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Mahendragarh-Narnaul News: दिवाली 31 को व 2 नवंबर को होगी गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
Sun, 27 Oct 2024 12:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 27 Oct 2024 12:13 AM IST
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फोटो नंबर-11आचार्य क्रांति निर्मल।
नारनौल। दिवाली हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है, जो पूरे उल्लास व श्रद्धा भावना के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि 14 वर्ष वनवास के बाद जब प्रभु राम अयोध्या पहुंचे थे, तो अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दिवाली पर दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है।
इस वर्ष दिवाली कब मनाई जानी चाहिए, इस शंका का समाधान करते हुए विद्वद् ब्राह्मण परिषद के प्रवक्ता आचार्य क्रांति निर्मल ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की निशीथ व्यापिनी अमावस्या तिथि को ही दिवाली पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर अपराह्न 3:52 बजे शुरू हो रही है, जिसका समापन 1 नवंबर शाम 6:17 पर हो रहा है। कार्तिक अमावस्या की पावन रात्रि में ही दीप जलाकर मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा आराधना होती है। ऐसी स्थिति में 1 नवंबर को निशीथ काल में अमावस्या न होने के कारण दिवाली 31 अक्तूबर को है।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त
पांच महापर्वों में पहला पर्व है, धन त्रयोदशी। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 29 अक्तूबर मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरी हाथ में अमृत-कलश लिए प्रकट हुए थे। वैद्य गण इस दिन धन्वंतरी जी का पूजन करते हैं और वर मांगते हैं कि उनकी औषधि व उपचार से रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो। इस दिन अमृत पात्र के प्रतीक रूप में नए बर्तन घर में लाकर धनतेरस मनाते हैं, वहीं सोने चांदी के नए सामान की खरीदारी भी की जाती है। इस दिन प्रदोष काल में दीपदान का विशेष महत्व रहेगा। इस दिन सोने चांदी के सिक्के व आभूषण, नए बर्तन, नए वाहन इत्यादि खरीदने का शुभ मुहूर्त प्रातः 9:23 से दोपहर 1:32 तक है। वहीं धनतेरस पूजन का शुभ समय शाम 7:19 से रात्रि 8:56 तक रहेगा है।
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नरक चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व 30 अक्तूबर को मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन अत्याचारी और दंभी नरकासुर का वध करके उसकी कैद से सोलह हजार कन्याओं को मुक्त करवाया था। इसे रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन पांच या सात दीये जलाने की परंपरा है। छोटी दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7:18 से रात्रि 10:32 तक है।
दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
इन पांच पर्वों के मध्य उल्लास और उत्साह से भरा महान पर्व दिवाली है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। आज ही के दिन भगवान श्रीराम लंका विजय कर, सीता, लक्ष्मण, हनुमान व अन्य साथियों के साथ आकाश मार्ग से अयोध्या पधारे थे। इसके अलावा जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद, स्वामी रामतीर्थ परमहंस तथा सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद जी के जीवन से भी यह दिन जुड़ा हैं। इस वर्ष दीपोत्सव 31 को प्रदोषकाल व निशीथकाल व्यापिनी अमावस्या में मनाया जाएगा। दीपावली महापर्व में प्रदोष व निशीथ काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
पूजन के शुभ मुहूर्त :
शुभ-
16:18 - 17:40
अमृत-17:40 - 19:18
वृष लग्न- 18:29 - 20:24
मिथुनार्ध लग्न- 20:25 -21:32
सिंह लग्न (मध्य रात्रि)- 01:05 - 03:20
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
यह पर्व भारत की कृषि-प्रधानता, पशुधन, उद्योग व व्यवसाय का प्रतीक है। इसी दिन श्री कृष्ण ने अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को छत्र की तरह धारण करके बृजवासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। यह गोवर्धन पर्व अन्नकूट के नाम से भी विख्यात है। यह पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा।
इसका शुभ मुहूर्त अमृत काल में 14:54 - 16:16 रहेगा तथा लाभ का 17:39 - 19:17 तक रहेगा
भैया दूज का शुभ मुहूर्त
