे पर तथा 15 से 20 फीट की दूरी के अंतराल पर जिस और से हवा आ रही है रात्रि के समय कूड़ा कचरा, सुखी घास आदि एकत्रित कर धुआं करना चाहिए ताकि वातावरण का तापमान बढ़ सके जिससे पाले का हानिकारक प्रभाव फसल पर न पड़े। इससे फसल व सब्जियों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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पिछले तीन साल का रिकॉर्ड टूटा
पिछले साल 29 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 1.5 और अधिकतम 12.0 डिग्री था। 2018 में 29 दिसंबर को 0.7 और अधिकतम 23.5 डिग्री से था। इस साल 29 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 20.5 डिग्री सेल्सियस रहा है जो कि सबसे कम रहा है।
एक्यूआई में आया सुधार
कड़ाके की ठंड के बीच वायु प्रदूषण में भी मंगलवार को सुधार दिखाई दिया। मंगलवार को शाम पांच बजे एक्यूआई का स्तर 282 (खराब) रहा। हालांकि सोमवार को नारनौल का वायु प्रदूषण का स्तर 349 तक पहुंच गया था। जो कि बहुत खराब था। मंगलवार को तापमान गिरते ही एक्यूआई में भी सुधार आया है।
नारनौल में पिछले पांच दिनों का न्यूनतम और अधिकतम तापमान डिग्री से. में व एक्यूआई
दिनांक अधिकतम न्यूनतम एक्यूआई
25 दिसंबर 24.2 3.7 281
26 दिसंबर 24.0 3.0 245
27 दिसंबर 23.0 3.3 237
28 दिसंबर 19.8 1.6 349
29 दिसंबर 20.5 0.3 282
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ग्रामीण आंचल में पाला गिरने से खेत-खलिहानों और खाली मैदान में सुबह पाले की सफेद चादर जमी नजर आई। हालांकि मंगलवार की सुबह आसमान साफ रहने से जल्दी ही धूप खिलने से लोगों ने राहत महसूस की। दिसंबर के शुरूआती दिनों में तापमान में लगातार उतार चढ़ाव चल रहा है। लेकिन माह के अंतिम दिनों में ठिठुरन बढ़ने से लोगों को कंपकंपी छूटनी शुरू हो गई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण जम्मू कश्मीर व हिमाचल में हुई बर्फबारी व पंजाब में हुई हल्की बारिश ने मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ा दी है। देर रात पहाड़ों की तरफ से आ रही उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवा के कारण रात के तापमान में गिरावट हो रही है। अगले तीन दिनों में उत्तर पश्चिमी हवाएं मैदानी क्षेत्रों में चलने की संभावना से रात के तापमान में और गिरावट के साथ पाला पड़ने की भी संभावना है। कृषि मौसम विज्ञान विभाग, चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अनुसार पाला आमतौर पर दिसंबर से फरवरी तक पड़ने की संभावना बनी रहती है। दोपहर बाद हवा के न चलने तथा रात में आसमान साफ रहने पर पाला पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है। पाले के कारण फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार पौधों व नर्सरी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फसलों व सब्जियों व छोटे फलदार तनों, फूलो, फलों में उपस्थित द्रव बर्फ के रूप में जम जाता है तथा ये पौधों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते है तथा पत्तियों को झुलसा देता है।
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पाले से फसलों का ऐसे करे बचाव
कृषि विभाग के अनुसार पाले का हानिकारक प्रभाव अगेती सरसों, आलू, फलों व सब्जियों की नर्सरी तथा छोटे फलदार पौधों पर पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए किसान यदि पानी उपलब्ध हो तो फसलों, सब्जियों व फलदार पौधों में सिंचाई करे ताकि जमीन का तापमान बढ़ सके। किसान खेत के किनारे पर तथा 15 से 20 फीट की दूरी के अंतराल पर जिस और से हवा आ रही है रात्रि के समय कूड़ा कचरा, सुखी घास आदि एकत्रित कर धुआं करना चाहिए ताकि वातावरण का तापमान बढ़ सके जिससे पाले का हानिकारक प्रभाव फसल पर न पड़े। इससे फसल व सब्जियों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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पिछले तीन साल का रिकॉर्ड टूटा
पिछले साल 29 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 1.5 और अधिकतम 12.0 डिग्री था। 2018 में 29 दिसंबर को 0.7 और अधिकतम 23.5 डिग्री से था। इस साल 29 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 20.5 डिग्री सेल्सियस रहा है जो कि सबसे कम रहा है।
एक्यूआई में आया सुधार
कड़ाके की ठंड के बीच वायु प्रदूषण में भी मंगलवार को सुधार दिखाई दिया। मंगलवार को शाम पांच बजे एक्यूआई का स्तर 282 (खराब) रहा। हालांकि सोमवार को नारनौल का वायु प्रदूषण का स्तर 349 तक पहुंच गया था। जो कि बहुत खराब था। मंगलवार को तापमान गिरते ही एक्यूआई में भी सुधार आया है।
नारनौल में पिछले पांच दिनों का न्यूनतम और अधिकतम तापमान डिग्री से. में व एक्यूआई
दिनांक अधिकतम न्यूनतम एक्यूआई
25 दिसंबर 24.2 3.7 281
26 दिसंबर 24.0 3.0 245
27 दिसंबर 23.0 3.3 237
28 दिसंबर 19.8 1.6 349
29 दिसंबर 20.5 0.3 282