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जेब खाली, रसोई खाली, क्या खाएं कहां जाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Nov 2016 12:49 AM IST
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महेंद्रगढ़। नोटबंदी के कारण होने वाली परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती जा रहा है। लोगों को कैश नहीं मिल रहा। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बाजार के व्यापारियों ने दूसरे राज्यों से कैश के अभाव में माल मंगवाना बंद कर दिया है क्योंकि शहर के बाजार पिछले तीन चार दिनों से मंदी से जूझ रहे हैं। वैसे भी दूसरे राज्यों से ट्रांसपोर्ट पर गाड़ियों को माल नहीं मिल रहा। 10 नवंबर के गाड़ियां अपने स्टेंड पर खाली खड़ी हैं। न तो माल यहां से जा रहा, न ही आ रहा। पहले प्रतिदिन अलग-अलग ट्रांसपोर्टों पर 30 टन माला आता था लेकिन अब पांच छह टन ही माल आ रहा है। गाड़ियां खाली ही वापस आ रही हैं। इतना ही नहीं ट्रांसपोर्ट पर काम करने वाले पल्लेदारों को बिना कमाई के वापस निराश लौटना पड़ रहा है। अगर एक सप्ताह तक बाजार आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं हुआ तो आम उपभोक्ताओं के लिए समस्या पैदा हो सकती है। इससे न केवल विवाह शादी वालों को बल्कि आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। अगर ट्रांसपोर्टरों की माने तो अभी स्थिति को सामान्य होने पर एक महीने तक का समय लग सकता है तब तक बाजार का हाल और भी अधिक बिगड़ सकता है।
कहां से कौन सा माल आता है
नोटबंदी के बाद से ट्रांसपोर्टों का बुरा हाल हैं। किसी भी राज्य से गाड़ियों को माल नहीं मिल पा रहा है। इससे दुुकानदार, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी, पलदार तथा आमजनता सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं। महेंद्रगढ़ में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, जम्मु कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु सहित 20 स्टेटों से माल आता है। लेकिन 10 नवंबर के बाद एक गाड़ी ही मुश्किल से माल लेकर यहां आई है। यहां के व्यापारी केरल एवं तमिलनाडु से होजरी का सामान जैसे बनियान, अंडरवियर आदि मंगवाते हैं। गुजरात तथा महाराष्ट्र से साड़ियां आती हैं। पंजाब से गर्म वस्त्र शाल, जर्सी, कोट आदि, दिल्ली से जरनल स्टोर का सामान, जुते, चप्पल, खिलौने तथा अन्य वस्तुएं आती हैं जबकि महेंद्रगढ़ व नारनौल से सरसों, बाजरा, पत्थरों का पाउडर तथा अन्य सामान यहां से दूसरे राज्यों में लेकर जाते हैं।
प्रतिदिन आता था 30 टन माल
शहर के ऑटो मार्केट में तीन ट्रांसपोर्ट हैं। प्रत्येक ट्रांसपोर्ट पर प्रतिदिन 10टन का माल आ जाता था। लेकिन अब ट्रांसपोर्ट पर माल ही नहीं हैं। सभी ट्रांसपोर्ट खाली पड़े हैँ मुश्किल प्रतिदिन 5 टन माल आ रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 10 नवंबर के बाद मुश्किलें ज्यादा बढ़ गईं। दूसरे राज्यों के ट्रांसपोर्ट पर गाड़ियों को माल ही नहीं मिल पा रहा। एक गाड़ी 2 टन मुश्किल से माल लेकर आ रही है। ऐसे में केवल गाड़ी और ड्राइवर का खर्चा निकल पा रहा है।
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तीन दिन से खाली हैं पल्लेदार
नोटबंदी की मार न केवल आमजन को झेल रहा है बल्कि गरीब, मजदूर और पल्लेदारों को भी झेलनी पड़ रही है। शहर की ट्रांसपोर्ट पर काम करने वाले पल्लेदारों तीन दिन से काम नहीं मिल रहा। पलदार ताश आदि खेलकर वापस खाली हाथ घर चले जाते हैं जबकि छोटी रेहड़ी चालक भी इससे प्रभावित हैं। रमेश, मुकेश, महेंद्र, राजू, महेंद्र चोटीवाला ने बताया कि तीन दिन से वो खाली हैं गाड़ियों में माल ही नहीं आ रहा इस कारण उन्हें तीन से काम नहीं मिल पा रहा।
नगर में विभिन्न राज्यों से माल आता है लेकिन नोटबंदी के बाद बाजारों में आर्थिक मंदी का माहौल है। गाड़ियों को ट्रांसपोर्ट पर माल नहीं मिल पा रहा है। ज्यादा स्थिति 10 नवंबर के बाद बिगड़ी है। अब 2 टन मुश्किल से एक गाड़ी में माल आ रहा है। स्थिति को सामान्य होने में अभी 1 महीना लग सकता है। -चेतनप्रकाश , ट्रांसपोर्टर
