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आज से प्रारंभ होंगे माघ माह के गुप्त नवरात्र : राहुल भारद्वाज
Thu, 30 Jan 2025 12:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 30 Jan 2025 12:27 AM IST
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महेंद्रगढ़। हिंदू धर्म में नवरात्र पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि एक साल में दो बार नवरात्र आते हैं, लेकिन एक वर्ष में दो बार नहीं चार बार नवरात्र आता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र को तो सब जानते हैं। इसके अतिरिक्त भी विशेष कामनाओं की सिद्धि के लिए दो नवरात्र और होते हैं, माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र जिन्हें गुप्त नवरात्र बोला जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया की इस बार माघ माह के गुप्त नवरात्र का प्रारंभ 30 जनवरी को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगा। समापन छह फरवरी को होगा। इस बार नवरात्रों में चतुर्थी और पंचमी एक दिन होने के कारण नवरात्र आठ दिन के होंगे। उन्होंने बताया कि गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व होता है।
इन नवरात्र के नौ दिनों में दुर्गा माता के दस महाविद्याओं की साधना और आराधना की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बंगलापुरी, मातंगी और मां कमला देवी की साधना होती है तथा गुप्त नवरात्र की पूजा को गुप्त रखा जाता है। साधना जितनी गुप्त होगी उसका फल भी उतना ही फलदायी होगा। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्र के साधना काल में मां दुर्गा (शक्ति) का जप, तप, अनुष्ठान साधना पूर्ण विधि-विधान से गुप्त तरीके से करने पर जीवन में आ रही सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है।
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ये रहेगा कलश स्थापना का मुहूर्त
राहुल भारद्वाज ने बताया की नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापित किया जाता है। सुबह 7:15 बजे से सुबह 8:36 बजे तथा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से दोपहर एक बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया की इस बार माघ माह के गुप्त नवरात्र का प्रारंभ 30 जनवरी को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगा। समापन छह फरवरी को होगा। इस बार नवरात्रों में चतुर्थी और पंचमी एक दिन होने के कारण नवरात्र आठ दिन के होंगे। उन्होंने बताया कि गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व होता है।
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इन नवरात्र के नौ दिनों में दुर्गा माता के दस महाविद्याओं की साधना और आराधना की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बंगलापुरी, मातंगी और मां कमला देवी की साधना होती है तथा गुप्त नवरात्र की पूजा को गुप्त रखा जाता है। साधना जितनी गुप्त होगी उसका फल भी उतना ही फलदायी होगा। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्र के साधना काल में मां दुर्गा (शक्ति) का जप, तप, अनुष्ठान साधना पूर्ण विधि-विधान से गुप्त तरीके से करने पर जीवन में आ रही सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है।
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ये रहेगा कलश स्थापना का मुहूर्त
राहुल भारद्वाज ने बताया की नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापित किया जाता है। सुबह 7:15 बजे से सुबह 8:36 बजे तथा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से दोपहर एक बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।