{"_id":"5dd975128ebc3e54990b0ee4","slug":"devlopment-jal-mahal-investment-narnol-news-rtk5290237119","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व धरोहर सप्ताह : ऐतिहासिक जल महल के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व धरोहर सप्ताह : ऐतिहासिक जल महल के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ऐतिहासिक जल महल के जीर्णोद्धार कार्य में जुट गया है। इसके तहत पहले जल महल की सफाई कराई जा रही है। इसके बाद रासायनिक संरक्षण होगा। अंत में विभिन्न कलाकृतियों समेत अन्य का संरक्षण किया जाएगा। जिससे जल महल की पुरानी चमक को दोबारा से लाया जा सके। जल महल देश में सौ प्राचीन धरोहरों में शामिल है। हरियाणा में दूसरे नंबर पर है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जल महल की पुुरानी चमक को दोबारा से लाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के अनुसार लंबे समय के बाद जल महल में पेेंट वर्क होगा। फिलहाल जल महल के सभी गुंबदों की विशेष केमिकल से सफाई कराई जा रही है। सफाई कार्य के बाद केमिकल कोटिंग होगी। इसके बाद जल महल के टूटे पड़े स्ट्रक्चर को ठीक किया जाएगा। वरिष्ठ संरक्षक सहायक प्रवीन कुमार ने बताया कि सैकड़ों साल पुराने भवनों की डिजाइन का आंकलन कर उसी अनुसार कार्य होगा। जिससे की प्राचीन इमारत पहले जैसी बनी रहे। जल महल के अंदर ही दो डिजाइन है। दूसरा जल महल के अंदर कुछ प्राचीन डिजाइन बीच से टूट चुकी हैं। इसका प्रिजवेशन होगा। बता दें कि पिछले साल बारिश के दौरान जल महल के एक ओर की दीवार गिर गई थी। इसका दोबारा से निर्माण किया जाना है। इस बार जल महल में पानी नहीं भरा गया है। इन कार्यों पर 35 लाख रुपये की लागत आएगी।
लोगों को मिलेगी जानकारी
योजना के अनुसार जल महल कैंपस में एक सेंटर बनाने की योजना है। जहां पर पर्यटकों को जल महल के इतिहास के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा कैंपस में लोगों के बैठने के लिए बेंच व नोटिस बोर्ड लगाया जाएगा। नारनौल के रास्ते राजस्थान के जयपुर व उदयपुर आदि पर्यटन स्थलों पर घूमने वाले वाले विदेशी पर्यटक जल महल को देखने के लिए हर साल आते रहते हैं।
विज्ञापन
कैफेट एरिया बनाया जा रहा है
जल महल कैंपस में टॉयलेट मुगलकालीन तरीके से बनाया जा रहा है। इसके लिए उसी प्रकार के पत्थर लगाए जा रहे हैं। यह लगभग बनाकर तैयार हो चुका है। दूसरा जल महल के गेट के पास खाने-पीने के लिए कैफेटेरिया का निर्माण चल रहा है।
क्या है जल महल
जल महल शहर से बाहर मोहल्ला पुरानी मंडी के निकट स्थित है। इस आलीशान भवन का निर्माण नारनौल के जागीरदार शाह कुली खान ने 1590-91 ईसवीं में कराया था। मुख्यद्वार से जल महल तक पहुंचने के लिए सोलह मेहराबों से युक्त एक पुल बनाया गया है। पुल के समाप्त होते ही दो मंजिलें चार कक्षों से घिरे वर्गाकार भवन का निर्माण करवाया गया है। भवन की छत पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। करीब 15 फुट गहरे विशाल तालाब के बीच स्थित यह 500 साल पुराना आलीशान भवन की सुंदरता आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
जल महल के संरक्षण का कार्य शुरू हो चुका है। पहले केमिकल कोटिंग होगी। इसके बाद सैकड़ों साल पुराने चित्र उकेरे जाएंगे। जल महल के सभी कार्य पूरे होने पर सैलानियों को पुरानी विरासत की अच्छी अनुभूति होगी।
