{"_id":"60a69efb8ebc3efa077515c1","slug":"koriwas-village-story-narnol-news-rtk6092330102","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरियावास गांव की गलियां अब भी सूनी, एक दूसरे से मिलने से कतरा रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरियावास गांव की गलियां अब भी सूनी, एक दूसरे से मिलने से कतरा रहे लोग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नारनौल। ढोसी पहाड़ी की तलहटी में बसा गांव कोरियावास फिलहाल जिले में सबसे चर्चित गांव है। इसका कारण यह है कि यहां पर लगभग चार सौ कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे में यहां पर स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियां और कर्मी ही आ रहे हैं। गांव में आने से रिश्तेदार और जानने वाले भी फिलहाल आने से बच रहे हैं।
कोरोना के चलते गांव की गलियां सूनी पड़ी हैं। जिस मोहल्ले में अधिक केस हैं वहां पर बांस की बलियां लगाकर रास्ता बंद किया गया है। वहां पर हरियाणा पुलिस के जवान पहरा दे रहे हैं। केवल स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को या सामान पहुंचाने वालों को ही आने जाने की परमिशन है। गांव के लोगों से बात करों तो बताते हैं कि इतना बुरा माहौल कभी नहीं देखा। फिलहाल की स्थिति में गांव के लोग एक दूसरे से मिलने ही कतराते हैं।
गांव में कुछ दूर चलने के बाद बनी पानी की टंकी पर मटका लेकर पहुंची मेवादेवी से बात की गई तो उसने बताया कि इस टंकी पर पानी लेने के लिए एकसाथ बीस से पचीस महिलाएं आती थी। अब केवल एक या दो ही महिलाएं एकबार में आती हैं। गांव के अधिकतर घरों में पॉजिटिव लोग हैं। कई दिनों से गांव में सूनापन है। केवल सरकारी गाड़ियों शोर ही सुनाई देता है। अब तो भगवान से प्रार्थना है कि यह बुरा दौर जल्द खत्म हो जाए।
विज्ञापन
गांव के कैलाश जाखड़ कहते हैं कि अब धीरे धीरे कर लोग ठीक हो रहे हैं। पहले 360 के लगभग लोग पॉजिटिव थे। मगर अब ऐसा नहीं है। सब नॉर्मल होता जा रहा है। अब केवल 30-35 लोग ही बचे हैं। मगर जो लोग पॉजिटिव थे वे अभी भी घर में रहकर दूसरे लोगों से दूरी बनाए हुए हैं। लोगों ने संकल्प लिया है कि कोविड गाइडलाइन का पालन कर कोरोना को हराएंगे। रामसिंह जागेदार का कहना है कि अब गांव को कोरोना मुक्त ही करेंगे। अब सभी लोगों की स्कैनिंग हो चुकी है।
एक दूसरे का कर रहे सहयोग
कई घर ऐसे भी हैं जहां पर अधिकतर लोग पॉजिटिव थे। ऐसे घरों में भोजन पहुंचाना या दूसरी सहायता के लिए ग्रामीण आपस में सहयोग करते रहे। दवा देने के लिए शहर से विभाग की टीमें आती थी। लोगों की जांच भी की जाती। जैसे ही कोई संक्रमित मिलता या संभावित लक्षण होते तो तुरंत वह स्वयं को आइसोलेट कर लेता।
आइसोलेशन सेंटर पर बोले कर्मचारी, ग्रामीण कर रहे पूरा सहयोग
आइसोलेशन सेंटर पर मौजूद एएनएम नवीन कुमारी ने बताया कि उनकी टीम प्रतिदिन गांव में जाती है। रूटीन की स्कैनिंग होती है। ग्रामीण पूरा सहयोग करते हैं। वीएलडीए सत्यनारायण, योगेश व आंगनबाड़ी वर्कर का कहना था कि अब हालात काबू में हैं। बहुत कम पॉजिटिव बचे हैं मगर लोग अभी भी पूरी सावधानी बरत रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से गांव में कोई पॉजिटिव केस नहीं है।
