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Mahendragarh-Narnaul News: आबादी के बीचोंबीच भवन जर्जर, हादसे का खतरा
Wed, 13 Mar 2024 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 13 Mar 2024 12:44 AM IST
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महेंद्रगढ़। शहर की घनी आबादी के बीच 20 से अधिक भवन जर्जर हालत में हैं। नगरपालिका की ओर से एक वर्ष पूर्व इन्हें खंडहर घोषित कर तोड़ने के लिए नोटिस चस्पा किए थे।
इसके बाद दो लोगों ने मकानों के खंडहरों को गिरा दिया था, लेकिन अभी भी शहर के बीचोबीच करीब 200 से 300 वर्ष पूर्व बने मकान हैं। इन भवनों की दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी है कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है। शहर कि विभिन्न मोहल्लों में बीच आबादी के करीब 50 भवन ऐसे हैं जो कभी भी गिर सकते है। वहीं नगरपालिका भी एक वर्ष पूर्व नोटिस चस्पा कर इनकी सुध लेना ही भूल गई।
अनेक भवनों के मालिक तो शहर छोड़कर अन्य शहरों में भी लंबे समय से बसे हुए हैं, जिनका नगरपालिका के पास भी कोई रिकॉर्ड नहीं है। समय-समय पर प्रदेश सरकार नगरपालिका, नगर परिषद् एवं नगर निगमों को खंडहर पड़े भवनों का सर्वे करने और ज्यादा ही जर्जर हो चुकी कुछ इमारतों पर कार्रवाई करने के आदेश भी जारी करती है, लेकिन समय बीतने के साथ आदेश कागजों तक ही सिमटकर रह जाते हैं।
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यहां सबसे अधिक हादसे की आशंका
शहर के 15 वार्डो में लगभग 20 से अधिक जर्जर भवन व पुरानी हवेलियां हैं। शहर के प्रत्येक वार्ड में तीन से चार जर्जर भवन है। मोहल्ला जवाहरनगर, करेलिया बाजार, मोहल्ला निमड़ी नीचे, मोहल्ला बिढ़ाट, जेपी स्कूल के पास, परशुराम चौक, पुराना बीईओ कार्यालय, दर्जियान गली सहित अन्य मोहल्लों में जर्जर भवन है।
सरकारी कार्यालयों के भवन भी जर्जर
शहर के कॉलेज रोड स्थित पुराने खंड अधिकारी कार्यालय का भवन तो इतना जर्जर हो चुका है कि कुछ महीने पूर्व उसका छज्जा टूटकर गिरने से एक टैंट हाउस संचालन बच गया था। इसके अलावा पुराना तहसीलदार आवास, पुराना एक्सईन कार्यालय सहित अनेक भवन जर्जर हो चुके है।
-नरेश शर्मा
रखरखाव के अभाव में बदहाल हुए भवन
पहले जो हवेलियां बनती थीं वह आज के आधुनिक भवनों से अच्छी होती थी। अगर इनका रख रखाव ठीक से होता रहे तो आज भी शहर की कई हवेलियां रहने लायक हैं। इन भवनों के निर्माण में ऐसी का इस्तेमाल किया गया है कि गर्मियों में ठंडी और सर्दियों में गर्म रहती है।
-महेश सैनी
हो सकता है जान-माल का नुकसान
शहर में बहुत से ऐसे भवन हैं जो खंडहर हो चुके हैं। इन खंडहर भवनों से कभी भी जान-माल का नुकसान हो सकता है। नगरपालिका को इनके मालिकों को नोटिस जारी करना चाहिए ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।
-लक्ष्मीकांत
रख रखाव कर हो सकता है सदुपयोग
शहर में बहुत सुंदर-सुंदर हवेलियां है जो बंद पड़ी है सही रखरखाव कर इन प्राचीन भवनों का सदुपयोग किया जा सकता है। जो भवन एकदम जर्जर हो चुके है उनको गिरा देना चाहिए जिससे हादसे न हो सके।
-- - मनीष राजपूत
जल्द ही नपा की ओर से शहर में सर्वे करा जर्जर भवनों की स्थिति का पता लगाया जाएगा। इसके जिन भवनों से हादसों की आशंका है उनके मालिकों को नोटिस जारी कर इन्हें तुड़ाने के आदेश जारी किए जाएंगे। प्रथम चरण में जो भी खंडहर हैं तथा घनी आबादी के बीच हैं उनपर संज्ञान लिया जाएगा।
