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Mahendragarh-Narnaul News: नारनौल डिविजन को पूरा पानी नहीं मिल रहा
Tue, 24 Dec 2024 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 24 Dec 2024 12:30 AM IST
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फोटो नंबर-04नहर में चलता पानी।
नारनौल। जिले में 25 दिन बाद नहर आने पर भी नारनौल डिविजन को पूरा पानी नहीं मिल रहा है। जहां नारनौल डिविजन को 485 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। कभी 140 तो कभी 385 क्यूसेक पानी मिल रहा है। इसमें नांगल चौधरी व नारनौल डिविजन की डिस्ट्रीब्यूटरी शामिल है।
यदि नारनौल ब्रांच की बात की जाए तो उसे 234.25 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन यहां भी कभी 70 तो कभी 35 क्यूसेक पानी मिल रहा है। ऐसे में नांगल चौधरी सहित अन्य तीनों डिस्ट्रीब्यूटरी के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। इन तीनों डिस्ट्रीब्यूटरी में से 11 माइनर भी निकलती है। अब पानी का बहाव कम होगा तो किसानों तक पानी भी उचित मात्रा में उपलब्ध नहीं हो सकेगा।
बता दें कि 20 दिसंबर को खुबडू हेड से पानी छोड़ा गया था, जो रात को ही नहर पहुंच गई। इसके बाद सिंचाई विभाग की तरफ से 21 दिसंबर से पानी तीनों डिस्ट्रीब्यूटरी में छोड़ दिया गया था।
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राजस्थान सीमावर्ती पर महेंद्रगढ़ जिला होने की वजह से भूजलस्तर काफी नीचे है। इसकी वजह से किसान नहरी पानी पर निर्भर रहता है। इस समय सरसों व गेहूं में पानी की अधिक जरूरत होती है। जिले में सरसों 1.40 लाख और गेहूं 22 हजार एकड़ में बुआई की जाती है, अब इस समय फसल में पानी की जरूरत ज्यादा होती है।
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यदि नारनौल ब्रांच की बात की जाए तो उसे 234.25 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन यहां भी कभी 70 तो कभी 35 क्यूसेक पानी मिल रहा है। ऐसे में नांगल चौधरी सहित अन्य तीनों डिस्ट्रीब्यूटरी के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। इन तीनों डिस्ट्रीब्यूटरी में से 11 माइनर भी निकलती है। अब पानी का बहाव कम होगा तो किसानों तक पानी भी उचित मात्रा में उपलब्ध नहीं हो सकेगा।
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बता दें कि 20 दिसंबर को खुबडू हेड से पानी छोड़ा गया था, जो रात को ही नहर पहुंच गई। इसके बाद सिंचाई विभाग की तरफ से 21 दिसंबर से पानी तीनों डिस्ट्रीब्यूटरी में छोड़ दिया गया था।
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राजस्थान सीमावर्ती पर महेंद्रगढ़ जिला होने की वजह से भूजलस्तर काफी नीचे है। इसकी वजह से किसान नहरी पानी पर निर्भर रहता है। इस समय सरसों व गेहूं में पानी की अधिक जरूरत होती है। जिले में सरसों 1.40 लाख और गेहूं 22 हजार एकड़ में बुआई की जाती है, अब इस समय फसल में पानी की जरूरत ज्यादा होती है।