कोरियावास को लेकर प्रशासन सबसे अधिक चिंतित था। मगर अब स्थिति धीरे धीरे सही हो गई है। प्रशासन ने सभी ग्रामीणों की स्कैनिंग की। इसके बाद हल्के लक्षण वाले व पॉजिटिव लोगों को घरों में आइसोलेट किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी पूरी मेहनत की है। अब गांव में बहुत कम मरीज बचे हैं, जो कि अगले तीन से चार दिन स्वस्थ हो जाएंगे।
-अजय कुमार, उपायुक्त
विज्ञापन
कोरोना के चलते गांव की गलियां सूनी पड़ी हैं। जिस मोहल्ले में अधिक केस हैं वहां पर बांस की बलियां लगाकर रास्ता बंद किया गया है। वहां पर हरियाणा पुलिस के जवान पहरा दे रहे हैं। केवल स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को या सामान पहुंचाने वालों को ही आने जाने की परमिशन है। गांव के लोगों से बात करों तो बताते हैं कि इतना बुरा माहौल कभी नहीं देखा। फिलहाल की स्थिति में गांव के लोग एक दूसरे से मिलने ही कतराते हैं।
विज्ञापन
गांव में कुछ दूर चलने के बाद बनी पानी की टंकी पर मटका लेकर पहुंची मेवादेवी से बात की गई तो उसने बताया कि इस टंकी पर पानी लेने के लिए एकसाथ बीस से पचीस महिलाएं आती थी। अब केवल एक या दो ही महिलाएं एकबार में आती हैं। गांव के अधिकतर घरों में पॉजिटिव लोग हैं। कई दिनों से गांव में सूनापन है। केवल सरकारी गाड़ियों शोर ही सुनाई देता है। अब तो भगवान से प्रार्थना है कि यह बुरा दौर जल्द खत्म हो जाए।
विज्ञापन
गांव के कैलाश जाखड़ कहते हैं कि अब धीरे धीरे कर लोग ठीक हो रहे हैं। पहले 360 के लगभग लोग पॉजिटिव थे। मगर अब ऐसा नहीं है। सब नॉर्मल होता जा रहा है। अब केवल 30-35 लोग ही बचे हैं। मगर जो लोग पॉजिटिव थे वे अभी भी घर में रहकर दूसरे लोगों से दूरी बनाए हुए हैं। लोगों ने संकल्प लिया है कि कोविड गाइडलाइन का पालन कर कोरोना को हराएंगे। रामसिंह जागेदार का कहना है कि अब गांव को कोरोना मुक्त ही करेंगे। अब सभी लोगों की स्कैनिंग हो चुकी है।
एक दूसरे का कर रहे सहयोग
कई घर ऐसे भी हैं जहां पर अधिकतर लोग पॉजिटिव थे। ऐसे घरों में भोजन पहुंचाना या दूसरी सहायता के लिए ग्रामीण आपस में सहयोग करते रहे। दवा देने के लिए शहर से विभाग की टीमें आती थी। लोगों की जांच भी की जाती। जैसे ही कोई संक्रमित मिलता या संभावित लक्षण होते तो तुरंत वह स्वयं को आइसोलेट कर लेता।
आइसोलेशन सेंटर पर बोले कर्मचारी, ग्रामीण कर रहे पूरा सहयोग
आइसोलेशन सेंटर पर मौजूद एएनएम नवीन कुमारी ने बताया कि उनकी टीम प्रतिदिन गांव में जाती है। रूटीन की स्कैनिंग होती है। ग्रामीण पूरा सहयोग करते हैं। वीएलडीए सत्यनारायण, योगेश व आंगनबाड़ी वर्कर का कहना था कि अब हालात काबू में हैं। बहुत कम पॉजिटिव बचे हैं मगर लोग अभी भी पूरी सावधानी बरत रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से गांव में कोई पॉजिटिव केस नहीं है।
कोरियावास को लेकर प्रशासन सबसे अधिक चिंतित था। मगर अब स्थिति धीरे धीरे सही हो गई है। प्रशासन ने सभी ग्रामीणों की स्कैनिंग की। इसके बाद हल्के लक्षण वाले व पॉजिटिव लोगों को घरों में आइसोलेट किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी पूरी मेहनत की है। अब गांव में बहुत कम मरीज बचे हैं, जो कि अगले तीन से चार दिन स्वस्थ हो जाएंगे।
-अजय कुमार, उपायुक्त