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शहर के बाईपास पर खतरनाक मोड़ और टी प्वाइंट ले रहे लोगों की जान
महेंद्रगढ़ / नारनौल
Updated Mon, 28 Dec 2015 10:55 PM IST
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शहर के अंदर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बना शहर का बाईपास अब दुर्घटनाओं का पर्याय बनता जा रहा है। गत सात माह में इस बाईपास पर अनेक हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हो चुके हैं। इन दुर्घटनाओं के होने का मुख्य कारण बाईपास पर खतरनाक मोड़ और टी प्वाइंट है।
इन घुमावदार मोड और टी प्वाइटों पर न तो कोई संकेतक लगाए गए हैं और न ही कोई ब्रेकर बनवाए गए हैं। इसी कारण यहां पर हादसे हो रहे हैं। लोग बाईपास पर चलने से भी डरने लगे हैं। रविवार को भी यहां हुए हादसे के कारण 18 लोग घायल हो गए थे। इस बाइपास पर कई डेंजर प्वाइंट हैं, जहां पर हादसे की संभावना हरदम बनी रहती है।
शहर में अनेक वर्षों से बाईपास बनाने की मांग लोग कर रहे थे। लोगों की इस मांग को देखते हुए दो वर्ष पूर्व तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस बाईपास की आधारशिला रखी थी।
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इसके बाद से इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया था तथा मई 2015 को इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। इसका उद्घाटन 28 मई 2015 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किया। उद्घाटन के बाद से इस बाईपास पर कोई भी संकेतक नहीं बनाए गए। इसके बाद से यहां आए दिन कोई न कोई हादसे होते रहते हैं। इस बाईपास में कई डेंजर प्वाइंट हैं।
कई घुमावदार मोड़, नहीं कोई संकेतक
करीब सात किलोमीटर लंबे इस बाईपास में कई घुमावदार मोड़ हैं। इन घुमावदार मोड़ों के कारण यहां पर हादसे होने का डर सबसे ज्यादा बना रहता है।
कई जगह हैं क्रोसिंग, चौराहों पर भी नहीं संकेतक
इस बाईपास पर कई जगह अपरोच रोड़ों पर जाने के लिए क्रोसिंग है। बाईपास की शुरूआत की बात की जाए तो शुरूआत में नांग तिहाड़ी के पास यह महेंद्रगढ़ मुख्य मार्ग से निकलता है, जहां पर कोई संकेतक नहीं लगा हुआ। वहीं थोड़ा आगे चलते ही ढाणी किरारोद मोड़ आता है। यहां यह बाईपास चौराहे जैसा है। इसी बाईपास पर सिंघाना रोड से आगे नहर के पास रघुनाथपुरा जाने के रास्ते के अलावा स्टोन माइन की ओर जाने वाले रास्ते पर भी दो जगह डेंजर प्वाइंट हैं। इसके बाद कुलताजपुर मोड़ और कोरियावास मोड़ पर भी बाईपास पर क्रोसिंग है। कुलताजपुर मोड़ पर दो स्कूल भी पड़ते हैं।
नेशनल हाइवे की क्रोसिंग पर भी नहीं सिग्नल
इस बाईपास पर मुख्य सिंघाना रोड भी आता है। बाईपास की क्रोसिंग सिंघाना रोड पर होती है। सिंघाना रोड नेशनल हाइवे होने के कारण यहां पर सुबह से शाम तक वाहनों का आवागमन लगा रहता है। इसके बावजूद यहां पर किसी प्रकार का सिग्नल नहीं है। इससे यहां हादसों की संभावना ज्यादा बनी रहती है।
कई बार हो चुके हैं यहां हादसे
इस बाईपास पर सात माह के दौरान कई बार हादसे हो चुके हैं। इनमें सिंघाना रोड पर एक बाइक सवार की मौत, सिंघाना रोड पर एक टाटा मैजिक की दुर्घटना, कुलताजपुर मोड़ के पास डीएवी स्कूल की बस पलटी, कोरियावास मोड़ पर ट्रक द्वारा पलट कर खंभे को तोड़ा, कोरियावास मोड़ के पास ही एक ट्रक पलट चुका है। इन हादसों में कई लोग घायल हो चुके हैं। वहीं रविवार को यहां कोरियावास मोड़ पर हादसा होने से 18 लोग घायल हो गए थे।
ऊंचाई पर है बाईपास, गहरे गड्ढों में गिर रहे वाहन
