{"_id":"65cd05e97d81ae9db50af5fb","slug":"city-residents-troubled-by-bad-roads-poor-sanitation-system-narnol-news-c-203-1-sroh1010-107420-2024-02-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: बदहाल सड़कें, चौपट सफाई व्यवस्था से शहरवासी परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: बदहाल सड़कें, चौपट सफाई व्यवस्था से शहरवासी परेशान
Wed, 14 Feb 2024 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 14 Feb 2024 11:56 PM IST
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। नगरपालिका पिछले 22 माह से कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतार पाई है। शहरवासी शहर में नगरपालिका के माध्यम से विकास कार्याें का इंतजार कर रहे हैं तो यह इंतजार लंबा करना होगा।
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन हो या फिर बदहाल सड़कों की दशा सुधारना या फिर शहर में अन्य विकास कार्य हों, शहर की सरकार का कार्यकाल विकास के नाम पर सूख गया है। अब आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि 15 मार्च के आसपास आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में शहर में विकास कार्याें की बाट जोह रहे लोगों को और लंबा इंतजार करना होगा।
गत 22 माह के दौरान नपा के अधिकारियों पर कभी गलत एनडीसी के मामले में तो कभी अन्य प्रकार की धांधली के मामले की जांच की तलवार लटकी हुई थी। इस मामले में जब नगरपालिका के सचिव को सस्पेंड किया गया था तो लंबे समय तक नये सचिव नहीं आये। वहीं एमई, अकाउंटेंट, बीआई, एसआई सहित अन्य रिक्त पदों पर शहर के चेयरमैन से लेकर पार्षदों तक एड़ी चोटी का जोर लगाने के बावजूद नियुक्ति नहीं हो रही है। नपा के पिछले 22 माह के कार्यकाल की बात करें तो विकास के नाम पर नपा के हाथ खाली हैं। वहीं छोटे-मोट कार्यों के कोई भी बिल पास नहीं हो रहे हैं, लेकिन हर माह 15 लाख के करीब कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन के बिल तय समय पर पास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले 22 माह में नहीं हुए कोई भी बिल पास
पिछले 22 माह के दौरान कोई भी बिल तक पास नहीं हो पाए हैं। इनके कारण नपा के पांच टेंपो में से तीन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में खड़े हैं। वहीं ट्रैक्टर का समय पर रखरखाव नहीं होने से आधे समय वह भी बंद रहते हैं। 2.50 करोड़ रुपये का टेंडर लगाने के बावजूद भी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। इससे शहर में सफाई के हालात बदहाल हैं। शहर के 11 हट्टा बाजार की 2.50 करोड़ की फाइल पर भी छह माह पूर्व लगे ऑब्जेक्शन को अधिकारी दूर तक नहीं कर पाए हैं।
शहर में यह है बदहाली का आलम
नपा के पास पर्याप्त वाहन नहीं होने के कारण सफाई व्यवस्था ठप है। शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर कचरे के ढेर लगे हैं। वहीं शहर के 20 से अधिक मुख्य सड़क व गलियां बदहाल हो चुकी हैं। पिछले 15 सालों से इन सड़कों पर निर्माण तक नहीं हुआ है। जिन सड़कों का निर्माण चुनाव से पूर्व नपा का जब प्रशासन के हाथ में चार्ज था तो कुछ सड़कों पर काम हुआ था उनमें भी लोगों द्वारा भारी धांधली के आरोप लगाए गए थे। शहर का सिनेमा रोड, मसानी चौक से परशुराम चौक, डुलाना रोड, बुचौली रोड, सब्जी मंडी रोड, ब्रह्मचारी रोड, 11 हट्टा बाजार सहित मुख्य चौक-चौराहे गलियां बदहाल हो चुकी हैं। 