दिल्ली से गाड़ियां खाली आ रही हैं, गाड़ियों को माल ही नहीं मिल रहा। अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले कुछ दिनों में आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। -कमल सिंह, मुनीम
क्या करें भाई साहब पिछले तीन दिनों गाड़ियां ही नहीं आ रही हैं, नोट बंदी के बाद उनका काम कम हो गया है। तीन दिन से ट्रांसपोर्ट पर खाली बैठकर ही वापस घर जा रहे हैं। -मुकेश।
क्या भाई साहब पल्लेदार करके बच्चों का पेट पाल रहे हैं लेकिन तीन दिनों से काम ही नहीं है घर से आं जाते हैं लेकिन काम नहीं होने पर वापस खाली हाथ लौटना पड़ता है।-महेंद्र, पल्लेदार
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कहां से कौन सा माल आता है
नोटबंदी के बाद से ट्रांसपोर्टों का बुरा हाल हैं। किसी भी राज्य से गाड़ियों को माल नहीं मिल पा रहा है। इससे दुुकानदार, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी, पलदार तथा आमजनता सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं। महेंद्रगढ़ में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, जम्मु कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु सहित 20 स्टेटों से माल आता है। लेकिन 10 नवंबर के बाद एक गाड़ी ही मुश्किल से माल लेकर यहां आई है। यहां के व्यापारी केरल एवं तमिलनाडु से होजरी का सामान जैसे बनियान, अंडरवियर आदि मंगवाते हैं। गुजरात तथा महाराष्ट्र से साड़ियां आती हैं। पंजाब से गर्म वस्त्र शाल, जर्सी, कोट आदि, दिल्ली से जरनल स्टोर का सामान, जुते, चप्पल, खिलौने तथा अन्य वस्तुएं आती हैं जबकि महेंद्रगढ़ व नारनौल से सरसों, बाजरा, पत्थरों का पाउडर तथा अन्य सामान यहां से दूसरे राज्यों में लेकर जाते हैं।
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प्रतिदिन आता था 30 टन माल
शहर के ऑटो मार्केट में तीन ट्रांसपोर्ट हैं। प्रत्येक ट्रांसपोर्ट पर प्रतिदिन 10टन का माल आ जाता था। लेकिन अब ट्रांसपोर्ट पर माल ही नहीं हैं। सभी ट्रांसपोर्ट खाली पड़े हैँ मुश्किल प्रतिदिन 5 टन माल आ रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 10 नवंबर के बाद मुश्किलें ज्यादा बढ़ गईं। दूसरे राज्यों के ट्रांसपोर्ट पर गाड़ियों को माल ही नहीं मिल पा रहा। एक गाड़ी 2 टन मुश्किल से माल लेकर आ रही है। ऐसे में केवल गाड़ी और ड्राइवर का खर्चा निकल पा रहा है।
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तीन दिन से खाली हैं पल्लेदार
नोटबंदी की मार न केवल आमजन को झेल रहा है बल्कि गरीब, मजदूर और पल्लेदारों को भी झेलनी पड़ रही है। शहर की ट्रांसपोर्ट पर काम करने वाले पल्लेदारों तीन दिन से काम नहीं मिल रहा। पलदार ताश आदि खेलकर वापस खाली हाथ घर चले जाते हैं जबकि छोटी रेहड़ी चालक भी इससे प्रभावित हैं। रमेश, मुकेश, महेंद्र, राजू, महेंद्र चोटीवाला ने बताया कि तीन दिन से वो खाली हैं गाड़ियों में माल ही नहीं आ रहा इस कारण उन्हें तीन से काम नहीं मिल पा रहा।
नगर में विभिन्न राज्यों से माल आता है लेकिन नोटबंदी के बाद बाजारों में आर्थिक मंदी का माहौल है। गाड़ियों को ट्रांसपोर्ट पर माल नहीं मिल पा रहा है। ज्यादा स्थिति 10 नवंबर के बाद बिगड़ी है। अब 2 टन मुश्किल से एक गाड़ी में माल आ रहा है। स्थिति को सामान्य होने में अभी 1 महीना लग सकता है। -चेतनप्रकाश , ट्रांसपोर्टर
दिल्ली से गाड़ियां खाली आ रही हैं, गाड़ियों को माल ही नहीं मिल रहा। अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले कुछ दिनों में आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। -कमल सिंह, मुनीम
क्या करें भाई साहब पिछले तीन दिनों गाड़ियां ही नहीं आ रही हैं, नोट बंदी के बाद उनका काम कम हो गया है। तीन दिन से ट्रांसपोर्ट पर खाली बैठकर ही वापस घर जा रहे हैं। -मुकेश।
क्या भाई साहब पल्लेदार करके बच्चों का पेट पाल रहे हैं लेकिन तीन दिनों से काम ही नहीं है घर से आं जाते हैं लेकिन काम नहीं होने पर वापस खाली हाथ लौटना पड़ता है।-महेंद्र, पल्लेदार