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पीलिया पीड़ित नवजात बच्चों का एसएनसीयू में होगा उपचार
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नागरिक अस्पताल में स्थित एसएनसीयू वार्ड।
- फोटो : Narnol
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जिला अस्पताल के एसएनसीयू में नवजात पीलिया पीड़ित बच्चों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसके लिए एसएनसीयू वार्ड को नवीनतम तकनीक की एलईडी फोटो थेरेपी मशीन उपलब्ध हो गई है। इससे पीलिया पीड़ित बच्चों को अब हायर सेंटर रेफर नहीं करना पड़ेगा।
बता दें कि जिला अस्पताल में एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) की सुविधा उपलब्ध है। जहां पर बच्चों के लिए 21 वार्मर, 21 पंप और 10 मॉनिटर के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। जहां पर नवजात बीमार बच्चों का उपचार किया जाता है। जिला अस्पताल में हर माह करीब 400 से 500 डिलीवरी केस होते हैं। इसमें कई महिलाओं को बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं तो कुछ को जन्म के दौरान कोई न कोई दिक्कत आती है। ऐसे बच्चों के लिए एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ता है।
एसएनसीयू के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि करीब 20 दिन पहले आधुनिक एलईडी फोटो थेरेपी मशीन उपलब्ध हो गई है। इससे पीलिया से पीड़ित नवजात बच्चों का उपचार हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वार्ड में करीब हर माह 120-130 बच्चे भर्ती होते हैं। इसमें 25-30 पीलिया से पीड़ित होते हैं। मशीन उपलब्ध होने से पीलिया से पीड़ित गंभीर बच्चों को हायर सेंटर रेफर नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पहले ऐसे बच्चों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता था।
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डॉ. अशोक ने बताया कि करीब सवा माह से एसएनसीयू में डॉक्टर समेत अन्य संसाधन उपलब्ध हैं। डॉक्टरों की वार्ड में शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने बताया कि इसे दो-तीन दिन में प्रयोग में लाया जाएगा। बता दें कि जिला अस्पताल में गायनी की सुविधा होने से जिले के अलावा राजस्थान के लोग भी आते हैं। ऐसे में गायनी की ओपीडी और वार्ड में मरीजों की संख्या होती है। गायनी वार्ड में डॉक्टरों की कमी के चलते अस्पताल प्रबंधन बाहरी डॉक्टरों की सेवाएं ले रहा है। जिला अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि हमारा प्रयास है कि जच्चा-बच्चा को बेहतर सुविधा मिले। डॉक्टरों की कमी के बावजूद बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया गया है। दो डॉक्टरों के आने से एसएनसीयू में सेवाएं पहले से बेहतर हुई हैं।
शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई
एसएनसीयू में 24 घंटे बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले। इसे ध्यान रखते हुए चार डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसमें स्पेशलिस्ट पीडियाट्रिक डॉक्टर के अलावा तीन मेडिकल ऑफिसर सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा स्टाफ नर्स की ड्यूटी होती है। वार्ड में दो यूनिट है। जिसे जरूरत के अनुसार प्रयोग में लाया जाता है।
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बता दें कि जिला अस्पताल में एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) की सुविधा उपलब्ध है। जहां पर बच्चों के लिए 21 वार्मर, 21 पंप और 10 मॉनिटर के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। जहां पर नवजात बीमार बच्चों का उपचार किया जाता है। जिला अस्पताल में हर माह करीब 400 से 500 डिलीवरी केस होते हैं। इसमें कई महिलाओं को बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं तो कुछ को जन्म के दौरान कोई न कोई दिक्कत आती है। ऐसे बच्चों के लिए एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ता है।
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एसएनसीयू के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि करीब 20 दिन पहले आधुनिक एलईडी फोटो थेरेपी मशीन उपलब्ध हो गई है। इससे पीलिया से पीड़ित नवजात बच्चों का उपचार हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वार्ड में करीब हर माह 120-130 बच्चे भर्ती होते हैं। इसमें 25-30 पीलिया से पीड़ित होते हैं। मशीन उपलब्ध होने से पीलिया से पीड़ित गंभीर बच्चों को हायर सेंटर रेफर नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पहले ऐसे बच्चों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता था।
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डॉ. अशोक ने बताया कि करीब सवा माह से एसएनसीयू में डॉक्टर समेत अन्य संसाधन उपलब्ध हैं। डॉक्टरों की वार्ड में शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने बताया कि इसे दो-तीन दिन में प्रयोग में लाया जाएगा। बता दें कि जिला अस्पताल में गायनी की सुविधा होने से जिले के अलावा राजस्थान के लोग भी आते हैं। ऐसे में गायनी की ओपीडी और वार्ड में मरीजों की संख्या होती है। गायनी वार्ड में डॉक्टरों की कमी के चलते अस्पताल प्रबंधन बाहरी डॉक्टरों की सेवाएं ले रहा है। जिला अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि हमारा प्रयास है कि जच्चा-बच्चा को बेहतर सुविधा मिले। डॉक्टरों की कमी के बावजूद बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया गया है। दो डॉक्टरों के आने से एसएनसीयू में सेवाएं पहले से बेहतर हुई हैं।
शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई
एसएनसीयू में 24 घंटे बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले। इसे ध्यान रखते हुए चार डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसमें स्पेशलिस्ट पीडियाट्रिक डॉक्टर के अलावा तीन मेडिकल ऑफिसर सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा स्टाफ नर्स की ड्यूटी होती है। वार्ड में दो यूनिट है। जिसे जरूरत के अनुसार प्रयोग में लाया जाता है।