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हड़प्पाकालीन इतिहास को जानने में मददगार होगी हकेवि की खोज- प्रो. टंकेश्वर कुमार
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तिगड़ाना पुरातत्त्व स्थल का भ्रमण करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार
- फोटो : Narnol
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग द्वारा तिगड़ाना स्थित पुरातत्व स्थल पर जारी खोजकार्य का वीरवार को कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार निरीक्षण किया। विभाग के प्रभारी डॉ. नरेंद्र परमार की देखरेख में जारी खोज कार्य के संबंध में कुलपति ने कहा कि इसके माध्यम से भारतीय पुरातन संस्कृति के अंतर्गत विकसित नगरीय व्यवस्था व उससे जुड़े तथ्यों को जानने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अभी तक इस शोधकार्य के माध्यम से ज्ञात हुआहै कि हड़प्पा काल में तांबेके औजार व आभूषण प्रयोग में लाए जाते थे, तिगड़ाना में हड़प्पा कालीन फियांस की औद्योगिक इकाई उपलब्ध थी।साथ ही इस शोध कार्य में यह भीज्ञात हुआ है कि भारत में यूरोपियन देशों से पूर्व उच्चस्तरीय तकनीक का विकास हुआथा।
तिगड़ाना पुरातत्व उत्खनन के निदेशक डॉ. नरेंद्रपरमार ने बताया कि यह शोध कार्यइस क्षेत्र में 5 हजार साल पुराने औद्योगिक व व्यापारिक पहलुओं को सामने ला रहा है। यहां के उत्खनन से धातु, अर्ध कीमती पत्थर, नगरयोजना की उच्च स्तरीय तकनीक के प्रमाण मिले हैं। इस कार्य के अगले चरण में प्राचीन भारत के तकनीकी पक्षों का अवसर मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि अभी तक इस शोधकार्य के माध्यम से ज्ञात हुआहै कि हड़प्पा काल में तांबेके औजार व आभूषण प्रयोग में लाए जाते थे, तिगड़ाना में हड़प्पा कालीन फियांस की औद्योगिक इकाई उपलब्ध थी।साथ ही इस शोध कार्य में यह भीज्ञात हुआ है कि भारत में यूरोपियन देशों से पूर्व उच्चस्तरीय तकनीक का विकास हुआथा।
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तिगड़ाना पुरातत्व उत्खनन के निदेशक डॉ. नरेंद्रपरमार ने बताया कि यह शोध कार्यइस क्षेत्र में 5 हजार साल पुराने औद्योगिक व व्यापारिक पहलुओं को सामने ला रहा है। यहां के उत्खनन से धातु, अर्ध कीमती पत्थर, नगरयोजना की उच्च स्तरीय तकनीक के प्रमाण मिले हैं। इस कार्य के अगले चरण में प्राचीन भारत के तकनीकी पक्षों का अवसर मिलेगा।
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