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Mahendragarh-Narnaul News: युवक पर हमले से अब वकीलों में भय
Sat, 07 Dec 2024 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 07 Dec 2024 12:00 AM IST
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नारनौल। कोर्ट परिसर में वीरवार दोपहर एक मामले में तारीख पर आए युवक पर हमले से अब वकीलों में भय है। इनका कहना है कि इस तरह दिनदहाड़े न्यायालय परिसर में हमले सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाते हैं।
कोर्ट परिसर में नाममात्र के सुरक्षाकर्मी तैनात रहने व कोर्ट में कुछ गेट बिना जरूरत के ही खुले रहते हैं। वकीलों का कहना है कि 5 दिसंबर का घटना को अंजाम देकर युवक जिस रास्ते से भाग कर गए वह कोर्ट में आने-जाने का मुख्य रास्ता नहीं है। न ही वहां कोई सुरक्षा कर्मी तैनात रहता है।
वकीलों का कहना है कि या तो कोर्ट परिसर में आने-जाने वाले ऐसे रास्तों को बंद किया जाए या फिर वहां भी पुलिस की तैनाती की जाए। अधिवक्ताओं को कहना है की कोर्ट परिसर में यह पहली घटना नहीं अपितु इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि घटनाओं के बाद कुछ समय तो सुरक्षा बढ़ाई जाती है और बाद में फिर कम हो जाती है जिसके कारण अपराधिक किस्म के लोग फायदा उठा लेते हैं।
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अधिवक्ताओं का कहना है कोर्ट में रोज कोई न कोई पेशी होती रहती है और वे भी किसी न किसी पक्ष की पैरवी करते है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनको भी खतरा रहता जिसे देखते हुए पुलिस द्वारा सुरक्षा का पूरा प्रबंध करना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था की कलई खुली है। यहां आए दिन, अलग अलग गुटों में झगड़ा व खूनी संघर्ष हो रहा है। इसके लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए जाने चाहिए। लिटिगेंट व आगन्तुकों को वकीलों के चैंबर्स परिसर व न्यायिक परिसर में पूरी जांच के बाद प्रवेश दिया जाना चाहिए। गंभीर अपराधी जो जेल में हैं, उनकी सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा की जानी चाहिए।
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कोर्ट परिसर में नाममात्र के सुरक्षाकर्मी तैनात रहने व कोर्ट में कुछ गेट बिना जरूरत के ही खुले रहते हैं। वकीलों का कहना है कि 5 दिसंबर का घटना को अंजाम देकर युवक जिस रास्ते से भाग कर गए वह कोर्ट में आने-जाने का मुख्य रास्ता नहीं है। न ही वहां कोई सुरक्षा कर्मी तैनात रहता है।
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वकीलों का कहना है कि या तो कोर्ट परिसर में आने-जाने वाले ऐसे रास्तों को बंद किया जाए या फिर वहां भी पुलिस की तैनाती की जाए। अधिवक्ताओं को कहना है की कोर्ट परिसर में यह पहली घटना नहीं अपितु इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि घटनाओं के बाद कुछ समय तो सुरक्षा बढ़ाई जाती है और बाद में फिर कम हो जाती है जिसके कारण अपराधिक किस्म के लोग फायदा उठा लेते हैं।
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अधिवक्ताओं का कहना है कोर्ट में रोज कोई न कोई पेशी होती रहती है और वे भी किसी न किसी पक्ष की पैरवी करते है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनको भी खतरा रहता जिसे देखते हुए पुलिस द्वारा सुरक्षा का पूरा प्रबंध करना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था की कलई खुली है। यहां आए दिन, अलग अलग गुटों में झगड़ा व खूनी संघर्ष हो रहा है। इसके लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए जाने चाहिए। लिटिगेंट व आगन्तुकों को वकीलों के चैंबर्स परिसर व न्यायिक परिसर में पूरी जांच के बाद प्रवेश दिया जाना चाहिए। गंभीर अपराधी जो जेल में हैं, उनकी सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा की जानी चाहिए।