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Mahendragarh-Narnaul News: ड्राई-डे पर भी ‘पर्दे’ में बिकी शराब
Thu, 03 Oct 2024 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 03 Oct 2024 12:24 AM IST
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फोटो नंबर-09ठेके के पीछे से शराब निकाल कर देता व्यक्ति। संवाद
नारनौल। गांधी जयंती 2 अक्तूबर के दिन देश सहित प्रदेश भर में ड्राई डे रहता है। बावजूद इसके नारनौल में प्रशासन की नाक के नीचे चोरी छिपे धड़ल्ले से शराब बेची जा रही है।
शहर में भले ही ड्राई डे के दिन शराब खरीदने में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़े, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आपको आसानी से शराब उपलब्ध हो जाएगी। अमर उजाला की टीम ने पड़ताल करते हुए पाया की शहर में कई जगह ठेके तो बंद हैं, लेकिन परदे के पीछे से शराब बेची व खरीदी जा रही है।
निर्धारित रेट से ज्यादा कीमत की जाती है वसूल
ड्राई डे पर सेल्समैन कुछ अधिक पैसे कमाने के लालच में ठेके के आसपास मौजूद दुकानों व रेहड़ी आदि वालों के पास रेगुलर बिकने वाली शराब का स्टॉक छुपा कर रख देते हैं। ऐसे में जो उनके रेगुलर कस्टमर होते हैं, उन्हें निर्धारित दाम से कुछ अधिक में शराब उपलब्ध करा देते हैं। ऐसे में रेट से ऊपर का जो पैसा होता है वो उनकी कमाई होती है।
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दोगुने दाम पर खरीदा पव्वा
शहर में एक स्थित शराब ठेके का शटर बंद था, लेकिन एक व्यक्ति द्वारा ठेके के पीछे की ओर से शराब बेची जा रही थी। टीम ने शराब बेचने वाले से पूछा शराब मिलेगी क्या, पहले तो उसने मना किया लेकिन बाद में वह बोला की सिर्फ देशी शराब मिल पाएगी और वो भी दोगुने दाम पर मिलेगी। टीम ने उसे 100 रुपये दिए और देशी शराब का एक पव्वा लेने की मांग की। इसके बाद शराब बेचने वाला व्यक्ति ठेके के पीछे जाकर एक थैले में से शराब का पव्वा निकालता है और टीम के सदस्यों को दे दिया। जब उससे पूछा कि ड्राई डे वाले दिन वह शराब क्यों बेच रहा है तो उसके पास कोई जवाब नहीं था और वह इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करने की प्रार्थना करता है।
अगर ठेके पर शराब बेची जा रही है तो ऐसी सूरत में विभाग की ओर से ठेके को सील कर दिया जाता है। साथ ही ठेके के अलावा कहीं और शराब बेचने की दशा में मामला पुलिस देखती है।
अनिल शर्मा, जिला आबकारी एवं कराधान अधिकारी नारनौल।
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शहर में भले ही ड्राई डे के दिन शराब खरीदने में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़े, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आपको आसानी से शराब उपलब्ध हो जाएगी। अमर उजाला की टीम ने पड़ताल करते हुए पाया की शहर में कई जगह ठेके तो बंद हैं, लेकिन परदे के पीछे से शराब बेची व खरीदी जा रही है।
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निर्धारित रेट से ज्यादा कीमत की जाती है वसूल
ड्राई डे पर सेल्समैन कुछ अधिक पैसे कमाने के लालच में ठेके के आसपास मौजूद दुकानों व रेहड़ी आदि वालों के पास रेगुलर बिकने वाली शराब का स्टॉक छुपा कर रख देते हैं। ऐसे में जो उनके रेगुलर कस्टमर होते हैं, उन्हें निर्धारित दाम से कुछ अधिक में शराब उपलब्ध करा देते हैं। ऐसे में रेट से ऊपर का जो पैसा होता है वो उनकी कमाई होती है।
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दोगुने दाम पर खरीदा पव्वा
शहर में एक स्थित शराब ठेके का शटर बंद था, लेकिन एक व्यक्ति द्वारा ठेके के पीछे की ओर से शराब बेची जा रही थी। टीम ने शराब बेचने वाले से पूछा शराब मिलेगी क्या, पहले तो उसने मना किया लेकिन बाद में वह बोला की सिर्फ देशी शराब मिल पाएगी और वो भी दोगुने दाम पर मिलेगी। टीम ने उसे 100 रुपये दिए और देशी शराब का एक पव्वा लेने की मांग की। इसके बाद शराब बेचने वाला व्यक्ति ठेके के पीछे जाकर एक थैले में से शराब का पव्वा निकालता है और टीम के सदस्यों को दे दिया। जब उससे पूछा कि ड्राई डे वाले दिन वह शराब क्यों बेच रहा है तो उसके पास कोई जवाब नहीं था और वह इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करने की प्रार्थना करता है।
अगर ठेके पर शराब बेची जा रही है तो ऐसी सूरत में विभाग की ओर से ठेके को सील कर दिया जाता है। साथ ही ठेके के अलावा कहीं और शराब बेचने की दशा में मामला पुलिस देखती है।
अनिल शर्मा, जिला आबकारी एवं कराधान अधिकारी नारनौल।