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भ्रूण लिंग जांच मामले में चार लोग गिरफ्तार
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लिंग जांच में इस्तेमाल की गई मोबाइल अल्ट्रासाउंड मशीन। संवाद
- फोटो : Narnol
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जिला समुचित प्राधिकरण नारनौल की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारकर लिंग जांच मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
जिला समुचित प्राधिकरण नारनौल की टीम को सूचना मिली थी कि नारनौल व आस-पास के क्षेत्र में भ्रूण लिंग जांच करने का गिरोह सक्रिय है। जो मोबाइल मशीन द्वारा भ्रूण लिंग जांच करता है।
इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए जिला समुचित प्राधिकरण नारनौल द्वारा पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. हर्ष चौहान के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। टीम द्वारा एक डिकॉय मरीज बनाया गया व मदद के लिए स्थानीय पुलिस से संपर्क किया गया। टीम द्वारा सूचना के आधार पर गिरोह के सदस्यों से संपर्क किया गया। जिन्होंने 35 हजार रुपये भ्रूण लिंग जांच के लिए मांगे व मरीज को 16 दिसंबर को सुबह 4:30 बजे महावीर चौक नारनौल बुलाया। गिरोह के सदस्यों ने राजस्थान नंबर की एक कार में डिकॉय मरीज को बैठाकर कुछ समय बाद वापस छोड़ने की बात कही। टीम द्वारा छुपकर गाड़ी का पीछा किया गया। गाड़ी गांव रामबास पहुंची और वहां से एक और व्यक्ति को साथ में लिया। उसके बाद गाड़ी राजस्थान की तरफ चली गई। टीम की नजरों से ओझल हो गई। लगभग 2 घंटे बाद जब गाड़ी डिकॉय मरीज को वापस छोड़ने आई तो पीएनडीटी टीम व पुलिस ने गाड़ी में मौजूद 4 व्यक्तियों को पकड़ लिया और मौके पर गाड़ी से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन व 35 हजार रुपये भी बरामद कर लिए गए।
जांच में बताया लड़का
डिकॉय मरीज ने टीम को बताया कि उसकी भ्रूण लिंग जांच अवधेश पांडे नामक व्यक्ति ने की और उसके गर्भ में लड़का होना बताया है। टीम को उनके मोबाइल से काफी सबूत मिले हैं। जिनसे पता लगा है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय है। इस गिरोह में अवधेश पांडे निवासी खेतड़ी राजस्थान, राकेश निवासी गुवाना राजस्थान, राकेश कुमार निवासी गुवाना राजस्थान व मनोज निवासी गांव रामबास हरियाणा शामिल थे। पकड़े गए अवधेश पांडे को वर्ष 2016-17 में पीएनडीटी टीम महेंद्रगढ़ द्वारा पकड़ा गया था। जिसमें कनीना कोर्ट द्वारा भ्रूण लिंग जांच मामले में अवधेश पांडे को सजा भी हुई थी। राजस्थान में भी अवधेश पांडे पर भ्रूण लिंग जांच पर कई मुकदमे लंबित हैं।
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जिला समुचित प्राधिकरण नारनौल की टीम को सूचना मिली थी कि नारनौल व आस-पास के क्षेत्र में भ्रूण लिंग जांच करने का गिरोह सक्रिय है। जो मोबाइल मशीन द्वारा भ्रूण लिंग जांच करता है।
इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए जिला समुचित प्राधिकरण नारनौल द्वारा पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. हर्ष चौहान के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। टीम द्वारा एक डिकॉय मरीज बनाया गया व मदद के लिए स्थानीय पुलिस से संपर्क किया गया। टीम द्वारा सूचना के आधार पर गिरोह के सदस्यों से संपर्क किया गया। जिन्होंने 35 हजार रुपये भ्रूण लिंग जांच के लिए मांगे व मरीज को 16 दिसंबर को सुबह 4:30 बजे महावीर चौक नारनौल बुलाया। गिरोह के सदस्यों ने राजस्थान नंबर की एक कार में डिकॉय मरीज को बैठाकर कुछ समय बाद वापस छोड़ने की बात कही। टीम द्वारा छुपकर गाड़ी का पीछा किया गया। गाड़ी गांव रामबास पहुंची और वहां से एक और व्यक्ति को साथ में लिया। उसके बाद गाड़ी राजस्थान की तरफ चली गई। टीम की नजरों से ओझल हो गई। लगभग 2 घंटे बाद जब गाड़ी डिकॉय मरीज को वापस छोड़ने आई तो पीएनडीटी टीम व पुलिस ने गाड़ी में मौजूद 4 व्यक्तियों को पकड़ लिया और मौके पर गाड़ी से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन व 35 हजार रुपये भी बरामद कर लिए गए।
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जांच में बताया लड़का
डिकॉय मरीज ने टीम को बताया कि उसकी भ्रूण लिंग जांच अवधेश पांडे नामक व्यक्ति ने की और उसके गर्भ में लड़का होना बताया है। टीम को उनके मोबाइल से काफी सबूत मिले हैं। जिनसे पता लगा है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय है। इस गिरोह में अवधेश पांडे निवासी खेतड़ी राजस्थान, राकेश निवासी गुवाना राजस्थान, राकेश कुमार निवासी गुवाना राजस्थान व मनोज निवासी गांव रामबास हरियाणा शामिल थे। पकड़े गए अवधेश पांडे को वर्ष 2016-17 में पीएनडीटी टीम महेंद्रगढ़ द्वारा पकड़ा गया था। जिसमें कनीना कोर्ट द्वारा भ्रूण लिंग जांच मामले में अवधेश पांडे को सजा भी हुई थी। राजस्थान में भी अवधेश पांडे पर भ्रूण लिंग जांच पर कई मुकदमे लंबित हैं।
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