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जल्द बहुरेंगे माधोगढ़ किले के दिन, जीर्णोद्धार का काम जारी
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फोटो संख्या:56- माधोगढ़ की पहाड़ी पर चल रहा रानी महल के जिर्णोद्दार का काम
- फोटो : Narnol
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गांव माधोगढ़ की पहड़ियों पर स्थित किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम तेजी से जारी है। मुख्य सड़क मार्ग से पहाड़ की चोटी पर बने किले तक सड़क बना दी गई है और किले पर जीर्णोद्धार का काम तेजी से जारी है। शनिवार को शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पर चल रहे काम का निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमें अपनी एतिहासिक धरोहरों को संवार कर रखना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को विरासत देखने का मौका मिल सके। उन्होंने बताया कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिले की एतिहासिक धरोहरों को मूलरूप देकर पर्यटन के तौर पर विकसित कर रही है ताकि राजस्थान की सीमा से सटे इन जिलों की एतिहासिक धरोहरों की पहचान को कायम रखा जा सके और ये धरोहरें पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन सके। रामबिलास शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर माधोगढ़ किले को पिंजौर के मुगल गार्डन की तर्ज पर किले को वास्तविक रूप में लाकर पर्यटन के रूप में देश के मानचित्र पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने किले पर चल रहे जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करते हुए कहा कि माधोगढ़ किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा कि माधोगढ़ किला पर्यटन के तौर पर पूर्ण रूप से विकसित होने पर दक्षिणी हरियाणा में विकास की रफ्तार बढ़ जाएगी साथ ही क्षेत्र के युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के असीम अवसर मिलेंगे।
गौरतलब है कि सतनाली-महेंद्रगढ़ सड़क मार्ग पर अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में पहाड़ के ऊपर राजा माधोसिंह का किला बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार इस किले का निर्माण राजा माधोसिंह ने करवाया था। वे जब कभी इस क्षेत्र में आते थे तो इस किले में ठहरते थे। यह क्षेत्र उनकी रियासत का हिस्सा हुआ करता था। किले में सुन्दर तरीके से रानी महल बनाया गया था और उसमें उनके स्नान के लिए बावड़ी बनाई गई थी जिसमें 52 कमरानुमी कोटड़िया अब भी बनी हुई हैं। यह बावड़ी पहाड़ों के बीच बनी है जिसमें बरसात का पानी इकठ्ठा होता था।
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गौरतलब है कि सतनाली-महेंद्रगढ़ सड़क मार्ग पर अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में पहाड़ के ऊपर राजा माधोसिंह का किला बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार इस किले का निर्माण राजा माधोसिंह ने करवाया था। वे जब कभी इस क्षेत्र में आते थे तो इस किले में ठहरते थे। यह क्षेत्र उनकी रियासत का हिस्सा हुआ करता था। किले में सुन्दर तरीके से रानी महल बनाया गया था और उसमें उनके स्नान के लिए बावड़ी बनाई गई थी जिसमें 52 कमरानुमी कोटड़िया अब भी बनी हुई हैं। यह बावड़ी पहाड़ों के बीच बनी है जिसमें बरसात का पानी इकठ्ठा होता था।
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