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Mahendragarh-Narnaul News: स्टार प्रचारक भी प्रत्याशियों को नहीं दिला सके जीत

Thu, 10 Oct 2024 02:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 10 Oct 2024 02:21 AM IST
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Even star campaigners could not make the candidates win
नारनौल। जिले की चारों विधानसभा क्षेत्र में इस बार स्टार प्रचारकों की भरमार रही, लेकिन यहां की जनता ने स्टार प्रचारकों की बजाय स्थानीय मुद्दों व चेहरों पर भरोसा जताया। इसकी वजह से चारों विधानसभा क्षेत्र में भारी उलट फेर देखने को मिला। जिस प्रत्याशी की पहले राउंड से अंतिम तीन चार राउंड को छोड़कर जीत लग रही थी, उन्हें अंतिम के राउंड में हार का मुंह देखना पड़ा।
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नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र में गृह मंत्री अमित शाह, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कमान संभाली थी। वहीं अटेली में योगी आदित्यनाथ व बसपा से आकाश आनंद ने जनसभा की। नारनौल में कार्यवाहक सीएम नायब सैनी और कांग्रेस के प्रचार के लिए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रैली को संबोधित किया था, लेकिन यहां नायब सैनी का ज्यादा प्रभाव देखने को मिला। दोनों ही नेता सैनी समाज से संबंध रखते हैं। महेंद्रगढ़ में राहुल गांधी पहुंचे थे, लेकिन यहां भी कांग्रेस मात खा गई।
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नारनौल विधानसभा क्षेत्र

ओमप्रकाश यादव के जीत के कारण
नारनौल विधानसभा क्षेत्र से ओमप्रकाश यादव तीसरी बार चुनाव लड़ रहे थे, इससे पहले वह दो बार विधायक रह चुके हैं। ओमप्रकाश यादव का मिलनसार व्यवहार व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की क्षेत्र में अच्छी पकड़ होना जीत की राह आसान कर गई। ओमप्रकाश यादव मनोहर लाल के कार्यकाल में सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री रह चुके हैं।
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कांग्रेस प्रत्याशी राव नरेंद्र की हार के कारण

राव नरेंद्र सिंह बीते दो-तीन साल से अटेली में प्रचार-प्रसार में जुटे हुए थे। वह नारनौल की बजाय अटेली से टिकट मांग रहे थे। नारनौल की टिकट मिलने के बाद यहां सक्रिय हुए, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र:

कांग्रेस प्रत्याशी मंजू चौधरी के जीत के कारण

मंजू चौधरी के ससुर फूसाराम व पति मूलाराम विधायक रह चुके हैं। नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र में करीब 31 हजार गुर्जर मतदाता है। उनकी गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ है। इसके अलावा यादव बाहुल्य गांवों से भी अच्छे वोट हासिल करने में कामयाब रही, वहीं जाट समाज का भी साथ मिला। मंजू चौधरी 2014 में भी भाजपा प्रत्याशी से करीब 900 वोटों से हारी थी।

भाजपा प्रत्याशी डॉ. अभय सिंह यादव के हार का कारण

डॉ. अभय सिंह यादव दो बार से नांगल चौधरी से विधायक थे। इस बार वह तीसरी बार चुनाव लड़ रहे थे। क्षेत्र के दोहान पच्चीसी के अनेक गांवों में नहरी पानी अभी भी नहीं पहुंचा था, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों में नाराजगी थी।

अटेली विधानसभा क्षेत्र
भाजपा प्रत्याशी आरती राव ने पहली बार में की जीत दर्ज

अटेली विधानसभा क्षेत्र से इस बार आरती राव चुनाव लड़ रही थी। आरती राव केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी है। उनके प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी आए थे। वहीं अटेली क्षेत्र में यादव मतदाता ज्यादा है, जिसका भी फायदा मिला है।



अतरलाल के हार के कारण

बसपा व इनेलो प्रत्याशी अतरलाल नजदीकी मुकाबले से हारे हैं। अतर लाल की हार में जातीय समीकरणों ने अहम भूमिका निभाई है। अटेली में सबसे यादव मतदाता है, जिसकी वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। वहीं राजपूत समाज के कम मतदाता हैं।
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