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शोषण को छिपाएं नहीं, डटकर उसका सामना करें छात्राएं : डॉ पूर्ण प्रभा
Fri, 11 Oct 2024 12:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 11 Oct 2024 12:43 AM IST
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फोटो नंबर-08पीजी कॉलेज में आयोजित सेमिनार को संबोधित करती सरिता शर्मा। स्त्रोत-संस्थान
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नारनौल। राजकीय महाविद्यालय नारनौल में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य पर छात्राओं को यौन शोषण कानून व पॉक्सो विषय पर जानकारी दी।
प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा ने कहा कि छात्राओं के लिए कानून की जानकारी होना बहुत जरूरी है। छात्राएं किसी भी शोषण को छुपाएं नहीं बल्कि उसका डट कर मुकाबला करें। मुख्य वक्ता पीपीओ सरिता शर्मा, सीपीओ सुषमा, वन स्टॉप सेंटर प्रभारी वंदना यादव रही। वन स्टॉप सेंटर प्रभारी वंदना यादव ने बताया कि भारत में वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शोषण के मामलों के लिए एक समग्र सहायता केंद्र है, जहां एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध होती हैं।
पुलिस प्रशासन से पीपीओ सरिता शर्मा ने बताया कि पॉक्सो अधिनियम 2012 भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह अधिनियम यौन शोषण, बलात्कार और अन्य यौन अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। यूथ रेडक्रॉस अधिकारी डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति किसी नाबालिग बच्चे का यौन शोषण करता है तो उस व्यक्ति पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
कार्यक्रम संयोजक डाॅ. पलक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्तूबर को मनाया जाता है। इस दौरान डॉ. सत्यपाल सुलोदिया, महिला प्रकोष्ठ सदस्य डॉ. मुकेश कुमारी यादव, डॉ. गीता, डॉ. संजीता, डॉ. कीर्ति, डॉ. मनप्रीत, डॉ. सोमलता, डॉ. कविता मौजूद रहीं।
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प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा ने कहा कि छात्राओं के लिए कानून की जानकारी होना बहुत जरूरी है। छात्राएं किसी भी शोषण को छुपाएं नहीं बल्कि उसका डट कर मुकाबला करें। मुख्य वक्ता पीपीओ सरिता शर्मा, सीपीओ सुषमा, वन स्टॉप सेंटर प्रभारी वंदना यादव रही। वन स्टॉप सेंटर प्रभारी वंदना यादव ने बताया कि भारत में वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शोषण के मामलों के लिए एक समग्र सहायता केंद्र है, जहां एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध होती हैं।
पुलिस प्रशासन से पीपीओ सरिता शर्मा ने बताया कि पॉक्सो अधिनियम 2012 भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह अधिनियम यौन शोषण, बलात्कार और अन्य यौन अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। यूथ रेडक्रॉस अधिकारी डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति किसी नाबालिग बच्चे का यौन शोषण करता है तो उस व्यक्ति पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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कार्यक्रम संयोजक डाॅ. पलक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्तूबर को मनाया जाता है। इस दौरान डॉ. सत्यपाल सुलोदिया, महिला प्रकोष्ठ सदस्य डॉ. मुकेश कुमारी यादव, डॉ. गीता, डॉ. संजीता, डॉ. कीर्ति, डॉ. मनप्रीत, डॉ. सोमलता, डॉ. कविता मौजूद रहीं।
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