-रमेश सैनी, नगरपालिका प्रधान, महेंद्रगढ़
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इसके बाद दो लोगों ने मकानों के खंडहरों को गिरा दिया था, लेकिन अभी भी शहर के बीचोबीच करीब 200 से 300 वर्ष पूर्व बने मकान हैं। इन भवनों की दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी है कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है। शहर कि विभिन्न मोहल्लों में बीच आबादी के करीब 50 भवन ऐसे हैं जो कभी भी गिर सकते है। वहीं नगरपालिका भी एक वर्ष पूर्व नोटिस चस्पा कर इनकी सुध लेना ही भूल गई।
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अनेक भवनों के मालिक तो शहर छोड़कर अन्य शहरों में भी लंबे समय से बसे हुए हैं, जिनका नगरपालिका के पास भी कोई रिकॉर्ड नहीं है। समय-समय पर प्रदेश सरकार नगरपालिका, नगर परिषद् एवं नगर निगमों को खंडहर पड़े भवनों का सर्वे करने और ज्यादा ही जर्जर हो चुकी कुछ इमारतों पर कार्रवाई करने के आदेश भी जारी करती है, लेकिन समय बीतने के साथ आदेश कागजों तक ही सिमटकर रह जाते हैं।
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यहां सबसे अधिक हादसे की आशंका
शहर के 15 वार्डो में लगभग 20 से अधिक जर्जर भवन व पुरानी हवेलियां हैं। शहर के प्रत्येक वार्ड में तीन से चार जर्जर भवन है। मोहल्ला जवाहरनगर, करेलिया बाजार, मोहल्ला निमड़ी नीचे, मोहल्ला बिढ़ाट, जेपी स्कूल के पास, परशुराम चौक, पुराना बीईओ कार्यालय, दर्जियान गली सहित अन्य मोहल्लों में जर्जर भवन है।
सरकारी कार्यालयों के भवन भी जर्जर
शहर के कॉलेज रोड स्थित पुराने खंड अधिकारी कार्यालय का भवन तो इतना जर्जर हो चुका है कि कुछ महीने पूर्व उसका छज्जा टूटकर गिरने से एक टैंट हाउस संचालन बच गया था। इसके अलावा पुराना तहसीलदार आवास, पुराना एक्सईन कार्यालय सहित अनेक भवन जर्जर हो चुके है।
-नरेश शर्मा
रखरखाव के अभाव में बदहाल हुए भवन
पहले जो हवेलियां बनती थीं वह आज के आधुनिक भवनों से अच्छी होती थी। अगर इनका रख रखाव ठीक से होता रहे तो आज भी शहर की कई हवेलियां रहने लायक हैं। इन भवनों के निर्माण में ऐसी का इस्तेमाल किया गया है कि गर्मियों में ठंडी और सर्दियों में गर्म रहती है।
-महेश सैनी
हो सकता है जान-माल का नुकसान
शहर में बहुत से ऐसे भवन हैं जो खंडहर हो चुके हैं। इन खंडहर भवनों से कभी भी जान-माल का नुकसान हो सकता है। नगरपालिका को इनके मालिकों को नोटिस जारी करना चाहिए ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।
-लक्ष्मीकांत
रख रखाव कर हो सकता है सदुपयोग
शहर में बहुत सुंदर-सुंदर हवेलियां है जो बंद पड़ी है सही रखरखाव कर इन प्राचीन भवनों का सदुपयोग किया जा सकता है। जो भवन एकदम जर्जर हो चुके है उनको गिरा देना चाहिए जिससे हादसे न हो सके।
जल्द ही नपा की ओर से शहर में सर्वे करा जर्जर भवनों की स्थिति का पता लगाया जाएगा। इसके जिन भवनों से हादसों की आशंका है उनके मालिकों को नोटिस जारी कर इन्हें तुड़ाने के आदेश जारी किए जाएंगे। प्रथम चरण में जो भी खंडहर हैं तथा घनी आबादी के बीच हैं उनपर संज्ञान लिया जाएगा।
-रमेश सैनी, नगरपालिका प्रधान, महेंद्रगढ़