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किसानों के लिए मिट्टी की घटती उर्वरता बड़ी चुनौती : कृषि विशेषज्ञ

Thu, 18 Jun 2026 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:42 PM IST
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Declining soil fertility a major challenge for farmers: Agricultural expert
फोटो संख्या:67- गांव सुरेहती पिलानिया में किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी देते कृ​षि विशेष
सतनाली। गांव सुरेहती पिलानिया में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ती खेती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरता आज किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में प्राकृतिक खेती एक बेहतर विकल्प बन सकती है।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. अजय यादव ने किसानों को बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक उपयोग जमीन और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके बजाय प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती की लागत कम होती है और भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है। उन्होंने जीवा मृत, घन जीवा मृत, बीजा मृत और प्राकृतिक कीट नियंत्रण जैसे तरीकों की जानकारी दी।
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खंड कृषि अधिकारी डॉ. संदीप सांगवान ने खाद प्रबंधन के फ्रेमवर्क पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों में छोटे स्तर पर प्राकृतिक खेती शुरू करें और उसके परिणामों को समझें।
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कार्यक्रम में बताया गया कि प्राकृतिक खेती से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी स्थिर रहता है। अंत में ग्रामीणों ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से कराने की मांग की ताकि नई कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचती रहे।
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रासायनिक खाद और दवाइयों की बढ़ती कीमतों के कारण खेती करना महंगा होता जा रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है। -बलबीर, किसान, सुरेहती पिलानिया

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प्राकृतिक खेती से मिट्टी की सेहत सुधरती है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है। बाजार में प्राकृतिक तरीके से उत्पादित फसलों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। -सुरेंद्र सिंह, किसान, सुरेहती पिलानिया
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