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Mahendragarh-Narnaul News: 1.80 करोड़ से जल्द बहुरेंगे नवाब अलीजान की बावड़ी के दिन

Thu, 12 Sep 2024 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 12 Sep 2024 12:11 AM IST
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Nawab Alijan's stepwell will soon fetch more than 1.80 crore rupees
नारनौल। शहर की ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल नवाब मिर्जा अलीजान की बावड़ी के दिन जल्द बहुरेंगे। खंडहर में तब्दील हो चुकी इस बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए राज्य सरकार ने करीब 1.80 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसका साल 2022 से लोक निर्माण विभाग बावड़ी के जीर्णोद्धार का कार्य करवा रहा है। इसके लिए टेंडर भी अलॉट किया जा चुका है और साल 2025 में बावड़ी अपने पुराने स्वरूप में नजर आने लगेगी।
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राजा अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक बीरबल की नगरी नारनौल में सात से अधिक ऐतिहासिक स्मारक हैं। इनमें से मिर्जा अली जान की बावड़ी भी एक है। पानीपत के द्वितीय युद्ध के बाद नारनौल की बागडोर सम्राट अकबर के हाथों में आ गई थी। सम्राट अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान यहां के नवाब मिर्जा अलीजान द्वारा 1556-1605 ईसवी में इस बावड़ी का निर्माण करवाया था।
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धूरस पत्थरों के आठ खंभों पर है स्थित
यह बावड़ी शहर के छोटा बड़ा तालाब के समीप स्थित है। शहर के उत्तर पश्चिम में बनी इस बावड़ी में एक विशाल धनुषाकार प्रवेश द्वार के रूप में इमारत के मुख्य ढांचे पर आयताकार छतरी के साथ एक तख्त भी स्थित है। इस छतरी में एक सजाया हुआ प्रालंब है, जो धूरस पत्थरों से बने आठ खंभों पर स्थित रहकर सभी दिशाओं में खुला हुआ है। नीचे सीढि़यों के साथ एक छज्जा भी है। बावड़ी के मुख्य धनुषाकार प्रवेश द्वार पर तख्त स्थित है। दक्षिण में मुख्य धनुषाकार प्रवेशद्वार तीन मंजिला बावड़ी और एक कुएं के साथ जुड़ा हुआ है। इस कुएं के माध्यम से इस बावड़ी में पानी आता है। इस बावड़ी में मिर्जा अलीजान व उनकी रानियां स्नान करती थीं।
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बावड़ी के इर्द-गिर्द है अवैध कब्जों की भरमार
मिर्जा अलीजान की बावड़ी का डिजाइन जितना अद्भुत है, उतनी ही इसे भव्यता भी प्राप्त थी, लेकिन अब इसकी हालत काफी खस्ता है और इसके आसपास लोगों ने अवैध कब्जे करके यहां प्लाटिंग कर दी है। अन्यथा प्राचीन समय में यह छलक नदी के किनारे स्थित थी और यहां कोई मकान आदि नहीं बने हुए थे। 100 गज की दूरी में कोई मकान या प्रदूषण वाला प्लांट नहीं होने के नियम बने होने के बावजूद भी इसकी जड़ में अवैध मकान बने हुए हैं, जो प्रशासन के लिए चुनौती है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार मिर्जा अलीजान की बावड़ी का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम विभाग के है अधीन
इस प्राचीन ऐतिहासिक इमारत के रखरखाव का जिम्मा डिपार्टमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम हरियाणा के पास है। इसी के तत्वावधान में राज्य सरकार ने अब इसके ऐतिहासिक महत्व को जिंदा रखने के लिए करीब 1.80 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है। पूर्व में भी इसका जीर्णोद्धार किया गया था, लेकिन कई दशकों तक ध्यान नहीं देने के चलते यह फिर से गिरने की कगार पर पहुंच गया था।

ये शहर की एक ऐतिहासिक धरोहर है, राज्य सरकार ने इसके जीर्णोद्धार का काम पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपा है। इसका काफी काम पूरा किया जा चुका है और शेष काम को भी समय पर पूरा कर लिया जाएगा।
अश्विनी कुमार, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग, नारनौल।
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