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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Change Sur, hand-turned logistics hub

बदले सुर, हाथ से निकला लॉजिस्टिक हब

Wed, 28 Oct 2015 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल Updated Wed, 28 Oct 2015 01:13 AM IST
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नारनौल। पिछड़ेपन का कलंक झेल रहे जिले के लोगों के लिए बुरी खबर ये है कि अब अति महत्वाकांक्षी परियोजना ‘मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब’ आपसी खींचतान के कारण हाथ से निकलता नजर आ रहा है। इस परियोजना को क्षेत्र में लाने की जुगाड़ में लगे विधायकों के सुर भी बदल गए हैं। एक विधायक तो यहां तक कह रहे हैं कि प्रोजेक्ट पर पहला हक बावल के लोगों का है, इसलिए शायद यह फिर से बावल चला जाए। वहीं दूसरी विधायक यह कह रही हैं कि उनका प्रयास है कि परियोजना को अपने क्षेत्र में लेकर आएं, मगर इसके लिए काफी मेहनत करनी होगी। दोनों विधायकों के अलग-अलग बयान से क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित होने वाली परियोजना से लोगों को हाथ धोना पड़ जाएगा।
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दादरी (नोएडा) से कांडला बंदरगाह (मुंबई) तक बनने जा रहे रेलवे के डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (गलियारा) पर माल ढुलाई के लिए प्रस्तावित मल्टी माडल लॉजिस्टिक हब को जिले में लाने के प्रयास में जुटे दोनों विधायक अब पीछे हटते दिख रहे हैं। शायद यही कारण है कि 21 अक्तूबर की रैली में मुख्यमंत्री के सामने दोनों विधायकों ने इसका कोई जिक्र नहीं किया। वहीं इससे पहले जुलाई में कनीना तथा नांगल चौधरी में आयोजित सीएम की रैली में दोनों विधायकों ने प्रोजेक्ट को अपने-अपने क्षेत्र में लाने की पूरी पैरवी की थी। अबकी बार इस मुद्दे पर दोनों विधायक शांत बैठे रहे।
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- मिटता पिछड़ेपन का कलंक
देखा जाए तो यह परियोजना जिला महेंद्रगढ़ पर लगे पिछड़ेपन के कलंक को दूर कर सकती है। कारण, प्रोजेक्ट के आने के बाद बंजर भूमि में जीवनयापन कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। यह प्रोजेक्ट बंजर पड़े इस क्षेत्र के लोगों के लिए संजीवनी साबित होगा और क्षेत्र में विकास का मार्ग खुलेगा। ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि योजना को जिला महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी या अटेली क्षेत्र में लाने की कोशिश करे।
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- क्या है यह योजना
यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में व्यापार के लिए दिल्ली को सीधे मुंबई को जोड़ने के लिए नार्थ-वेस्ट कॉरिडोर के नाम से एक योजना तैयार की गई थी। योजना को सिरे चढ़ते-चढ़ते करीब सात-आठ साल होने को हैं। दिल्ली के बाहर दादरी से मुंबई के पास कांडला बंदरगाह तक रेलवे लाइन बिछाई जानी है। एक चरण का कार्य पूरा होने वाला है। इसके तहत भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है और इसकी लाइनें बिछाने का कार्य चल रहा है। योजना के तहत दो लाइनें डाली जा रही हैं, इन पर तेज रफ्तार की माल गाड़ियां सरपट  दौड़ेंगी। इन माल गाड़ियों में आने वाले माल को रखने और आसपास से निर्मित माल को भेजने के लिए बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। यहां से माल को हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल और जम्मू कश्मीर भेजा जाएगा। हब में बड़े-बड़े वेयर हाउस बनेंगे।
- बावल में रद हुआ था जमीन का अवार्ड
सरकार ने सबसे पहले बावल क्षेत्र को चुना था तथा वहां पर सरकार ने भूमि अधिग्रहण कर अवार्ड भी घोषित कर दिया था। मगर वहां के किसान उनको मिलने वाले मुआवजे से संतुष्ट नहीं थे। वहीं रक्षा राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इसका विरोध भी किया। इसके बाद सरकार ने आनन-फानन में इसको रद कर दिया और इसके बाद से सरकार इसको जल्दी बनाना चाहती है। 27 दिसंबर को यहां पर एक टीम ने जमीन का मुआयना भी किया था।
- कई जगहों का किया था मुआयना
आईएमएमएलएच (इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब) तथा मॉॅडल इंडस्ट्रियल टाउनशिप जैसी महत्वाकांक्षी योजना के लिए एचएसआईआईडीसी चंडीगढ़ से सीनियर टाउन प्लानर ने तीन जगहों का मुआयना भी किया है। बावल में हब रद होने के बाद निजामपुर क्षेत्र में इसके लिए जितनी जमीन चाहिए उससे करीब 7 गुणा जमीन अधिक है। ब्लॉक की 28 पंचायतों के अधीन 14,948 एकड़ पंचायती जमीन है। इसमें 13,975 एकड़ जमीन बारानी है, इसे पंचायत निशुल्क देने को तैयार है। बावल में 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मांगा जा रहा था।
- दो हजार एकड़ जमीन की है आवश्यकता
परियोजना के लिए आरंभ में 2 हजार एकड़ जमीन की आवश्यकता है। आवश्यकता को अकेला मूसनौता गांव पूरा कर सकता है। मूसनौता गांव के पास 2733 एकड़ पंचायती भूमि हैं। पूर्व सरपंच मामचंद का कहना है कि गांव पंचायती भूमि देने को तैयार है, क्योंकि सारी पहाड़ी रेतीली जमीन है।

