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Mahendragarh-Narnaul News: आठ दशक से आस्था का केंद्र बना बाबा मोलड़नाथ का होली मेला

Thu, 26 Feb 2026 12:20 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 12:20 AM IST
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Baba Moladnath's Holi fair has been a center of faith for eight decades.
फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद
कनीना। संत शिरोमणि बाबा मोलड़नाथ का ऐतिहासिक होली मेला आठ दशक से आस्था का केंद्र बना है। मेला प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि यहां राजस्थान, पंजाब, दिल्ली व उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।
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इस मेले में ऊंटों, घोड़ियों की दौड़, दंगल, कबड्डी व पशुओं के नृत्य लोगों के लिए वर्षों से आकर्षण का केंद्र रहे हैं। दंगल प्रतियोगिता की शुरुआत कैप्टन सूरजभान ने करवाई थी जबकि ऊंट-घोड़ियों की दौड़ चार दशक पूर्व मुख्याध्यापक रहे विजेंद्र सिंह, गजराज सिंह ठेकेदार, सुमेर चेयरमैन, ओमप्रकाश, अभिमन्यु व मास्टर रामप्रताप के प्रयासों से शुरू हुई थी।
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कुलगुरु के रूप में पूजे जाते हैं बाबा मोलड़नाथ
क्षेत्रवासी बाबा मोलड़नाथ को कुलगुरु मानकर श्रद्धा से पूजते हैं। फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आयोजित इस मेले में श्रद्धालु बाबा को शक्कर का प्रसाद चढ़ाते हैं जिसके कारण इसे शक्कर वाला मेला भी कहा जाता है। मान्यता है कि बाबा मोलड़नाथ (बालकनाथ) ने कनीना की धरती पर तप कर क्षेत्र को आपदाओं से सुरक्षित रखा। नई व्यवस्थाओं व परंपराओं के संगम के साथ इस वर्ष का बाबा मोलड़नाथ होली मेला श्रद्धा, संस्कृति व सुव्यवस्थित आयोजन का अनूठा उदाहरण बनने जा रहा है।
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बाबा मोलड़नाथ के ऐतिहासिक होली मेले की परंपरा, आकर्षण समय के साथ और भी व्यापक होता जा रहा है। जब ऊंट-घोड़ियों की दौड़ शुरू करवाई गई थी, तब आसपास के गांवों से ही लोग अधिक संख्या में आते थे लेकिन अब यह मेला राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।-रामप्रताप, शिक्षक, कनीना
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बाबा मोलड़नाथ होली मेले में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। मेले में चारों ओर भंडारे लगाए जाते हैं। यह मेला एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है जिसमें कई श्रद्धालु शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।-प्रकाश चंद्र, कमेटी सदस्य

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पहले बाबा मोलड़नाथ को केवल शक्कर का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा थी लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आया है और अब श्रद्धालु शक्कर के साथ विभिन्न प्रकार के प्रसाद भी चढ़ाते हैं। इसके बावजूद यह मेला आज भी शक्कर मेले के नाम से प्रसिद्ध है।-सूबेदार रामनिवास, कमेटी सदस्य

फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद

फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद

फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद

फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद

फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद

फोटो संख्या:88- कनीना के मोलड़नाथ मंदिर में कार्य करते मंदिर कमेटी---संवाद

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