- प्रवीन कुमार, संरक्षक सहायक, भारतीय पुरातत्व विभाग
जल महल पर रासायनिक संरक्षण का कार्य चल रहा है जोकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के चंडीगढ़ शाखा के विज्ञान विंग की ओर से कराया जा रहा है। यह कार्य होने भवन की लाइफ बढ़ जाएगी और उसकी पुरानी चमक बनी रहेगी।
- उपेंद्र तोमर, सहायक पुरातत्व रसायन, भारतीय पुरातत्व विभाग
विज्ञापन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जल महल की पुुरानी चमक को दोबारा से लाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के अनुसार लंबे समय के बाद जल महल में पेेंट वर्क होगा। फिलहाल जल महल के सभी गुंबदों की विशेष केमिकल से सफाई कराई जा रही है। सफाई कार्य के बाद केमिकल कोटिंग होगी। इसके बाद जल महल के टूटे पड़े स्ट्रक्चर को ठीक किया जाएगा। वरिष्ठ संरक्षक सहायक प्रवीन कुमार ने बताया कि सैकड़ों साल पुराने भवनों की डिजाइन का आंकलन कर उसी अनुसार कार्य होगा। जिससे की प्राचीन इमारत पहले जैसी बनी रहे। जल महल के अंदर ही दो डिजाइन है। दूसरा जल महल के अंदर कुछ प्राचीन डिजाइन बीच से टूट चुकी हैं। इसका प्रिजवेशन होगा। बता दें कि पिछले साल बारिश के दौरान जल महल के एक ओर की दीवार गिर गई थी। इसका दोबारा से निर्माण किया जाना है। इस बार जल महल में पानी नहीं भरा गया है। इन कार्यों पर 35 लाख रुपये की लागत आएगी।
विज्ञापन
लोगों को मिलेगी जानकारी
योजना के अनुसार जल महल कैंपस में एक सेंटर बनाने की योजना है। जहां पर पर्यटकों को जल महल के इतिहास के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा कैंपस में लोगों के बैठने के लिए बेंच व नोटिस बोर्ड लगाया जाएगा। नारनौल के रास्ते राजस्थान के जयपुर व उदयपुर आदि पर्यटन स्थलों पर घूमने वाले वाले विदेशी पर्यटक जल महल को देखने के लिए हर साल आते रहते हैं।
विज्ञापन
कैफेट एरिया बनाया जा रहा है
जल महल कैंपस में टॉयलेट मुगलकालीन तरीके से बनाया जा रहा है। इसके लिए उसी प्रकार के पत्थर लगाए जा रहे हैं। यह लगभग बनाकर तैयार हो चुका है। दूसरा जल महल के गेट के पास खाने-पीने के लिए कैफेटेरिया का निर्माण चल रहा है।
क्या है जल महल
जल महल शहर से बाहर मोहल्ला पुरानी मंडी के निकट स्थित है। इस आलीशान भवन का निर्माण नारनौल के जागीरदार शाह कुली खान ने 1590-91 ईसवीं में कराया था। मुख्यद्वार से जल महल तक पहुंचने के लिए सोलह मेहराबों से युक्त एक पुल बनाया गया है। पुल के समाप्त होते ही दो मंजिलें चार कक्षों से घिरे वर्गाकार भवन का निर्माण करवाया गया है। भवन की छत पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। करीब 15 फुट गहरे विशाल तालाब के बीच स्थित यह 500 साल पुराना आलीशान भवन की सुंदरता आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
जल महल के संरक्षण का कार्य शुरू हो चुका है। पहले केमिकल कोटिंग होगी। इसके बाद सैकड़ों साल पुराने चित्र उकेरे जाएंगे। जल महल के सभी कार्य पूरे होने पर सैलानियों को पुरानी विरासत की अच्छी अनुभूति होगी।
- प्रवीन कुमार, संरक्षक सहायक, भारतीय पुरातत्व विभाग
जल महल पर रासायनिक संरक्षण का कार्य चल रहा है जोकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के चंडीगढ़ शाखा के विज्ञान विंग की ओर से कराया जा रहा है। यह कार्य होने भवन की लाइफ बढ़ जाएगी और उसकी पुरानी चमक बनी रहेगी।
- उपेंद्र तोमर, सहायक पुरातत्व रसायन, भारतीय पुरातत्व विभाग