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Mahendragarh-Narnaul News: समाज के अधिकारों से छेड़छाड़ करने पर जताया रोष
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फोटो 14नारनौल सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति के सदस्य समिति कार्यालय में बैठक करते।स्रोत प्र
नारनौल। सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति के तत्वावधान में कार्यालय में समिति के प्रधान चंदन सिंह जलवान की अध्यक्षता में बैठक हुई।
इसमें वंचित एवं हासिया पर रखे समाज के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ करने पर संगठनों ने रोष व्यक्त किया। साथ ही सामूहिक हस्ताक्षर युक्त पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को लिखकर मांग की है कि भारतीय संविधान के साथ कोई भी छेड़छाड़ न करने, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिका को खारिज करने व आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
बैठक का संचालन समिति के महासचिव और कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल ने किया। समिति के प्रधान चंदन सिंह जलवान ने कहा कि आरक्षण में आर्थिक आधार, क्रीमीलेयर, अनुसूचित जाति का वर्गीकरण आदि आधारहीन बातों को समाज में विभाजन और वैमनस्य को पैदा करने के लिए लाया जाता है।
परिवर्तनकारी साहित्य मंच के अध्यक्ष एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. शिवताज सिंह ने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान सामाजिक विषमता समाप्त करने के लिए उपेक्षित तबकों को अनिवार्य पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए किया गया था। महासचिव गोठवाल ने कहा कि क्या सचमुच भारत में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न खत्म हो गया है। पूर्व डीजीएम महेंद्र खन्ना व पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक प्यारेलाल चवन ने कहा कि यह समाज के उपेक्षित तबकों को वहीं का वहीं रखने वाला एक घातक मनोविज्ञान है।
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इसमें वंचित एवं हासिया पर रखे समाज के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ करने पर संगठनों ने रोष व्यक्त किया। साथ ही सामूहिक हस्ताक्षर युक्त पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को लिखकर मांग की है कि भारतीय संविधान के साथ कोई भी छेड़छाड़ न करने, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिका को खारिज करने व आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
बैठक का संचालन समिति के महासचिव और कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल ने किया। समिति के प्रधान चंदन सिंह जलवान ने कहा कि आरक्षण में आर्थिक आधार, क्रीमीलेयर, अनुसूचित जाति का वर्गीकरण आदि आधारहीन बातों को समाज में विभाजन और वैमनस्य को पैदा करने के लिए लाया जाता है।
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परिवर्तनकारी साहित्य मंच के अध्यक्ष एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. शिवताज सिंह ने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान सामाजिक विषमता समाप्त करने के लिए उपेक्षित तबकों को अनिवार्य पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए किया गया था। महासचिव गोठवाल ने कहा कि क्या सचमुच भारत में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न खत्म हो गया है। पूर्व डीजीएम महेंद्र खन्ना व पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक प्यारेलाल चवन ने कहा कि यह समाज के उपेक्षित तबकों को वहीं का वहीं रखने वाला एक घातक मनोविज्ञान है।
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