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Mahendragarh-Narnaul News: बारिश से बाजरा व कपास की फसल को फायदा
Fri, 02 Aug 2024 12:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 02 Aug 2024 12:37 AM IST
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महेंद्रगढ़। पिछले 24 घंटे में 105 एमएम बारिश के बाद जिले में 257415 एकड़ में खड़ी मुरझाई फसलों में जान आ गई है। बुधवार शाम छह बजे से वीरवार शाम पांच बजे तक जिले में कुल 105 एमएम बारिश हुई है।
जुलाई के दौरान औसत से कम बारिश होने व लगातार उमसभरी गर्मी व तेज धूप के कारण फसलें मुरझाने लगी थीं। अच्छी बारिश के बाद तापमान में भी पांच डिग्री की गिरावट के साथ 32 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। वहीं न्यूनतम तापमान भी तीन डिग्री की गिरावट के साथ 26 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों ने आगामी चार दिन तक क्षेत्र में अच्छी बारिश की संभावना जताई है।
लंबे समय से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण बाजरे व कपास की फसलें मुरझाने लगी थीं। किसानों ने फसलों की सिंचाई भी शुरू कर दी थी। बिजली व नहरी पानी के अभाव में किसानों के लिए फसलों को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। ऐसे में मौसम विशेषज्ञ भी इस बारिश को सोने पे सुहागा मान रहे हैं।
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यह है जिले में फसलों का रकबा
फसल का नाम रकबा एकड़ में
बाजरा 1.85 लाख
कपास 47 हजार
पशु चारा 7 हजार
मूंगफली 415 एकड़
इस समय जिले की दोनों ही प्रमुख फसलों में सिंचाई की आवश्यकता थी। अधिक समय तक बारिश नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी थी। वहीं कपास फसल में हरा तेला व सफेद मक्खी के प्रकोप का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन अब अच्छी बारिश होने से दोनों ही फसलों की तेजी से बढ़वार शुरू हो जाएगी। इस समय बाजरे की फसल में पोरियां बननी शुरू हो चुकी हैं, जबकि कपास की फसल में फल आने लगा है। बारिश के बाद दोनों की फसलों की अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद है।
-डॉ. अजय यादव, उपमंडल अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग महेंद्रगढ़।
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जुलाई के दौरान औसत से कम बारिश होने व लगातार उमसभरी गर्मी व तेज धूप के कारण फसलें मुरझाने लगी थीं। अच्छी बारिश के बाद तापमान में भी पांच डिग्री की गिरावट के साथ 32 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। वहीं न्यूनतम तापमान भी तीन डिग्री की गिरावट के साथ 26 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों ने आगामी चार दिन तक क्षेत्र में अच्छी बारिश की संभावना जताई है।
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लंबे समय से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण बाजरे व कपास की फसलें मुरझाने लगी थीं। किसानों ने फसलों की सिंचाई भी शुरू कर दी थी। बिजली व नहरी पानी के अभाव में किसानों के लिए फसलों को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। ऐसे में मौसम विशेषज्ञ भी इस बारिश को सोने पे सुहागा मान रहे हैं।
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यह है जिले में फसलों का रकबा
फसल का नाम रकबा एकड़ में
बाजरा 1.85 लाख
कपास 47 हजार
पशु चारा 7 हजार
मूंगफली 415 एकड़
इस समय जिले की दोनों ही प्रमुख फसलों में सिंचाई की आवश्यकता थी। अधिक समय तक बारिश नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी थी। वहीं कपास फसल में हरा तेला व सफेद मक्खी के प्रकोप का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन अब अच्छी बारिश होने से दोनों ही फसलों की तेजी से बढ़वार शुरू हो जाएगी। इस समय बाजरे की फसल में पोरियां बननी शुरू हो चुकी हैं, जबकि कपास की फसल में फल आने लगा है। बारिश के बाद दोनों की फसलों की अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद है।
-डॉ. अजय यादव, उपमंडल अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग महेंद्रगढ़।