यह बाईपास ऊंचाई पर बना हुआ है। पूरे बाईपास को मिट्टी डालकर बनाया गया था। इसके कारण यह काफी ऊंचाई पर हो गया तथा इसके साइडों में खेत नीचे होने के कारण भी हादसे ज्यादा होते हैं। इस पूरे बाईपास पर कोई सेफ्टी पाइप भी नहीं लगे हुए। रोड ऊंचा होने के कारण सेफ्टी पाइप होना बहुत जरूरी है, मगर पूरे रास्ते में कहीं भी कोई सेफ्टी पाइप नहीं है।
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इन घुमावदार मोड और टी प्वाइटों पर न तो कोई संकेतक लगाए गए हैं और न ही कोई ब्रेकर बनवाए गए हैं। इसी कारण यहां पर हादसे हो रहे हैं। लोग बाईपास पर चलने से भी डरने लगे हैं। रविवार को भी यहां हुए हादसे के कारण 18 लोग घायल हो गए थे। इस बाइपास पर कई डेंजर प्वाइंट हैं, जहां पर हादसे की संभावना हरदम बनी रहती है।
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शहर में अनेक वर्षों से बाईपास बनाने की मांग लोग कर रहे थे। लोगों की इस मांग को देखते हुए दो वर्ष पूर्व तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस बाईपास की आधारशिला रखी थी।
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इसके बाद से इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया था तथा मई 2015 को इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। इसका उद्घाटन 28 मई 2015 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किया। उद्घाटन के बाद से इस बाईपास पर कोई भी संकेतक नहीं बनाए गए। इसके बाद से यहां आए दिन कोई न कोई हादसे होते रहते हैं। इस बाईपास में कई डेंजर प्वाइंट हैं।
कई घुमावदार मोड़, नहीं कोई संकेतक
करीब सात किलोमीटर लंबे इस बाईपास में कई घुमावदार मोड़ हैं। इन घुमावदार मोड़ों के कारण यहां पर हादसे होने का डर सबसे ज्यादा बना रहता है।
कई जगह हैं क्रोसिंग, चौराहों पर भी नहीं संकेतक
इस बाईपास पर कई जगह अपरोच रोड़ों पर जाने के लिए क्रोसिंग है। बाईपास की शुरूआत की बात की जाए तो शुरूआत में नांग तिहाड़ी के पास यह महेंद्रगढ़ मुख्य मार्ग से निकलता है, जहां पर कोई संकेतक नहीं लगा हुआ। वहीं थोड़ा आगे चलते ही ढाणी किरारोद मोड़ आता है। यहां यह बाईपास चौराहे जैसा है। इसी बाईपास पर सिंघाना रोड से आगे नहर के पास रघुनाथपुरा जाने के रास्ते के अलावा स्टोन माइन की ओर जाने वाले रास्ते पर भी दो जगह डेंजर प्वाइंट हैं। इसके बाद कुलताजपुर मोड़ और कोरियावास मोड़ पर भी बाईपास पर क्रोसिंग है। कुलताजपुर मोड़ पर दो स्कूल भी पड़ते हैं।
नेशनल हाइवे की क्रोसिंग पर भी नहीं सिग्नल
इस बाईपास पर मुख्य सिंघाना रोड भी आता है। बाईपास की क्रोसिंग सिंघाना रोड पर होती है। सिंघाना रोड नेशनल हाइवे होने के कारण यहां पर सुबह से शाम तक वाहनों का आवागमन लगा रहता है। इसके बावजूद यहां पर किसी प्रकार का सिग्नल नहीं है। इससे यहां हादसों की संभावना ज्यादा बनी रहती है।
कई बार हो चुके हैं यहां हादसे
इस बाईपास पर सात माह के दौरान कई बार हादसे हो चुके हैं। इनमें सिंघाना रोड पर एक बाइक सवार की मौत, सिंघाना रोड पर एक टाटा मैजिक की दुर्घटना, कुलताजपुर मोड़ के पास डीएवी स्कूल की बस पलटी, कोरियावास मोड़ पर ट्रक द्वारा पलट कर खंभे को तोड़ा, कोरियावास मोड़ के पास ही एक ट्रक पलट चुका है। इन हादसों में कई लोग घायल हो चुके हैं। वहीं रविवार को यहां कोरियावास मोड़ पर हादसा होने से 18 लोग घायल हो गए थे।
ऊंचाई पर है बाईपास, गहरे गड्ढों में गिर रहे वाहन
यह बाईपास ऊंचाई पर बना हुआ है। पूरे बाईपास को मिट्टी डालकर बनाया गया था। इसके कारण यह काफी ऊंचाई पर हो गया तथा इसके साइडों में खेत नीचे होने के कारण भी हादसे ज्यादा होते हैं। इस पूरे बाईपास पर कोई सेफ्टी पाइप भी नहीं लगे हुए। रोड ऊंचा होने के कारण सेफ्टी पाइप होना बहुत जरूरी है, मगर पूरे रास्ते में कहीं भी कोई सेफ्टी पाइप नहीं है।