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Mahendragarh-Narnaul News: नारनौल को जिला व महेंद्रगढ़ में मुख्यालय बनाने की मांग

Sat, 15 Jun 2024 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 15 Jun 2024 12:18 AM IST
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Demand to make Narnaul the headquarters of district and Mahendragarh
महेंद्रगढ़। समाधान शिविर में शुक्रवार को क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों, बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं व लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम संजीव कुमार को ज्ञापन सौंपकर नारनौल को अलग जिला व महेंद्रगढ़ को मुख्यालय दिलाने की मांग उठाई।
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समाजसेवी रामनिवास पाटोदा की देखरेख में सौंपे ज्ञापन में बताया कि सरकार समय-समय पर लोगों की सुविधा के लिए नए जिलों का गठन कर रही है, उसी प्रकार से पुराने जिले पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। महेंद्रगढ़ एक मात्र ऐसा जिला है जहां के लोगों को जिला मुख्यालय के कार्यों के लिए नारनौल जाना पड़ रहा है। जिले के अंतिम छोर के गांव भड़फ, स्याणा-नौताना, सतनाली खंड के गांव कुम्हारान की ढाणी से मुख्यालय की दूरी 70 किलोमीटर के करीब है। वर्षों से लोगों को अपने कार्याें के लिए नारनौल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस अवसर पर पूर्व बार प्रधान बंशीलाल यादव, हरिपाल, पोहप सिंह, मुकेश, विनित, जितेंद्र, विक्रांत, अमित, जयप्रकाश, सुधीर, बलदेव, अजीत, अजय सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए।
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...नहीं तो करेंगे आंदोलन

महेंद्रगढ़ प्रदेश का पहला ऐसा जिला है जिसका मुख्यालय भी 25 किलोमीटर दूर है। प्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद प्रथम सात जिलों में शामिल महेंद्रगढ़ को 58 साल का समय बीत जाने के बावजूद भी उसका मुख्यालय नहीं मिल पाया है। लोगों का कहना है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले अगर महेंद्रगढ़ क्षेत्र के लोगों को उनका हक नहीं मिला तो बड़े स्तर पर क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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लोग बोले- कोई प्रयास तक नहीं किये गए
लोगों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि महेंद्रगढ़ विधान सभा से लगातार 45 सालों से महज दो ही नेता राज करते आ रहे हैं। लेकिन, इन प्रतिनिधियों ने महेंद्रगढ़ में मुख्यालय स्थापित कराने के लिए कोई प्रयास तक नहीं किए। स्थानीय जन प्रतिनिधियों की ओर से जिला मुख्यालय की मांग को कभी भी विधानसभा या लोकसभा में नहीं उठाया गया। महेंद्रगढ़ जिले से अलग होकर अस्तित्व में आए जिले भी लगातार विकास कर रहे हैं।
प्रदेश के प्राचीन सात जिलों में शामिल है महेंद्रगढ़
हरियाणा गठन के समय वर्ष एक नवंबर 1966 में महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, रोहतक, करनाल, अंबाला, जींद, और हिसार सहित कुल सात जिले थे। इसके बाद इन जिलों में से ही 22 दिसंबर 1972 में भिवानी और सोनीपत जिले बनाए गए। 23 जनवरी 1973 को कुरुक्षेत्र, 26 अगस्त 1975 को सिरसा, 15 अगस्त 1979 को फरीदाबाद, एक नवंबर 1989 को 4 नए जिलों में रेवाड़ी, कैथल, पानीपत और यमुनानगर को शामिल किया गया। 15 अगस्त 1995 को पंचकूला, 15 जुलाई 1997 को फतेहाबाद और झज्जर को प्रदेश के जिलों में शामिल किया गया। 4 अप्रैल 2005 को नूंह, 15 अगस्त 2008 को पलवल व 18 सितंबर 2016 को चरखी दादरी को नया जिला बना दिया गया।


जिला मुख्यालय की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहा है संघर्ष
महेंद्रगढ़ में जिला मुख्यालय स्थापित कराने की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष चला था। वहीं वर्ष 2019 में महेंद्रगढ़ बार एसोसिएशन ने वर्ष 2019 में जुलाई महीने से आंदोलन शुरू किया था। इसमें जिला मुख्यालय, फैमिली कोर्ट, एडीजे कोर्ट की मांग को लेकर हड़ताल की थी। इस दौरान शहर ने पूर्ण बंद कर समर्थन किया था। भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी इस बंद में पहुंचे थे। बार की हड़ताल खत्म कराने के लिए तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंडी राव नरबीर, शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा मौके पर पहुंचे थे। सामाजिक संगठनों, महेंद्रगढ़ सम्मान संघर्ष समिति, ग्राम पंचायतों, व्यापारियों ने करीब तीन माह तक चले आंदोलन में समर्थन किया था। इस दौरान बाजार बंद से लेकर सड़कें जाम की गई थी। दो पारी में मुख्यमंत्री रहे मनोहरलाल ने भी आश्वासन दिया था।
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