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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Durga temple was built during Maratha period, Ashtadhatu idol was brought from Nagarkot, Himachal and installed.

Mahendragarh-Narnaul News: मराठा काल में बना था दुर्गा मंदिर, हिमाचल के नगरकोट से लाकर स्थापित की थी अष्टधातु की मूर्ति

Sat, 05 Oct 2024 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 05 Oct 2024 01:09 AM IST
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Durga temple was built during Maratha period, Ashtadhatu idol was brought from Nagarkot, Himachal and installed.
फोटो संख्या:58- प्राचीन माता  दुर्गा मंदिर में तैयारियां करता पुजारी सीताराम--संवाद
महेंद्रगढ़। शहर के बीचों बीच में स्थित प्राचीन मां दुर्गा मंदिर में लगने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ मां दुर्गा में अटूट विश्वास को दर्शाती है। मंदिर में स्थापित अष्ट धातु की प्राचीन मूर्तियां यहां आने वाले हर श्रद्धालु को नतमस्तक कर देती है।
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मंदिर पुजारी सीताराम ने बताया कि मां दुर्गा के इस प्राचीन मंदिर में आकर आराधना करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। मां दुर्गा का यह प्राचीन मंदिर मराठों के काल का बना हुआ है। पीढ़ी दर पीढ़ी पुजारी परंपरा को निभाने के क्रम में वर्तमान में छठी पीढ़ी में यहां पर पुजारी सीताराम 54 वर्षों से पूजा कर रहे हैं। इस मंदिर में पूर्व में पुजारी ताराचंद व उनके गुरु की दो समाधि भी बनाई गई हैं। समय-समय पर यहां रामायण पाठ, सत्संग व भंडारे का आयोजन किया जाता है व वर्ष में आने वाले दोनों नवरात्र पर मेले लगते हैं।
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यह है मंदिर का भव्य रूप
मां दुर्गा के इस प्राचीन मंदिर के मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर सामने मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान प्रतिमा, शिवालय, हनुमान मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, संतोषी मंदिर व हनुमान मंदिर हैं। हरियाली से आच्छादित इस मंदिर परिसर में 48 वर्षों से लगे त्रिवेणी के प्राचीन होने की ओर संकेत करते हैं। मां दुर्गा के इस मंदिर में नगरकोट से लाकर स्थापित की गई अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां हर श्रद्धालु को नतमस्तक कर देती हैं। वीरवार से शुरू हो रही शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिर में सजावट की कर दी गई है।
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यह है दुर्गा मंदिर का प्राचीन इतिहास

शहर में सब्जी मंडी में स्थित प्राचीन मां दुर्गा मंदिर 600 वर्ष पूर्व मराठा शासनकाल में तात्या टोपे ने माता की मूर्ति की स्थापना की थी। उस समय राजाओं की कुलदेवी होती थी। राजा प्रतिदिन मंदिर पूजा करते थे। राजा ने हिमाचल के नगरकोट से लाकर अष्ट धातु की बनी मूर्ति से दुर्गा मां को विराजमान किया गया है। माता को शक्ति पीठ कांगड़ा का स्वरूप कहा जाता है व भैरव का प्राचीन रूप भी यहां विराजमान है। उसके बाद राजाओं ने माता मंदिर के समीप शिवालय बनाया गया। मंदिर पुजारी सीताराम ने बताया कि 1970 में मंदिर में पुजारी बने थे। तब यहां झाड़ियां उगी हुई थीं न ही मंदिर के चहारदीवारी थी। मंदिर में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के साथ मिलकर मंदिर के चारों तरफ सफाई की गई। 900 गज में फैला हुआ यह मंदिर अपने आप में इतिहास समेटे है। प्रतिदिन दिल्ली, राजस्थान से काफी संख्या में श्रद्धालु आते है उनकी मनोकामना पुरी होने पर हवन पूजन दान व माता के भंडारे लगाते है। मित्र मंडल सेवा मंडल की ओर से दुर्गा मंदिर के बाहर गेट पर हनुमान मंदिर बनवाया, 1997 में हनुमान मंदिर, 2005 में संंतोष, 2012 में राधा-कृष्ण मंदिर बनाया गया।
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