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बाल रोग विशेषज्ञों की कमी : बेहतर इलाज के अभाव में एसएनसीयू में भर्ती नवजात ने तोड़ दम

Sat, 07 Jan 2023 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 07 Jan 2023 11:24 PM IST
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Lack of paediatricians: Due to lack of better treatment, newborn admitted in SNCU died
नारनौल। जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के चलते नवजात शिशुओं का सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण आए दिन नवजात शिशुओं की मौत हो रही है। शनिवार को भी नागरिक अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती नवजात बच्चे की मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग नारनौल द्वारा अस्पताल में बाल चिकित्सक की नियुक्ति की हुई है लेकिन अस्पताल में कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिस कारण शारीरिक रूप से कमजोर नवजात शिशुओं को इलाज के रेफर किया जा रहा है।
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जानकारी अनुसार गत 5 जनवरी को नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव बूढ़वाल की एक महिला ने नागरिक अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। शारीरिक रूप से कमजोर होने के चलते नवजात को तुरंत नागरिक अस्पताल में बने एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया मगर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बच्चे को बेहतर इलाज नहीं मिल पाया। जिस कारण बच्चे की शनिवार को मौत हो गई। हालांकि वार्ड में तैनात एमबीबीएस बाल रोग चिकित्सक ने नवजात की गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों को दूसरे अस्पताल में ले जाने की बात कही थी लेकिन परिजन किन्हीं कारणों से नवजात को दूसरे अस्पताल में नहीं ले जा पाए जिस कारण नवजात की मौत हो गई। अगर अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती होती तो नवजात की जान बचाई जा सकती थी।
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वर्तमान में अस्पताल में नहीं है कोई बाल रोग विशेषज्ञ
अस्पताल सूत्रों की माने तो नागरिक अस्पताल में दो बाल रोग विशेषज्ञ थी। मगर एक बाल रोग विशेषज्ञ मैट्रनिटी अवकाश है तो दूसरी बाल रोग विशेषज्ञ का गत 15 दिन पूर्व तबादला हो गया है। जिसके बाद से अस्पताल में बच्चों का इलाज एक एमबीबीएस चिकित्सक द्वारा ही किया जा रहा है। जबकि एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों के इलाज के लिए एक बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का होना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार एसएनसीयू वार्ड राम भरोसे ही चल रहा है।
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प्रतिदिन हो रही थी 200 ओपीडी
अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ होने पर प्रतिदिन 150 से 200 ओपीडी हो रही थी। अब बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने पर गरीब लोगों को अपने बच्चों के उपचार के लिए निजी अस्पताल में ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में उनको आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
चिकित्सकों की कमी के चलते नहीं मिल पा रहा लोगों को लाभ
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भरने वाली सरकार व स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल उस समय खुलती नजर आती है जब मरीजों को चिकित्सकों की कमी के चलते समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है। जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के कारण जिलेभर के लोग इलाज करवाने के लिए यहीं आते हैं जबकि सबसे अधिक डिलीवरी भी इसी अस्पताल होती है मगर चिकित्सकों की कमी के चलते लोगों को सस्ता और अच्छा इलाज नहीं मिल पाता है। जिस कारण लोग निजी अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर होते हैं।
जिला मुख्यालय खाली, छोटे स्टेशनों पर तैनात विशेषज्ञ
यहां कमाल की बात यह देखने को सामने आ रही है कि जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा हुआ है। वहीं छोटे स्टेशनों पर जैसे नांगल चौधरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व महेंद्रगढ़ के उप नागरिक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां भी कहीं न कहीं राजनीति हावी बनी हुई है। अन्यथा जिला मुख्यालय पर विशेषज्ञ का पद खाली है और छोटे स्टेशनों पर विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

नागरिक अस्पताल में तैनात बाल रोग चिकित्सक का कुछ दिन पूर्व तबादला होने से पद खाली हो गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। बाल रोग विशेषज्ञ आने तक अन्य प्रशिक्षित बाल रोग चिकित्सकों की सेवाएं ली जा रही है। -डॉ. धर्मेश सैनी, सिविल सर्जन, नारनौल।
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