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Mahendragarh-Narnaul News: महिषासुर की उत्पत्ति और वध प्रसंग सुनाया
Sun, 06 Oct 2024 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 06 Oct 2024 12:11 AM IST
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फोटो संख्या:65- कनीना में आयोजित श्रीमद्देवी भागवत कथा के दौरान कथा सुनाते कथाव्यास पंडित
कनीना। श्री श्याम मंदिर कनीना में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित हेमराज भारद्वाज ने विष्णु भक्त प्रहलाद की तपस्या, इंद्र-प्रह्लाद युद्ध, महिषासुर और रक्तबीज की उत्पत्ति एवं वध के प्रसंग विस्तार से सुनाए।
उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर एक असुर था। उसके पिता रंभ असुरों के राजा थे जो एक बार जल में रहने वाली एक भैंस से प्रेम कर बैठे और इन्हीं के योग से महिषासुर का आगमन हुआ। इसी वजह से महिषासुर इच्छानुसार जब चाहे भैंस और जब चाहे मनुष्य का रूप धारण कर सकता था।
उन्होंने बताया कि महिष का अर्थ भैंस होता है। महिषासुर ने ब्रह्माजी की तपस्या करके कई वरदान हासिल किए। इन वरदानों से वह स्वर्ग और पृथ्वी पर देवताओं और मनुष्यों को तंग करने लगा और उसने युद्ध में इंद्र को परास्त करके स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। देवताओं ने मां दुर्गा की स्तुति करके महिषासुर से छुटकारा पाने की प्रार्थना की। देवी दुर्गा ने महिषासुर पर नौ दिनों तक दिन-रात युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध किया। इसी उपलक्ष्य में देवी दुर्गा का त्योहार नवरात्रि और दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। कथा की आरती में मंदिर के पुजारी प्रदीप पांडेय, राजेंद्र राठी, संदीप राठी, संदीप राजेंद्र मित्तल, नीरज, अनीता, गीता, रचना, राजदुलारी, कमलेश, प्रिया, प्रियंका यादव, सरोज, मंजु, आरती, रिंकू, शालू, नीतू शर्मा, पूनम शर्मा मौजूद रही।
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उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर एक असुर था। उसके पिता रंभ असुरों के राजा थे जो एक बार जल में रहने वाली एक भैंस से प्रेम कर बैठे और इन्हीं के योग से महिषासुर का आगमन हुआ। इसी वजह से महिषासुर इच्छानुसार जब चाहे भैंस और जब चाहे मनुष्य का रूप धारण कर सकता था।
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उन्होंने बताया कि महिष का अर्थ भैंस होता है। महिषासुर ने ब्रह्माजी की तपस्या करके कई वरदान हासिल किए। इन वरदानों से वह स्वर्ग और पृथ्वी पर देवताओं और मनुष्यों को तंग करने लगा और उसने युद्ध में इंद्र को परास्त करके स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। देवताओं ने मां दुर्गा की स्तुति करके महिषासुर से छुटकारा पाने की प्रार्थना की। देवी दुर्गा ने महिषासुर पर नौ दिनों तक दिन-रात युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध किया। इसी उपलक्ष्य में देवी दुर्गा का त्योहार नवरात्रि और दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। कथा की आरती में मंदिर के पुजारी प्रदीप पांडेय, राजेंद्र राठी, संदीप राठी, संदीप राजेंद्र मित्तल, नीरज, अनीता, गीता, रचना, राजदुलारी, कमलेश, प्रिया, प्रियंका यादव, सरोज, मंजु, आरती, रिंकू, शालू, नीतू शर्मा, पूनम शर्मा मौजूद रही।
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