इस पंचपर्व रूपी माला का पांचवां रत्न है- स्नेह, सौहार्द व भाई बहन के प्रेम का प्रतीक भैया-दूज। यह पर्व 3 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को यमराज अपने दिव्य स्वरूप में अपनी बहन यमुना से मिलने गए थे।
भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त
चर
08:02 - 09:24
लाभ
09:24 - 10:47
अमृत
10:47 - 12:09
शुभ
13:31 - 14:54
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इस वर्ष दिवाली कब मनाई जानी चाहिए, इस शंका का समाधान करते हुए विद्वद् ब्राह्मण परिषद के प्रवक्ता आचार्य क्रांति निर्मल ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की निशीथ व्यापिनी अमावस्या तिथि को ही दिवाली पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर अपराह्न 3:52 बजे शुरू हो रही है, जिसका समापन 1 नवंबर शाम 6:17 पर हो रहा है। कार्तिक अमावस्या की पावन रात्रि में ही दीप जलाकर मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा आराधना होती है। ऐसी स्थिति में 1 नवंबर को निशीथ काल में अमावस्या न होने के कारण दिवाली 31 अक्तूबर को है।
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धनतेरस का शुभ मुहूर्त
पांच महापर्वों में पहला पर्व है, धन त्रयोदशी। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 29 अक्तूबर मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरी हाथ में अमृत-कलश लिए प्रकट हुए थे। वैद्य गण इस दिन धन्वंतरी जी का पूजन करते हैं और वर मांगते हैं कि उनकी औषधि व उपचार से रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो। इस दिन अमृत पात्र के प्रतीक रूप में नए बर्तन घर में लाकर धनतेरस मनाते हैं, वहीं सोने चांदी के नए सामान की खरीदारी भी की जाती है। इस दिन प्रदोष काल में दीपदान का विशेष महत्व रहेगा। इस दिन सोने चांदी के सिक्के व आभूषण, नए बर्तन, नए वाहन इत्यादि खरीदने का शुभ मुहूर्त प्रातः 9:23 से दोपहर 1:32 तक है। वहीं धनतेरस पूजन का शुभ समय शाम 7:19 से रात्रि 8:56 तक रहेगा है।
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नरक चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व 30 अक्तूबर को मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन अत्याचारी और दंभी नरकासुर का वध करके उसकी कैद से सोलह हजार कन्याओं को मुक्त करवाया था। इसे रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन पांच या सात दीये जलाने की परंपरा है। छोटी दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7:18 से रात्रि 10:32 तक है।
दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
इन पांच पर्वों के मध्य उल्लास और उत्साह से भरा महान पर्व दिवाली है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। आज ही के दिन भगवान श्रीराम लंका विजय कर, सीता, लक्ष्मण, हनुमान व अन्य साथियों के साथ आकाश मार्ग से अयोध्या पधारे थे। इसके अलावा जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद, स्वामी रामतीर्थ परमहंस तथा सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद जी के जीवन से भी यह दिन जुड़ा हैं। इस वर्ष दीपोत्सव 31 को प्रदोषकाल व निशीथकाल व्यापिनी अमावस्या में मनाया जाएगा। दीपावली महापर्व में प्रदोष व निशीथ काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
पूजन के शुभ मुहूर्त :
शुभ-
16:18 - 17:40
अमृत-17:40 - 19:18
वृष लग्न- 18:29 - 20:24
मिथुनार्ध लग्न- 20:25 -21:32
सिंह लग्न (मध्य रात्रि)- 01:05 - 03:20
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
यह पर्व भारत की कृषि-प्रधानता, पशुधन, उद्योग व व्यवसाय का प्रतीक है। इसी दिन श्री कृष्ण ने अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को छत्र की तरह धारण करके बृजवासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। यह गोवर्धन पर्व अन्नकूट के नाम से भी विख्यात है। यह पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा।
इसका शुभ मुहूर्त अमृत काल में 14:54 - 16:16 रहेगा तथा लाभ का 17:39 - 19:17 तक रहेगा
भैया दूज का शुभ मुहूर्त
इस पंचपर्व रूपी माला का पांचवां रत्न है- स्नेह, सौहार्द व भाई बहन के प्रेम का प्रतीक भैया-दूज। यह पर्व 3 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को यमराज अपने दिव्य स्वरूप में अपनी बहन यमुना से मिलने गए थे।
भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त
चर
08:02 - 09:24
लाभ
09:24 - 10:47
अमृत
10:47 - 12:09
शुभ
13:31 - 14:54