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Mahendragarh-Narnaul News: भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया
Sun, 30 Jun 2024 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 30 Jun 2024 11:42 PM IST
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फोटो संख्या:63- गांव ककराला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान हवन करते श्रद्धालु--स्रोत- आयो
कनीना। उपमंडल के गांव के ककराला में हो रही सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के छठे दिन व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य भरत शास्त्री ने श्रीकृष्ण-रुक्मिण विवाह का प्रसंग सुनाया। इस दौरान विवाह की झांकी भी निकाली गई।
कथावाचक ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं।
वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी। जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिण विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिण को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। आयोजक मंडल ने आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण-रुक्मिण विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया।
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इस मौके पर पंचायत समिति चेयरमैन जयप्रकाश यादव, सुनिता, माया देवी, कृष्णा, राजेश, कमलेश, ललिता, रिसाली, रामरती, कौशल्या, अनिता, फूलवती सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथावाचक ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं।
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वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी। जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिण विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिण को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। आयोजक मंडल ने आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण-रुक्मिण विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया।
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इस मौके पर पंचायत समिति चेयरमैन जयप्रकाश यादव, सुनिता, माया देवी, कृष्णा, राजेश, कमलेश, ललिता, रिसाली, रामरती, कौशल्या, अनिता, फूलवती सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।