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कथा-परिवार की महत्वपूर्ण लघु विधा है लघुकथा : डॉ. मानव

Tue, 02 Sep 2025 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 02 Sep 2025 11:56 PM IST
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Laghukatha is an important short genre of story-family: Dr. Manav
नारनौल। कथा-परिवार की महत्वपूर्ण लघु विधा है लघुकथा। यह बात वरिष्ठ लघु कथाकार और सिंघानिया विश्वविद्यालय पचेरी बड़ी में हिंदी के प्रोफेसर एवं सांस्कृतिक संकाय के अधिष्ठाता डॉ. रामनिवास मानव ने कही।
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वह वैश्विक हिंदी परिवार नई दिल्ली द्वारा आयोजित वैश्विक लघुकथा संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लघुकथा की धार पैनी और मारक क्षमता अचूक होती है, जो पाठक पर गहरा असर करती है। इसकी तुलना रोमांचकारी टी-20 क्रिकेट मैच से की जा सकती है। बर्मिंघम (यूके) की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शैल अग्रवाल ने लघुकथा की तुलना फास्ट फूड से करते हुए कहा कि इसे पढ़ते ही पाठक पर तुरंत प्रभाव होता है। उसमें नई ऊर्जा आ जाती है।
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इससे पूर्व संस्था के अध्यक्ष डॉ. अनिल जोशी ने लघुकथा के स्वरूप एवं महत्त्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी में टोक्यो (जापान) की डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा ने अनमोल सलाह, कोलोन (जर्मनी) की डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने धनाढ्य, आसन (नीदरलैंड) की डॉ. ऋतु शर्मा ने आधुनिक गिरमिटिया, मोका (माॅरीशस) की अंजू घरभरन ने परम सुख का पाठ किया।
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