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Mahendragarh-Narnaul News: नागरा और पचेरी डिजाइन की जूतियों की अधिक मांग
Sat, 01 Nov 2025 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 01 Nov 2025 12:15 AM IST
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फोटो नंबर-01शहर की एक दुकान पर जूती देखते लोग। संवाद
नारनौल। शादी का सीजन शुरू होते ही फुटवियर की बिक्री बढ़ गई है। हर प्रकार के पारंपरिक और आधुनिक परिधानों के अनुरूप जूतियां बाजार में उपलब्ध हैं। खासतौर पर दूल्हों के लिए शेरवानी के साथ पहनी जाने वाली जूतियों की मांग सबसे अधिक बनी हुई है।
वर्तमान समय में ज्यादातर युवा शादी के अवसर पर कोट-सूट की बजाय शेरवानी पहनना पसंद कर रहे हैं, जिसके चलते जोधपुरी, जयपुरी, पंजाबी, लक्वी, नागरा और पचेरी डिजाइन की जूतियों की बिक्री में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है।
शहर के पुल बाजार में लगभग आठ से दस दुकानें केवल जूतियों की बिक्री कर रही हैं, जबकि पूरे शहर में करीब 15 से 20 दुकानों पर विभिन्न डिजाइन की जूतियां उपलब्ध हैं। विशेष बात यह है कि अब महिलाएं भी पारंपरिक जूतियों को काफी पसंद कर रही हैं। दुकानदारों के अनुसार, महिलाओं के लिए भी रंगीन और आकर्षक डिजाइन में जूतियां बाजार में खूब बिक रही हैं। जूती विक्रेताओं ने बताया कि विवाह सीजन में उनके कारोबार में काफी तेजी आई है। हर दुकान पर प्रतिदिन 35 से 50 जोड़ी जूतियां बिक रही हैं। शहर में दो-तीन ऐसे कारीगर भी हैं जो स्वयं जूती बनाते हैं और इसके लिए आवश्यक कच्चा माल दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ से मंगवाते हैं।
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उनका कहना है कि पारंपरिक हस्तनिर्मित जूतियों की मांग हर वर्ग के लोग बच्चों, महिलाओं और युवाओं के बीच बनी हुई है। शादियों के अवसर पर जूतियां न केवल पोशाक का हिस्सा बन रही हैं, बल्कि लोगों की शान और फैशन स्टाइल का प्रतीक भी बन चुकी हैं।
बाक्स
शादियों के सीजन में इन दिनों शेरवानी जूती की काफी मांग है। इसके अलावा भी लोग विभिन्न परिधानों पर जूती पहनना पसंद कर रहे है। महिलाओं और बच्चों में भी इनका क्रेज काफी बढ़ रहा है। शहर की सभी करीब 25 से 30 दुकानों पर इन दिनों अच्छा काम हो रहा है।-रवि कुमार, दुकानदार
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वर्तमान समय में ज्यादातर युवा शादी के अवसर पर कोट-सूट की बजाय शेरवानी पहनना पसंद कर रहे हैं, जिसके चलते जोधपुरी, जयपुरी, पंजाबी, लक्वी, नागरा और पचेरी डिजाइन की जूतियों की बिक्री में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है।
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शहर के पुल बाजार में लगभग आठ से दस दुकानें केवल जूतियों की बिक्री कर रही हैं, जबकि पूरे शहर में करीब 15 से 20 दुकानों पर विभिन्न डिजाइन की जूतियां उपलब्ध हैं। विशेष बात यह है कि अब महिलाएं भी पारंपरिक जूतियों को काफी पसंद कर रही हैं। दुकानदारों के अनुसार, महिलाओं के लिए भी रंगीन और आकर्षक डिजाइन में जूतियां बाजार में खूब बिक रही हैं। जूती विक्रेताओं ने बताया कि विवाह सीजन में उनके कारोबार में काफी तेजी आई है। हर दुकान पर प्रतिदिन 35 से 50 जोड़ी जूतियां बिक रही हैं। शहर में दो-तीन ऐसे कारीगर भी हैं जो स्वयं जूती बनाते हैं और इसके लिए आवश्यक कच्चा माल दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ से मंगवाते हैं।
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उनका कहना है कि पारंपरिक हस्तनिर्मित जूतियों की मांग हर वर्ग के लोग बच्चों, महिलाओं और युवाओं के बीच बनी हुई है। शादियों के अवसर पर जूतियां न केवल पोशाक का हिस्सा बन रही हैं, बल्कि लोगों की शान और फैशन स्टाइल का प्रतीक भी बन चुकी हैं।
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शादियों के सीजन में इन दिनों शेरवानी जूती की काफी मांग है। इसके अलावा भी लोग विभिन्न परिधानों पर जूती पहनना पसंद कर रहे है। महिलाओं और बच्चों में भी इनका क्रेज काफी बढ़ रहा है। शहर की सभी करीब 25 से 30 दुकानों पर इन दिनों अच्छा काम हो रहा है।-रवि कुमार, दुकानदार