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मांगों को लेकर सरकारी अस्पताल के चिकित्सक रहे दो घंटे हड़ताल पर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Sep 2016 12:30 AM IST
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नारनौल। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को नागरिक अस्पताल के सभी चिकित्सा अधिकारी सुबह 8 बजे से 10 बजे तक पूर्ण रूप से सांकेतिक कलम छोड़ हड़ताल पर रहे। जनहित को देखते हुए आपातकालीन सुविधाएं चालू रखी गई। हड़ताल के दौरान एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. आदित्य, महासचिव डा. जितेंद्र यादव, डा. संगीता सहसचिव, उप प्रधान डा. विकास सुटवाल, उप प्रधान डा. मनीष यादव सहित सभी चिकित्सा अधिकारी जिला मुख्यालय पर उपस्थित रहें। इस मौके पर एसोसिएशन के जिला महासचिव डा. जितेंद्र यादव ने सातवें वित्त आयोग में चिकित्सकों का नान प्रेक्टिस भत्ता बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की बजाय 25 प्रतिशत से 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। वहीं पहले एनपीए जो बेसिक पे का हिस्सा होता था उसे भी हटा दिया गया है। इसके अलावा अस्पतालों में सुरक्षा व मूलभूत सुविधाओं, निवास स्थान, कार्य स्थल व प्राथमिक सुविधाओं के अभाव तथा चिकित्सकों की कमी के कारण कार्य के अधिक भार को लेकर राज्य के सभी चिकित्सकों में काफी रोष है। सरकार को के इस निर्णय के विरोध में सभी चिकित्सकों ने 11 सितंबर को करनाल में राज्य स्तर सभा में भाग लेने का फैसला लिया है। चिकित्सकों की कमी के कारण उन पर अनावश्यक अतिरिक्त भार पड़ता है। इस कारण मरीजों को या तो घंटों पंक्तियों में लगना पड़ता है या फिर सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। एसोसिएशन के प्रधान डा. आदित्य ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं की कमी व वेतन में भेदभाव के कारण हरियाणा प्रदेश में नए चिकित्सक कार्य करना नहीं चाहते, वहीं कार्यरत चिकित्सक नौकरी छोड़ रहे है। प्रधान ने बताया कि एसोसिएशन द्वारा समय-समय पर सरकार को अवगत करवाकर राज्य में जनमानस को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों को विशेष भत्ता, केंद्र सरकार के तर्ज पर भत्ते, अच्छे वेतन, एसीपी, पीजी पालिसी तथा सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करना प्रदेश में तुरंत प्रभाव से लागू करनी चाहिए। महासचिव ने बताया की सरकार अगर अपने निणर्शय को नहीं बदलती है तो हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन इसके विरोध में सख्त कदम उठाएंगी। जोकि 11 सितंबर को करनाल में एसोसिएशन की महासभा के दौरान निश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके चलते सभी आपातकालीन सेवाएं चालू रखी गई। वहीं ओपीडी भी सुबह 10 बजे उपरांत शुरू कर दी गई।
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