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कोरोना के बाद अब डेंगू पर फोकस, निपटने के लिए प्रशासन ने शुरू की तैयारियां
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कोरोना से जैसे जैसे हालात काबू में आ रहे हैं वैसे ही अब पूरा फोक्स डेंगू और मलेरिया की रोकथाम पर स्वास्थ्य विभाग ने लगा दिया है। स्वास्थ्य कर्मचारियों को अब आदेश दिए गए हैं कि शहर व गांवों में फोगिंग की जाए व जहां पानी जमा है वहां पर तेल डाला जाए। कोरोना से प्रभावित रहे मरीजों को विशेष एतिहात बरतने की अपील की गई है। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से सभी लैब संचालकों आदेश दिए गए हैं कि डेंगू की जांच के लिए निर्धारित रेट से अधिक लिए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन तैयार
कोरोना के केसों में कमी के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को डेंगू व मलेरिया से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। इसके लिए सभी कर्मचारियों को ऐसे क्षेत्र चिन्हित करने को कहा गया है जहां पर जल भराव है या बुखार के केस अधिक आ रहे हैं। लोगों से भी अपील की जा रही है कि कूलर व दूसरी जगह जल भराव होने पर उसमें मोबिल या काला तेल डालें। इसके साथ साथ प्रशासन भी जल्द ही सभी इलाकों में फोगिंग शुरू करने जा रहा है। सबसे पहले शहर में फॉगिंग की जाएगी इसके बाद गांवों में इस कार्य को किया जाएगा।
लैब संचालकों को निर्देश, तय रेट से अधिक लिए तो होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी लैब संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकार द्वारा तय रेट ही डेंगू टैस्ट के लिए जाएं। जांच के लिए 600 रुपये निर्धारित किए गए हैं। लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कोई अधिक पैसे ले तो उसकी शिकायत तुरंत सिविल सर्जन कार्यालय में की जाए।
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पिछले साल मिले थे छह केस
वर्ष 2020 में जिले में छह केस डेंगू के मिले थे। इससे पहले 2019 में 10 केस आए थे। साल 2018 में चार डेंगू के मामले आए थे। वहीं साल 2017 व 2016 में तीन-तीन डेंगू के केस आए थे। साल 2015 में पांच और साल 2014 में दो डेंगू के मामले आए थे।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि कोरोना के बाद प्रशासन की पूरा फोकस अब डेंगू पर है। बुखार के केस लगातार बढ़ रहे हैं। लोग इस बात का ध्यान रखें कि प्लेटलेट्स का कम होना डेंगू नहीं है। बुखार में प्लेटलेट्स कम होना आम बात है। प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह लेकर आराम करें। कोरोना संक्रमण धीरे धीरे कम हो रहा है मगर फिर भी सावधानी रखने की आवश्यकता है। मौसम में लगातार बदलाव से सभी को सचेत रहने की जरूरत है। अभी तक जिले में डेंगू का कोई केस नहीं मिला है। बारिश के मौसम में ही इस बीमारी का सबसे अधिक खतरा रहता है। एडिज एगिप्टी मच्छरों से यह बीमारी फैलती है। दूसरे मच्छरों से अलग एडिज एगिप्टी मच्छर दिन में काटते हैं और उसके बाद शरीर में दर्द और बुखार रहता है।
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बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन तैयार
कोरोना के केसों में कमी के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को डेंगू व मलेरिया से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। इसके लिए सभी कर्मचारियों को ऐसे क्षेत्र चिन्हित करने को कहा गया है जहां पर जल भराव है या बुखार के केस अधिक आ रहे हैं। लोगों से भी अपील की जा रही है कि कूलर व दूसरी जगह जल भराव होने पर उसमें मोबिल या काला तेल डालें। इसके साथ साथ प्रशासन भी जल्द ही सभी इलाकों में फोगिंग शुरू करने जा रहा है। सबसे पहले शहर में फॉगिंग की जाएगी इसके बाद गांवों में इस कार्य को किया जाएगा।
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लैब संचालकों को निर्देश, तय रेट से अधिक लिए तो होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी लैब संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकार द्वारा तय रेट ही डेंगू टैस्ट के लिए जाएं। जांच के लिए 600 रुपये निर्धारित किए गए हैं। लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कोई अधिक पैसे ले तो उसकी शिकायत तुरंत सिविल सर्जन कार्यालय में की जाए।
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पिछले साल मिले थे छह केस
वर्ष 2020 में जिले में छह केस डेंगू के मिले थे। इससे पहले 2019 में 10 केस आए थे। साल 2018 में चार डेंगू के मामले आए थे। वहीं साल 2017 व 2016 में तीन-तीन डेंगू के केस आए थे। साल 2015 में पांच और साल 2014 में दो डेंगू के मामले आए थे।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि कोरोना के बाद प्रशासन की पूरा फोकस अब डेंगू पर है। बुखार के केस लगातार बढ़ रहे हैं। लोग इस बात का ध्यान रखें कि प्लेटलेट्स का कम होना डेंगू नहीं है। बुखार में प्लेटलेट्स कम होना आम बात है। प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह लेकर आराम करें। कोरोना संक्रमण धीरे धीरे कम हो रहा है मगर फिर भी सावधानी रखने की आवश्यकता है। मौसम में लगातार बदलाव से सभी को सचेत रहने की जरूरत है। अभी तक जिले में डेंगू का कोई केस नहीं मिला है। बारिश के मौसम में ही इस बीमारी का सबसे अधिक खतरा रहता है। एडिज एगिप्टी मच्छरों से यह बीमारी फैलती है। दूसरे मच्छरों से अलग एडिज एगिप्टी मच्छर दिन में काटते हैं और उसके बाद शरीर में दर्द और बुखार रहता है।