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Mahendragarh-Narnaul News: कीमतों की गिरावट से आम लोगों की थाली तक पहुंचा मशरूम

Wed, 24 Dec 2025 12:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 24 Dec 2025 12:29 AM IST
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Mushrooms reached the plate of the common people from the fall of pricesMushrooms reached the plate of the common people from the fall of prices
फोटो संख्या:52 शहर की सब्जी मंडी ​स्थित दुकान पर रखे मशरूम के बॉक्स। संवाद
महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ जिले में अक्तूबर से फरवरी तक प्राकृतिक रूप से मशरूम उत्पादन के चलते अब भावों में भी 200 रुपये प्रति किलो की गिरावट हुई है। भावों में गिरावट के चलते मशरूम भी आमजन की थाली तक पहुंच गया है।
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अक्तूबर माह से ही जिले में 100 से अधिक किसान प्राकृतिक रूप से मशरूम का प्रतिदिन करीब 30 क्विंटल उत्पादन कर रहे हैं। जिले की मंडियों में स्थानीय आपूर्ति होने से पिछले तीन माह के दौरान भाव भी 350 रुपये से घटकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।
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स्थानीय स्तर पर मशरूम की आपूर्ति बढ़ने से इन दिनों बाजार में इसके भावों में गिरावट का क्रम जारी है। पहले जहां मशरूम सीमित मात्रा में बाहर की मंडियों से आता था, अब क्षेत्र के किसान स्वयं मशरूम का उत्पादन कर बाजार में आपूर्ति कर रहे हैं। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है और आमजन को पहले की तुलना में सस्ते दामों पर मशरूम उपलब्ध हो रहा है।
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किसानों और व्यापारियों दोनों का मानना है कि यदि इसी तरह स्थानीय उत्पादन बढ़ता रहा तो आने वाले समय में मशरूम की खपत और भी बढ़ेगी। स्थानीय स्तर पर मशरूम की आपूर्ति बढ़ने से किसानों, व्यापारियों के साथ-साथ आमजन को लाभ मिल रहा है। कीमतों में आई गिरावट ने मशरूम को आम लोगों की थाली तक पहुंचा दिया है।

सब्जी मंडी में प्रतिदिन करीब पांच क्विंटल मशरूम की खपत हो रही है। होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट के साथ-साथ आम घरों में भी मशरूम की मांग लगातार बनी हुई है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते लोग अपने भोजन में मशरूम को शामिल कर रहे हैं, जिससे इसकी नियमित खपत हो रही है। वर्तमान में मंडी में मशरूम 150-200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है, जो कुछ समय पहले तक 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता था। किसानों के अनुसार मशरूम की खेती कम समय में तैयार होने वाली और लागत के मुकाबले अच्छा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। इसी कारण कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से न केवल बाजार में ताजे मशरूम की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि परिवहन लागत भी कम हुई है, जिससे भावों में गिरावट आई है।

स्थानीय आपूर्ति बढ़ने से उन्हें समय पर माल मिल जाता है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। पहले बाहर की मंडियों से आने वाले मशरूम में ताजगी की कमी रहती थी, जबकि अब स्थानीय उत्पाद होने से उपभोक्ताओं को ताजा और स्वच्छ मशरूम मिल रहा है।

प्रवीण गोस्वामी, दुकानदार

सब्जी मंडी में मशरूम के भाव कम हुए हैं, जिससे बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई है। दाम कम होने से अब वे नियमित रूप से मशरूम खरीद पा रहे हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर मशरूम को लोग सब्जी, सूप और अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल कर रहे हैं।
- दर्शन सैनी, दुकानदार।
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