12 कालोनियों को मान्यता दिलाने के लिए गत नवंबर माह में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट पर भी आब्जेक्शन लगाकर शहरी निकाय विभाग द्वारा इसे रद्द कर दिया। लेकिन जिम्मेदार इसके ऑब्जेक्शन तक को दूर नहीं कर पाए हैं। वहीं 2.50 करोड़ की लगात से निर्माणाधीन सामुदायिक भवन, अतिक्रमण पर नियंत्रण, अस्थाई पार्किंग, 5 करोड़ से बनने वाले नपा के नए भवन व आधुनिक शॉपिंग कॉम्पलेक्स, 20 मुख्य सड़कों के मजबूती एवं नवीनीकरण, शहर में 56 लाख की लगात से 2300 स्ट्रीट लाइटें लगाने सहित अन्य प्रकार की योजनाएं भी ठंडे बस्ते में चली गई हैं।
जानकर अंजान बने हैं स्थानीय नेता
वर्तमान कांग्रेसी विधायक राव दान सिंह ने तो पिछले चार सालों में एक बार भी शहर के विकास को लेकर नगरपालिका के अधिकारियों व पार्षदों तक की बैठक नहीं ली है। शहर के विकास को लेकर विधायक जी महज हुड्डा पार्क में ही कभी कभार चक्कर लगाते हैं। वहीं विधान सभा में भी शहर के विकास को लेकर कोई मुद्दा तक नहीं उठा पाए हैं। वहीं भाजपा के कद्दावर नेता कहे जाने वाले पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने भी शहर के विकास को मौन साधे हुए हैं। जब नगरपालिका प्रधान व उप प्रधान का चुनाव होना था उनकी पूरी भूमिका रही थी। यहां नगरपालिका के वर्तमान प्रधान, उप प्रधान व 15 पार्षदों की ओर से नगरपालिका में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति को लेकर पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भी कोई समाधान नहीं हो पाया है।
जब तक रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं विकास की उम्मीद भी नहीं
22 माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारियों तक गुहार के बावजूद भी रिक्त पदों पर तैनाती तक नहीं हो पाई। जब तक नपा के सभी जिम्मेदार पदों पर नियुक्ति नहीं होगी तक तक कोई भी योजना सिरे नहीं चढ़ पाएगी। अधिकारियों की स्थाई नियुक्ति को लेकर पूर्व शिक्षामंत्री, डीएमसी, मुख्यमंत्री, शहरी निकाय विभाग के उच्चाधिकारियों तक अवगत कराया जा चुका है। प्रयासों के बावजूद भी नियुक्ति नहीं हो पाई है। जब तक सभी पदों पर नियुक्ति नहीं होती तब तक कोई भी योजना सिरे नहीं चढ़ पाएगी।
रमेश सैनी, प्रधान, नगरपालिका
विज्ञापन
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन हो या फिर बदहाल सड़कों की दशा सुधारना या फिर शहर में अन्य विकास कार्य हों, शहर की सरकार का कार्यकाल विकास के नाम पर सूख गया है। अब आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि 15 मार्च के आसपास आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में शहर में विकास कार्याें की बाट जोह रहे लोगों को और लंबा इंतजार करना होगा।
विज्ञापन
गत 22 माह के दौरान नपा के अधिकारियों पर कभी गलत एनडीसी के मामले में तो कभी अन्य प्रकार की धांधली के मामले की जांच की तलवार लटकी हुई थी। इस मामले में जब नगरपालिका के सचिव को सस्पेंड किया गया था तो लंबे समय तक नये सचिव नहीं आये। वहीं एमई, अकाउंटेंट, बीआई, एसआई सहित अन्य रिक्त पदों पर शहर के चेयरमैन से लेकर पार्षदों तक एड़ी चोटी का जोर लगाने के बावजूद नियुक्ति नहीं हो रही है। नपा के पिछले 22 माह के कार्यकाल की बात करें तो विकास के नाम पर नपा के हाथ खाली हैं। वहीं छोटे-मोट कार्यों के कोई भी बिल पास नहीं हो रहे हैं, लेकिन हर माह 15 लाख के करीब कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन के बिल तय समय पर पास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले 22 माह में नहीं हुए कोई भी बिल पास