- जनवरी में देखी फिर से साइटें
लॉजिस्टिक हब के लिए जनवरी 15 में साइट देखने आए सीनियर टाउन प्लानर यूसुफ मोहम्मद मंसूरी ने निजामपुर क्षेत्र में तीन जगहों का अवलोकन किया। इनमें एक साइट मौखूता, ब्राह्मणवास, नारेहड़ी, पांचनौता और रूपसराय, दूसरी साइट घाटाशेर, बसीरपुर, सरेली, तलोट, बेरूंडला तथा तीसरी साइट मूसनौता की पंचायती भूमि की रही। इनमें सबसे पहली साइट उपयुक्त मानी गई है। यहां पंचायती जमीन 3223  एकड़ बनती है। अकेले पांचनौता गांव के पास 1701 एकड़ जमीन है।नांगल दुर्गू गांव के पास 1004 एकड़ जमीन है।

- कई कारणों से बेहतर है यह जगह
यहां की पंचायत इस जमीन को निशुल्क दे रहे हैं, बावल में किसान इसके लिए भारी भरकम मुआवजा मांग रहे हैं। यह जमीन बंजर है, बावल की जमीन पर खेती होती है। इसलिए बंजर जमीन पर हब बनाना अधिग्रहण के नियमों के अनुसार सही है। वहीं जहां के लिए भूमि का चयन किया जा रहा है, उसकी नेशनल हाईवे से भी सीधी कनेक्टिविटी है। प्रस्तावित साउथ-नॉर्थ सड़क कॉरिडोर से वाया नांगल चौधरी और नारनौल सीधी कनेक्टिविटी है। वहीं यह राजस्थान के नीमराना बहरोड़ औद्योगिक क्षेत्र से मात्र 25 किमी दूरी पर।

ये रही योजना की कहानी
- दिसंबर 14: बावल में जमीन का अवार्ड रद
- 27 दिसंबर 14: अटेली और नांगल चौधरी पहुंची टीम
- जनवरी 15: टीम ने क्षेत्र में किया दो बार दौरा
- फरवरी/मार्च 15: कई अधिकारियों ने किए दौरे
- जुलाई 15: नांगल चौधरी रैली में स्थानीय और अटेली विधायकों ने सीएम के सामने उठाई मांग
- जुलाई 15: बावल के लोगों ने फिर जताई भूमि देने की इच्छा

कोट्स
यहां पर लॉजिस्टिक हब बनाने के लिए पूरे प्रयास किए थे, मगर अब बावल के लोग फिर से इसके लिए जमीन देने को तैयार हैं। इसलिए लगता है कि प्राथमिकता बावल को दी जाएगी, क्योंकि वहां पर सब कुछ तैयार किया हुआ है। - डा. अभय सिंह,  विधायक, नांगल चौधरी


इस योजना को लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार इस पर पूरा काम देख रही है। उनका प्रयास रहेगा कि यह योजना इस क्षेत्र में ही लाई जाए। - संतोष यादव, विधायक, अटेली
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