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प्रदेश में नारनौल का सबसे कम 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा तापमान
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सर्दी ने अपना तेवर दिखाने शुरू कर दिया है। रविवार को नारनौल का तापमान पूरे प्रदेश में सबसे कम 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मैदानी इलाकों में हर रोज न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के कई जगहों पर इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। राजस्थान का सीकर मैदानी इलाकों में सबसे ठंडा स्थान रहा। वहीं पहाड़ी इलाकों में शिमला का न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस, नैनीताल का 8 डिग्री सेल्सियस व कांगड़ा का 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस साल सामान्य से अधिक वर्षा और सामान्य से अधिक ठंड पड़ने की संभावनाएं बन रही है। शीत ऋतु इस बार अपने रिकॉर्ड तोड़ेगी और उतरी भारत के मैदानी राज्य में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। लानीना मौसमी प्रणाली का प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई पड़ने लगा है। मध्य भारत से लेकर दक्षिण भारत तक इसी प्रणाली की वजह से वर्तमान समय में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नए-नए लो प्रेशर एरिया और डीप डिप्रेशन से जल्द ही बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवात बनने की भी संभावनाएं बन रही हैं। जबकि पर्वतीय क्षेत्रों पर इस बार अधिक हिमपात हो रहा है। जिसके प्रभाव से मैदानी क्षेत्रों पर धीरे-धीरे पारा कम होता जा रहा है।
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रविवार को नारनौल पूरे हरियाणा में सबसे ठंडा स्थान रहा है। यहां का तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि महेंद्रगढ़ का तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस रहा। नारनौल का वायु गुणवत्ता सूचकांक में शनिवार के मुकाबले काफी सुधार हुआ है। रविवार को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड आंकड़ों के अनुसार नारनौल का वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 दर्ज किया गया। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ का 198, कनीना 201, अटेली का 200 जो अभी भी सामान्य स्थिति में नहीं है। महेंद्रगढ़ जिले के अन्य स्थानों के साथ-साथ नारनौल की आबोहवा ठीक नहीं है। यहां की हवाओं में जहर घुला हुआ है, परंतु तापमान में गिरावट की वजह से कोहरा की मात्रा बढ़ने लगी है। जिसकी वजह से कोहरे में प्रदूषक तत्वों के मिलने की कारण स्मॉग बन रहा है जो आमजन के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। जिसके कारण सांस की समस्या के रोगी, आंखों की समस्याओं के रोगी, चर्म समस्याओं के रोगी, गले से संबंधित रोगों के रोगी, मानसिक अवसाद के रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है।
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मैदानी इलाकों में हर रोज न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के कई जगहों पर इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। राजस्थान का सीकर मैदानी इलाकों में सबसे ठंडा स्थान रहा। वहीं पहाड़ी इलाकों में शिमला का न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस, नैनीताल का 8 डिग्री सेल्सियस व कांगड़ा का 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
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राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस साल सामान्य से अधिक वर्षा और सामान्य से अधिक ठंड पड़ने की संभावनाएं बन रही है। शीत ऋतु इस बार अपने रिकॉर्ड तोड़ेगी और उतरी भारत के मैदानी राज्य में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। लानीना मौसमी प्रणाली का प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई पड़ने लगा है। मध्य भारत से लेकर दक्षिण भारत तक इसी प्रणाली की वजह से वर्तमान समय में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नए-नए लो प्रेशर एरिया और डीप डिप्रेशन से जल्द ही बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवात बनने की भी संभावनाएं बन रही हैं। जबकि पर्वतीय क्षेत्रों पर इस बार अधिक हिमपात हो रहा है। जिसके प्रभाव से मैदानी क्षेत्रों पर धीरे-धीरे पारा कम होता जा रहा है।
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रविवार को नारनौल पूरे हरियाणा में सबसे ठंडा स्थान रहा है। यहां का तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि महेंद्रगढ़ का तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस रहा। नारनौल का वायु गुणवत्ता सूचकांक में शनिवार के मुकाबले काफी सुधार हुआ है। रविवार को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड आंकड़ों के अनुसार नारनौल का वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 दर्ज किया गया। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ का 198, कनीना 201, अटेली का 200 जो अभी भी सामान्य स्थिति में नहीं है। महेंद्रगढ़ जिले के अन्य स्थानों के साथ-साथ नारनौल की आबोहवा ठीक नहीं है। यहां की हवाओं में जहर घुला हुआ है, परंतु तापमान में गिरावट की वजह से कोहरा की मात्रा बढ़ने लगी है। जिसकी वजह से कोहरे में प्रदूषक तत्वों के मिलने की कारण स्मॉग बन रहा है जो आमजन के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। जिसके कारण सांस की समस्या के रोगी, आंखों की समस्याओं के रोगी, चर्म समस्याओं के रोगी, गले से संबंधित रोगों के रोगी, मानसिक अवसाद के रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है।