पिछले 22 माह के दौरान कोई भी बिल तक पास नहीं हो पाए हैं। इनके कारण नपा के पांच टेंपो में से तीन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में खड़े हैं। वहीं ट्रैक्टर का समय पर रखरखाव नहीं होने से आधे समय वह भी बंद रहते हैं। 2.50 करोड़ रुपये का टेंडर लगाने के बावजूद भी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। इससे शहर में सफाई के हालात बदहाल हैं। शहर के 11 हट्टा बाजार की 2.50 करोड़ की फाइल पर भी छह माह पूर्व लगे ऑब्जेक्शन को अधिकारी दूर तक नहीं कर पाए हैं।
शहर में यह है बदहाली का आलम
नपा के पास पर्याप्त वाहन नहीं होने के कारण सफाई व्यवस्था ठप है। शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर कचरे के ढेर लगे हैं। वहीं शहर के 20 से अधिक मुख्य सड़क व गलियां बदहाल हो चुकी हैं। पिछले 15 सालों से इन सड़कों पर निर्माण तक नहीं हुआ है। जिन सड़कों का निर्माण चुनाव से पूर्व नपा का जब प्रशासन के हाथ में चार्ज था तो कुछ सड़कों पर काम हुआ था उनमें भी लोगों द्वारा भारी धांधली के आरोप लगाए गए थे। शहर का सिनेमा रोड, मसानी चौक से परशुराम चौक, डुलाना रोड, बुचौली रोड, सब्जी मंडी रोड, ब्रह्मचारी रोड, 11 हट्टा बाजार सहित मुख्य चौक-चौराहे गलियां बदहाल हो चुकी हैं। 12 कालोनियों को मान्यता दिलाने के लिए गत नवंबर माह में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट पर भी आब्जेक्शन लगाकर शहरी निकाय विभाग द्वारा इसे रद्द कर दिया। लेकिन जिम्मेदार इसके ऑब्जेक्शन तक को दूर नहीं कर पाए हैं। वहीं 2.50 करोड़ की लगात से निर्माणाधीन सामुदायिक भवन, अतिक्रमण पर नियंत्रण, अस्थाई पार्किंग, 5 करोड़ से बनने वाले नपा के नए भवन व आधुनिक शॉपिंग कॉम्पलेक्स, 20 मुख्य सड़कों के मजबूती एवं नवीनीकरण, शहर में 56 लाख की लगात से 2300 स्ट्रीट लाइटें लगाने सहित अन्य प्रकार की योजनाएं भी ठंडे बस्ते में चली गई हैं।
जानकर अंजान बने हैं स्थानीय नेता
वर्तमान कांग्रेसी विधायक राव दान सिंह ने तो पिछले चार सालों में एक बार भी शहर के विकास को लेकर नगरपालिका के अधिकारियों व पार्षदों तक की बैठक नहीं ली है। शहर के विकास को लेकर विधायक जी महज हुड्डा पार्क में ही कभी कभार चक्कर लगाते हैं। वहीं विधान सभा में भी शहर के विकास को लेकर कोई मुद्दा तक नहीं उठा पाए हैं। वहीं भाजपा के कद्दावर नेता कहे जाने वाले पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने भी शहर के विकास को मौन साधे हुए हैं। जब नगरपालिका प्रधान व उप प्रधान का चुनाव होना था उनकी पूरी भूमिका रही थी। यहां नगरपालिका के वर्तमान प्रधान, उप प्रधान व 15 पार्षदों की ओर से नगरपालिका में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति को लेकर पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भी कोई समाधान नहीं हो पाया है।
जब तक रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं विकास की उम्मीद भी नहीं
22 माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारियों तक गुहार के बावजूद भी रिक्त पदों पर तैनाती तक नहीं हो पाई। जब तक नपा के सभी जिम्मेदार पदों पर नियुक्ति नहीं होगी तक तक कोई भी योजना सिरे नहीं चढ़ पाएगी। अधिकारियों की स्थाई नियुक्ति को लेकर पूर्व शिक्षामंत्री, डीएमसी, मुख्यमंत्री, शहरी निकाय विभाग के उच्चाधिकारियों तक अवगत कराया जा चुका है। प्रयासों के बावजूद भी नियुक्ति नहीं हो पाई है। जब तक सभी पदों पर नियुक्ति नहीं होती तब तक कोई भी योजना सिरे नहीं चढ़ पाएगी।
रमेश सैनी, प्रधान, नगरपालिका