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डेंगू का नहीं हुआ समाधान
अमर उजाला ब्यूरो/नारनौल
Updated Tue, 24 Nov 2015 12:36 AM IST
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मेघोत बींजा में रविवार को करीब 6 से 7 ग्रामीणों में डेंगू के लक्षण मिले हैं। इस कारण संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है।
स्थिति से अवगत करवाने के बाद भी दवाई और अन्य सुविधाएं न मिलने के कारण गुस्साए ग्रामीणों ने सोमवार सुबह करीब 11:15 बजे धोलेड़ा-नांगल चौधरी मार्ग जाम कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ की तलहटी में होने के कारण गांव में लगातार बीमारियों का प्रकोप रहता है। गांव में इलाज की व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को नारनौल, नांगल चौधरी या कोटपूतली के निजी और सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है।
इससे पीड़ितों का समय और आर्थिक नुकसान अधिक बढ़ गया। पिछले दो महीने से गांव में डेंगू के संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं। पिछले सप्ताह 47 मरीजों की जांच की गई। इनमें 27 डेंगू सस्पेक्टिड थे।
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इन्हें नारनौल और नांगल चौधरी के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालात नाजुक होने पर 19 को रेफर किया गया। जयपुर में जांच के दौरान 8 मरीजों को कन्फर्म डेंगू मिला।
आधी जगह ही हुई फॉगिंग
ग्रामीणों के शिकायत दर्ज करवाने के बाद 30 अक्तूबर को फॉगिंग करवाई थी। जल्दबाजी में विभाग के कर्मचारियों ने आधे रास्तों में दवाई नहीं छिड़की। इससे दोबारा सस्पेक्टिड डेंगू के मरीज बढ़ने लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक डेंगू संदिग्धों की संख्या 125 से अधिक हो गई।
25 मरीज जयपुर के अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इनकी प्लेटलेट्स कंट्रोल नहीं होने से हालात चिंताजनक है। फॉगिंग करवाने की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा 12 नवंबर को बैठक की। इसमें विभाग को जल्द समाधान नहीं करने पर जाम लगाने की चेतावनी दी थी।
अल्टीमेटम के बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। जांच के दौरान टीम को कई डेंगू सस्पेक्टिड मिले। दवाई और सफाई के अभाव में स्थिति निरंतर गंभीर हो रही है।
सोमवार को परेशान ग्रामीणों ने 11:15 बजे नांगल चौधरी-धौलेड़ा सड़क मार्ग बाधित कर दिया। सूचना मिलने पर सहायक थाना प्रबंधक जनक सिंह, एएसआई जयप्रकाश जाम स्थल पर पहुंचे। उनके आश्वासन पर ग्रामीण सहमत नहीं हुए। चिकित्सक अनिल कुमार ने निशुल्क उपचार का भरोसा देकर जाम खुलवाया गया।
- रास्तों में जलभराव बड़ी समस्या
गांव में करीब 350 घर हैं। पंचायती योजना के तहत एक दर्जन सार्वजनिक पेयजल टंकियों का निर्माण करवाया गया था, ताकि ग्रामीणों को नजदीक ही सुविधा मिल सके। निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण टंकियों के आसपास जलभराव हो गया। वहीं आम रास्तों में कीचड़ बढ़ गया। इससे मच्छर पनपने के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं।
जितना संभव होगा, मदद करेंगे
चिकित्सक अनिल कुमार ने बताया अस्पताल में रक्त प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं। इसलिए मरीजों को हायर सेंटर में रेफर करना पड़ता है। मेघोत बींजा के मरीजों की जांच जारी है। जितना संभव होगा, विभागीय सहायता दी जाएगी।
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स्थिति से अवगत करवाने के बाद भी दवाई और अन्य सुविधाएं न मिलने के कारण गुस्साए ग्रामीणों ने सोमवार सुबह करीब 11:15 बजे धोलेड़ा-नांगल चौधरी मार्ग जाम कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ की तलहटी में होने के कारण गांव में लगातार बीमारियों का प्रकोप रहता है। गांव में इलाज की व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को नारनौल, नांगल चौधरी या कोटपूतली के निजी और सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है।
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इससे पीड़ितों का समय और आर्थिक नुकसान अधिक बढ़ गया। पिछले दो महीने से गांव में डेंगू के संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं। पिछले सप्ताह 47 मरीजों की जांच की गई। इनमें 27 डेंगू सस्पेक्टिड थे।
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इन्हें नारनौल और नांगल चौधरी के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालात नाजुक होने पर 19 को रेफर किया गया। जयपुर में जांच के दौरान 8 मरीजों को कन्फर्म डेंगू मिला।
आधी जगह ही हुई फॉगिंग
ग्रामीणों के शिकायत दर्ज करवाने के बाद 30 अक्तूबर को फॉगिंग करवाई थी। जल्दबाजी में विभाग के कर्मचारियों ने आधे रास्तों में दवाई नहीं छिड़की। इससे दोबारा सस्पेक्टिड डेंगू के मरीज बढ़ने लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक डेंगू संदिग्धों की संख्या 125 से अधिक हो गई।
25 मरीज जयपुर के अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इनकी प्लेटलेट्स कंट्रोल नहीं होने से हालात चिंताजनक है। फॉगिंग करवाने की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा 12 नवंबर को बैठक की। इसमें विभाग को जल्द समाधान नहीं करने पर जाम लगाने की चेतावनी दी थी।
अल्टीमेटम के बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। जांच के दौरान टीम को कई डेंगू सस्पेक्टिड मिले। दवाई और सफाई के अभाव में स्थिति निरंतर गंभीर हो रही है।
सोमवार को परेशान ग्रामीणों ने 11:15 बजे नांगल चौधरी-धौलेड़ा सड़क मार्ग बाधित कर दिया। सूचना मिलने पर सहायक थाना प्रबंधक जनक सिंह, एएसआई जयप्रकाश जाम स्थल पर पहुंचे। उनके आश्वासन पर ग्रामीण सहमत नहीं हुए। चिकित्सक अनिल कुमार ने निशुल्क उपचार का भरोसा देकर जाम खुलवाया गया।
- रास्तों में जलभराव बड़ी समस्या
गांव में करीब 350 घर हैं। पंचायती योजना के तहत एक दर्जन सार्वजनिक पेयजल टंकियों का निर्माण करवाया गया था, ताकि ग्रामीणों को नजदीक ही सुविधा मिल सके। निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण टंकियों के आसपास जलभराव हो गया। वहीं आम रास्तों में कीचड़ बढ़ गया। इससे मच्छर पनपने के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं।
जितना संभव होगा, मदद करेंगे
चिकित्सक अनिल कुमार ने बताया अस्पताल में रक्त प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं। इसलिए मरीजों को हायर सेंटर में रेफर करना पड़ता है। मेघोत बींजा के मरीजों की जांच जारी है। जितना संभव होगा, विभागीय सहायता दी जाएगी।