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हादसों में घायल व अन्य को जरूरत पड़ने पर नारनौल से मंगवाना पड़ता है खून

Mon, 08 Jul 2019 11:12 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 11:12 PM IST
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Hospital Problems
अगर सड़क हादसे में कोई घायल हो गए तो महेंद्रगढ़ उप नागरिक अस्पताल में उनके लिए पर्याप्त खून नहीं है। घायलों को खून चढ़ाने के लिए नारनौल से ब्लड लाना पड़ेगा। अस्पताल बनने के 46 वर्ष बाद भी महेंद्रगढ़ उप नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं खुला है। क्षेत्र के लगभग पांच सौ से अधिक डोनर प्रति वर्ष अपना ब्लड डोनेट कर रहे हैं बावजूद इसके अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं है। खून की कमी के चलते सड़क हादसों में घायलों को रेफर कर दिया जाता है जो रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं। लगभग 150 से अधिक गांवों के बीच यह एक मात्र उप नागरिक अस्पताल है लेकिन सुविधा अभाव में यहां आने वाले घायल दम तोड़ जाते हैं। इसके अलावा वेंटिलेटर और अल्ट्रासाउंड मशीन का भी अभाव है। सुविधा के अभाव में लोगों को निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। अस्पताल में एक ब्लड स्टोरेज यूनिट है। इसमें केवल गर्भवती महिलाओं के लिए खून की व्यवस्था की गई है। जिसमें प्रत्येक ग्रुप की एक या दो यूनिट खून की रखी रहती हैं।
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इस अस्पताल का उद्घाटन 20 अप्रैल 1973 तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने किया था। 46 वर्ष बीतने के बाद भी महेंद्रगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। जबकि हुड्डा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह इसी जिले से थे। उन्होंने भी महेंद्रगढ़ अस्पताल में ब्लड बैंक की शुरुआत नहीं करवाई। कई बार जब मरीजों को खून की आवश्यकता पड़ती है तो उनको नारनौल या रेवाड़ी से खून लाना पड़ता है जिसमें लगभग दो घंटे का समय लग जाता है तब तक मरीज की हालत और अधिक बिगड़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी तो सतनाली क्षेत्र के मरीजों को होती है उन्हें 50 से 60 किलोमीटर नारनौल जाकर खून लाना पड़ता है। क्षेत्र के लिए यह एक गंभीर समस्या है परंतु इस समस्या पर आज तक किसी नेता ने ध्यान नहीं दिया जिस कारण यहां के लोगों को अस्पताल से विश्वास उठ गया है।
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प्रति वर्ष करते हैं 500 यूनिट ब्लड डोनेट
क्षेत्र के युवा बहुत ही जागरूक हैं। क्षेत्र में प्रति वर्ष सामाजिक संस्थाओं द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविर में क्षेत्र डोनर रक्तदान करने में पीछे नहीं रहते। प्रति वर्ष 500 से अधिक रक्तदाता रक्तदान करते हैं। लेकिन जब उनके मरीजों को खून की जरूरत पड़ती है तो नारनौल जाना पड़ता है।
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दो बार की जा चुकी है वेंटिलेटर की घोषणा
शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने अगस्त 2017 और 2018 में उप नागरिक अस्पताल में कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने एक्सरे मशीन का उद्घाटन किया था। मंत्री ने दोनों ही कार्यक्रमों में अल्ट्रसाउंड मशीन और दस वेंटिलेटर मशीन लगवाने की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि एक महीने में ये मशीने अस्पताल में लगवा दी जाएंगी। लगभग दो वर्ष का समय बीत चुका है परंतु अभी तक एक भी मशीन नहीं लग पाई है।
वर्जन
अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट है जिसमें 15 से 20 यूनिट ब्लड हमेशा रहता है। जरूरत पड़ने पर नारनौल से मंगवा लिया जाता है।
- जसवंत यादव, फार्माशिष्ट
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