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डीएपी संकट के बीच किसानों के लिए एक लाख एकड़ में सरसों बिजाई करना बना चुनौती
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जिले में रबी सीजन में करीब 2.50 लाख एकड़ में सरसों की बिजाई की जाती है। लेकिन पिछले एक पखवाड़े से खाद की कमी के चलते तय समय में किसान करीब 1.50 लाख एकड़ में ही सरसों की बिजाई कर पाए हैं। ऐसे में खाद की कमी के कारण सरसों बिजाई से वंचित एक लाख एकड़ में तय समय पर सरसों बिजाई चुनौती से कम नहीं है। पिछले तीन दिनों से खराब मौसम के कारण वैसे ही सरसों की बिजाई नहीं हो रही है। सोमवार से मौसम सही होने पर फिर बिजाई शुरू हो गई है। हालांकि खाद संकट अभी भी बरकरार है।
आमतौर पर 15 से 25 अक्तूबर तक करीब 2.50 लाख एकड़ में से करीब 95 प्रतिशत बिजाई पूरी कर ली जाती थी। लेकिन इस बार खाद संकट के चलते अभी तक किसान केवल 1 लाख 50 हजार एकड़ में ही सरसों बिजाई कर पाए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो किसानों के पास पछेती सरसों बिजाई के लिए एक सप्ताह का समय है। लेकिन संकट के चलते एक सप्ताह के समय में एक लाख एकड़ में सरसों बिजाई करना किसी चुनौती से कम नहीं रहेगा।
मौसम विभाग द्वारा की गई घोषणा के बाद किसानों ने पिछले तीन दिनों तक सरसों की बिजाई रोकी हुई थी। लेकिन सोमवार से मौसम साफ होते ही बिजाई फिर से शुरू हो गई। अब जिले में 1 लाख एकड़ में बिजाई होनी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के वरिष्ठ संयोजक डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि किसान एक सप्ताह तक सरसों की पछेती बिजाई कर सकते हैं। इसके बाद की गई बिजाई से उत्पादन प्रभावित होने की अधिक संभावना बनी रहती है। फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में फसल पकाव पर आने के बाद अधिक गर्मी होने से पछेती सरसों का उत्पादन भी प्रभावित होगा।
डीएपी संकट के चलते किसानों ने एसएसपी खाद को डीएपी के विकल्प के रूप में लिया। इसके बाद जब किसान एसएसपी बिजाई करने लगे तो दुकानों से लेकर सरकारी बिक्री केंद्रों तक इसका भी स्टॉक खत्म हो गया। जबकि अधिकारियों द्वारा दावा किया जा रहा था कि जिला में एसएसपी का पर्याप्त स्टॉक है।
किसानों द्वारा पिछले एक सप्ताह में बिजाई की गई सरसों पर अब हल्की बूंदाबांदी के बाद पपड़ी बनने का भय सता रहा है। रविवार को महेंद्रगढ़ में 7.9 एमएम, अटेली में 5, कनीना में 1, पाली में 0.5 व नारनौल में करीब 2 एमएम बारिश हुई है। सोमवार को सुबह से ही तेज धूप खिली तथा दिनभर हवाएं चली जिसके बाद किसानों को पपड़ी बनने का भय सता रहा है। ताजा बिजाई में पपड़ी बनने से जमवार प्रभावित होने की भी संभावना रहेगी।
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आमतौर पर 15 से 25 अक्तूबर तक करीब 2.50 लाख एकड़ में से करीब 95 प्रतिशत बिजाई पूरी कर ली जाती थी। लेकिन इस बार खाद संकट के चलते अभी तक किसान केवल 1 लाख 50 हजार एकड़ में ही सरसों बिजाई कर पाए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो किसानों के पास पछेती सरसों बिजाई के लिए एक सप्ताह का समय है। लेकिन संकट के चलते एक सप्ताह के समय में एक लाख एकड़ में सरसों बिजाई करना किसी चुनौती से कम नहीं रहेगा।
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मौसम विभाग द्वारा की गई घोषणा के बाद किसानों ने पिछले तीन दिनों तक सरसों की बिजाई रोकी हुई थी। लेकिन सोमवार से मौसम साफ होते ही बिजाई फिर से शुरू हो गई। अब जिले में 1 लाख एकड़ में बिजाई होनी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के वरिष्ठ संयोजक डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि किसान एक सप्ताह तक सरसों की पछेती बिजाई कर सकते हैं। इसके बाद की गई बिजाई से उत्पादन प्रभावित होने की अधिक संभावना बनी रहती है। फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में फसल पकाव पर आने के बाद अधिक गर्मी होने से पछेती सरसों का उत्पादन भी प्रभावित होगा।
डीएपी संकट के चलते किसानों ने एसएसपी खाद को डीएपी के विकल्प के रूप में लिया। इसके बाद जब किसान एसएसपी बिजाई करने लगे तो दुकानों से लेकर सरकारी बिक्री केंद्रों तक इसका भी स्टॉक खत्म हो गया। जबकि अधिकारियों द्वारा दावा किया जा रहा था कि जिला में एसएसपी का पर्याप्त स्टॉक है।
किसानों द्वारा पिछले एक सप्ताह में बिजाई की गई सरसों पर अब हल्की बूंदाबांदी के बाद पपड़ी बनने का भय सता रहा है। रविवार को महेंद्रगढ़ में 7.9 एमएम, अटेली में 5, कनीना में 1, पाली में 0.5 व नारनौल में करीब 2 एमएम बारिश हुई है। सोमवार को सुबह से ही तेज धूप खिली तथा दिनभर हवाएं चली जिसके बाद किसानों को पपड़ी बनने का भय सता रहा है। ताजा बिजाई में पपड़ी बनने से जमवार प्रभावित होने की भी संभावना रहेगी।