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Mahendragarh-Narnaul News: अभिसरण से होने वाले लाभ बताए
Thu, 06 Feb 2025 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 06 Feb 2025 11:55 PM IST
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फोटो नंबर-24पीजी कॉलेज में कार्यक्रम के दौरान मंचासीन अतिथिगण। स्रोत-संस्थान
- फोटो : वैश्य महाविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय शुगर जांच शिविर में मौजूद प्राचार्य डॉ. संजय गोयल, विद्यार्थी व अन्य।
नारनौल। राजकीय महाविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग ने जैविक व रासायनिक विज्ञान का अभिसरण नवाचार और चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें देशभर से 153 प्रतिभागियों ने भाग लिया। अपने शोध व विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चरखी दादरी के जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने जैविक और रासायनिक विज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों के अभिसरण से होने वाले लाभ पर चर्चा की।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय के जैव रसायन प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार मौर्य ने बुढ़ापे के कारणों और इस प्रक्रिया को धीमा करने में जैविक एवं रासायनिक विज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के वैज्ञानिक लाभों की भी व्याख्या की।
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प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा ने जैविक और रासायनिक विज्ञान के दैनिक जीवन में महत्व को समझाया। उन्होंने इस संगोष्ठी को ज्ञान-विज्ञान के समन्वय का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। विशेषज्ञ वक्ताओं में जैव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग यूनिवर्सिटी ऑफ टेरामो, इटली से मनीष कुमार ने कीटनाशकों के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव की चर्चा की। वहीं, रैफल्स यूनिवर्सिटी नीमराना से डॉ. संतोष जोशी ने लाइकेन (कवक-शैवाल सहजीव) को जैव निगरानी उपकरण के रूप में उसके उपयोग पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चरखी दादरी के जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने जैविक और रासायनिक विज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों के अभिसरण से होने वाले लाभ पर चर्चा की।
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संगोष्ठी के मुख्य वक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय के जैव रसायन प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार मौर्य ने बुढ़ापे के कारणों और इस प्रक्रिया को धीमा करने में जैविक एवं रासायनिक विज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के वैज्ञानिक लाभों की भी व्याख्या की।
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प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा ने जैविक और रासायनिक विज्ञान के दैनिक जीवन में महत्व को समझाया। उन्होंने इस संगोष्ठी को ज्ञान-विज्ञान के समन्वय का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। विशेषज्ञ वक्ताओं में जैव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग यूनिवर्सिटी ऑफ टेरामो, इटली से मनीष कुमार ने कीटनाशकों के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव की चर्चा की। वहीं, रैफल्स यूनिवर्सिटी नीमराना से डॉ. संतोष जोशी ने लाइकेन (कवक-शैवाल सहजीव) को जैव निगरानी उपकरण के रूप में उसके उपयोग पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।