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किसान पाले से सरसों की फसल का करें बचाव: डॉ. संदीप यादव
Thu, 04 Jan 2024 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 04 Jan 2024 11:30 PM IST
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कनीना। पाला पड़ते समय फसलों को भारी नुकसान तथा पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। खंड कृषि अधिकारी डाॅ. संदीप यादव ने कहा कि पाले से सरसों, गेहूं, चना, मैथी आदि को काफी हानि पहुंच सकती है। पाला पड़ने का उचित अनुमान लगाकर इसके घातक प्रभाव से पौधों व फसलों का आसानी से बचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मौसम विभाग द्वारा आग में तीन से चार दिन में तापमान में गिरावट होने की संभावना को मध्य नजर रखते हुए फसलों में पाले से नुकसान होने की आशंका है। पाले से सरसों, मटर, चना अन्य सब्जियों की फसलों में भी नुकसान होने की संभावना है। दोपहर यह ठंडी हवाएं चलने बंद हो जाए तथा आसमान साफ हो तो पाला पड़ने की प्रबल संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इससे बचाव के लिए फसलों, बाग तथा सब्जियों में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। पानी देने से भूमि व फसलों का तापमान बढ़ जाता है तथा पाले व ठंड के असर को इस तरीके से कम किया जा सकता है। रात में धुआं करना चाहिए। सरसों, मटर, आलू, टमाटर तथा पत्तेदार सब्जियों को पाले से बचाने के लिए देर रात खेत के उत्तर पश्चिम दिशा में घास फुस जलाकर धुआं कर देना चाहिए। धुएं की परत छा जाने से पाले को पौधे पर गिरने से रोकती है। खेत व पौधों का तापमान भी कम नहीं हो पाता। जिससे उनका पाले से बचाव हो जाता है। पौधों की पत्तियां, फलियां कोमल तने तथा दानों की कोशिका झिल्ली फटने से वह झुलस कर सूखने लगती हैं। इससे पैदावार में भारी कमी आ जाती है।
वर्जन
किसान अपने खेतों में निगरानी रखते हैं उसे समय उनको सफेद रतवा के लक्षण नजर आते हैं तो 600 से 800 ग्राम में मेकोजेब को 250 से 300 ग्राम लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ कि दर से 15 दिन के अंतर पर दो-तीन बार का छिड़काव करें। इसके साथ उन्होंने बताया कि विभाग की स्कीम प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि योजना के लाभार्थी सभी किसान अपनी ई केवाईसी समय पर रहते करवा लेना चाहिए। जिससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्त बाकी ना रह जाए।
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-डॉ. संदीप यादव, खंड कृषि अधिकारी, कनीना।
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उन्होंने बताया कि मौसम विभाग द्वारा आग में तीन से चार दिन में तापमान में गिरावट होने की संभावना को मध्य नजर रखते हुए फसलों में पाले से नुकसान होने की आशंका है। पाले से सरसों, मटर, चना अन्य सब्जियों की फसलों में भी नुकसान होने की संभावना है। दोपहर यह ठंडी हवाएं चलने बंद हो जाए तथा आसमान साफ हो तो पाला पड़ने की प्रबल संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इससे बचाव के लिए फसलों, बाग तथा सब्जियों में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। पानी देने से भूमि व फसलों का तापमान बढ़ जाता है तथा पाले व ठंड के असर को इस तरीके से कम किया जा सकता है। रात में धुआं करना चाहिए। सरसों, मटर, आलू, टमाटर तथा पत्तेदार सब्जियों को पाले से बचाने के लिए देर रात खेत के उत्तर पश्चिम दिशा में घास फुस जलाकर धुआं कर देना चाहिए। धुएं की परत छा जाने से पाले को पौधे पर गिरने से रोकती है। खेत व पौधों का तापमान भी कम नहीं हो पाता। जिससे उनका पाले से बचाव हो जाता है। पौधों की पत्तियां, फलियां कोमल तने तथा दानों की कोशिका झिल्ली फटने से वह झुलस कर सूखने लगती हैं। इससे पैदावार में भारी कमी आ जाती है।
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किसान अपने खेतों में निगरानी रखते हैं उसे समय उनको सफेद रतवा के लक्षण नजर आते हैं तो 600 से 800 ग्राम में मेकोजेब को 250 से 300 ग्राम लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ कि दर से 15 दिन के अंतर पर दो-तीन बार का छिड़काव करें। इसके साथ उन्होंने बताया कि विभाग की स्कीम प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि योजना के लाभार्थी सभी किसान अपनी ई केवाईसी समय पर रहते करवा लेना चाहिए। जिससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्त बाकी ना रह जाए।
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-डॉ. संदीप यादव, खंड कृषि अधिकारी, कनीना।