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इस मां को सलाम: देश के लिए पति ने दी शहादत, वीरांगना राजेश देवी ने नहीं हारी हिम्मत, दो बेटों को बनाया क्लर्क
Mon, 21 Jul 2025 09:45 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Mon, 21 Jul 2025 09:45 PM IST
सार
देश के लिए पति ने शहादत दी। शहीद हवलदार महेश कुमार की वीरांगना राजेश देवी ने पति की जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपने तीन बच्चों को पढ़ा लिखा कर मुकाम तक पहुंचाया। राजेश देवी के दो बेटे सरकारी विभाग पर क्लर्क की नौकरी करते हैं।
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शहीद महेश कुमार की पत्नी राजेश देवी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा के महेंद्रगढ़ के गांव चितलांग निवासी हवलदार महेश कुमार ने 29 अक्तूबर 2002 को ऑपरेशन रक्षक के दौरान जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में दुश्मनों के साथ लौहा लेते हुए अपनी शहादत दी थी। उनकी शहादत दीपावली के हुई तो पूरे गांव ने पंच पर्व नहीं मनाया था। दीपावली के दिन किसी भी घर में दीप नहीं जला था। हवलदार महेश कुमार की वीरांगना राजेश देवी को संयुक्त परिवार से सहारा मिला तो अपने दोनों बेटों को अलग-अलग सरकारी विभागों में क्लर्क बना दिया। महेश कुमार ही शहादत के समय उनकी सबसे बड़ी बेटी शालू महज आठ साल, बड़ा बेटा राजीव महज चार वर्ष और छोटा बेटा संजय सिंह एक वर्ष का था।
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हरियाणा के शेर के नाम से प्रसिद्ध थे हवलदार महेश कुमार
बलिदानी हवलदार महेश कुमार भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की द्वितीय बटालियन की घातक पलाटून में हरियाणवी शेर के नाम से प्रसिद्ध थे। सीधे युद्ध में निपुण होने और शीघ्र फैसला लेने की क्षमता के कारण कमांड ऑफिसर अनिल सिंह राठौड़ व ताराचंद उन्हें अग्रिम पंक्ति में रखते थे। युद्ध क्षेत्र में दुश्मन की रणनीति को विफल करने में महारत हासिल थी। ऑपरेशन रक्षक के दौरान दुश्मन से सीधे मुकाबले में हैंड ग्रनेड सीधा उनके सीने से टकराया था।
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अहोई अष्टमी के दिन ही हुआ था जन्म, इसी दिन दी शहादत
वीरांगना राजेश देवी ने बताया कि उनके पति गांव के पहले शहीद थे। जब उनकी शहादत का समाचार आया तो पूरे गांव में शोक की लहर थी। दीपावली से पूर्व अहोई अष्ठी के दिन ही उनका जन्म हुआ था और अहोई अष्टमी पर ही शहादत दी थी। किसी भी घर में दीप नहीं जला था और किसी भी घर में पंचपर्व नहीं मनाया गया। आठ जुलाई 1991 में उनकी शादी महेश कुमार से हुई थी। जब उनकी शहादत हुई तो बड़ी बेटी शालू आठ साल की थी जो अब शादीशुदा है। शालू आईआईटी इंदौर से पासआउट है। शालू का पति मेजर कुलदीप सिंह भारतीय सेना की आर्मी सप्लाई कोर में कोलकाता सेवारत हैं। वहीं बड़ा बेटा सिंह महज चार साल का था। ग्रेजुएशन करने के बाद 21 सितंबर 2018 में राजस्व विभाग में क्लर्क पद पर चयन हुआ जो अब सतनाली में सेवारत है। वहीं सबसे छोटा बेटा संजय सिंह महज एक वर्ष का था। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद 14 सितंबर 2020 से संजय नगर निगम गुरुग्राम में क्लर्क पद पर सेवाएं दे रहा है। वर्ष 1991 में जिस कमरे में वह शादी होकर आई थी आज भी उसी कमरे में रहती है। उनकी यादें हमेशा हौसला देती हैं।
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संयुक्त परिवार से मिला पूरा सहयोग
वीरांगना राजेश देवी ने बताया कि संयुक्त परिवार होने हर समय परिवार का सहयोग मिला। महेश कुमार के पिता मास्टर हनुमान सिंह के चार बेटों में से महेश दूसरे नंबर पर था। सबसे बडे़ बेटे हवलदार राजेश कुमार राजपूत राइफल में 18 साल तीन माह की सेवाएं देने के बाद भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होकर इस समय एक टायर एजेंसी चला रहे हैं। वहीं तीसरे नंबर पर नरेश कुमार इस समय क्रशर संचालन कर रहे हैं। जबकि सबसे छोटे भाई राजकुमार हरियाणा पुलिस में 25 वर्षों से सेवाएं दे रहा है। इस समय बतौर उप निरीक्षक मेवात जिले में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि संयुक्त परिवार होने के कारण उसे पूरा सहयोग मिला। बच्चों की पढ़ाई भी पूरी कराई। इस समय वह भी बतौर आंगनबाड़ी वर्कर अपनी सेवाएं दे रही है। संयुक्त परिवार होने के कारण सभी ने हौसला दिया जिससे तीनों बच्चे कामयाब हुए।
बेटे ने बताई मां के संघर्ष की कहानी
वीरांगना के बड़े बेटे राजीव सिंह ने अपनी मां के संघर्षों की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि मां ने ही पिता व माता दोनों की भूमिका निभाई। जब भी कभी स्कूल में या बाहर पिता की जरूरत होती थी तो मां ही पिता की भूमिका निभाती थी। तीनों भाई बहनों की शिक्षा पूरी करने में उन्होंने हर समय मार्गदर्शन किया। परिवार से भी हर संभव सहयोग मिला। बचपन से ही बड़ा अधिकारी बनाने का सपना दिखाया था। इस समय भी मां पूरे परिवार का मार्गदर्शन करती है।