फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Artisans make embroidered frames in village Talot, which are consumed abroad

गांव तलोट में कारीगर बनाते है कशीदा फ्रेम जिसकी विदेशों में होती है खपत

Mon, 29 Nov 2021 12:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 12:15 AM IST
विज्ञापन
Artisans make embroidered frames in village Talot, which are consumed abroad
मशीन पर कशीदा फ्रेम बनाता कारीगर। - फोटो : Narnol
नलवाटी क्षेत्र में बसे गांव तलोट की पहचान विदेशों तक है। जिसके चलते गांव तलोट में हर घर में एक कशीदा फ्रेम बनाने वाला कारीगर है। गांव में कशीदा फ्रेम बनाने की पहचान दिल्ली के अलावा विदेशों में भी है। यहां का बनाया हुआ लकड़ी की कशीदा फ्रेम दिल्ली से विदेशों में एक्सपोर्ट होता है।
विज्ञापन

ग्रामीण बताते है कि हमारे बुजुर्ग लोग दिल्ली में रहकर लकड़ी की कशीदा फ्रेम बनाने का काम करते थे। समय परिवर्तन के साथ लोगों ने दिल्ली की बजाय गांव तलोट में मशीन लगाकर कशीदा फ्रेम बनाने का काम शुरू कर दिया। कशीदा फ्रेम की लकड़ी हरिद्वार मंगवाई जाती है। फ्रेम बनाने के कार्य ने बिजनेस का रूप ले लिया। कोरोना काल में कार्य बंद होने से कारीगरों को खासी परेशानी हुई लेकिन समय ठीक होते ही कार्य फिर से पटरी पर लौट गया है। जिससे कारीगरों ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन

कशीदा फ्रेम बनाने वाले कारीगर मदन, रमेश, ओमप्रकाश, हेमचंद व लख्मी चंद ने बताया कि लकड़ी की बनी कशीदा फ्रेम कपड़े में कढ़ाई का काम करता है। जिसकी अरब देशों में ज्यादा खपत है। जिसका सालाना 2 करोड़ 40 लाख रुपये का टर्नओवर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्रामीण अंकित ने बताया कि गांव में कशीदा फ्रेम बनाने का काम 1984 से कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली में करते थे। वहीं मजदूरी गांव में रहकर बन जाती है तो दिल्ली घर से दूर रहकर क्या फायदा। रतन ने बताया कि हर सप्ताह एक गाड़ी भरकर दिल्ली जाती है। ठेकेदार दिल्ली से विदेशों में सप्लाई करते हैं।
प्रमोद कुमार ने बताया कि 4 इंच से लेकर 14 इंच तक कशीदा फ्रेम बनाए जाते हैं जो कपड़े में कढ़ाई निकालने के काम आते हैं। इसके लिए स्पेशल लकड़ी की जरूरत होती है जोकि उत्तराखंड राज्य से मंगवाई जाती है। एक कशीदा फ्रेम की कीमत 20 रुपये होती है।
कारीगरों ने बताया कि अब यह कार्य ज्यादा बचत का सौदा नहीं रह गया है। वहीं लकड़ी कई बार खराब आ जाती है जिससे नुकसान उठाना पड़ता है। एक बार हरिद्वार से गाड़ी मंगवाने में 4-5 लाख रुपये का खर्चा आता है। जिसमें कई बार लकड़ी खराब आने से नुकसान उठाना पड़ता है। गांव तलोट के अलावा राजस्थान में ढाणी खातीयावाली में भी फ्रेम बनाने का काम किया जाता है। जिसका माल तैयार होने के बाद गांव तलोट में आकर उतरता है उसके बाद दिल्ली जाता है।

गांव तलोट के निवर्तमान सरपंच प्रमोद कुमार ने बताया कि कशीदा फ्रेम बनाने का काम गांव में 90 प्रतिशत लोग करते थे लेकिन धीरे-धीरे काम में बचत कम होने के कारण लोग फ्रेम बनाने का काम कम कर दिया है फिर भी गांव में पांच कारखाने लगे हुए है। कशीदा फ्रेम बनाने के बाद महीने में दो गाड़ी कशीदा फ्रेम की दिल्ली जाती है वहां से अरब देशों में एक्सपोर्ट होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed