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गणपति विसर्जन के दौरान हुए हादसे में मृतक आकाश परिवार का था इकलौता सहारा, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

Mon, 12 Sep 2022 11:09 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 12 Sep 2022 11:09 PM IST
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Akash was the only support of the family in the accident during Ganpati immersion, the mountain of sorrows broke on the families
गणपति विसर्जन के दौरान शुक्रवार देर शाम झगड़ोली नहर पर हुए हादसे में शहर के मोहल्ला ढाणी के मृत चार युवाओं के परिजनों की आर्थिक सहायता की मांग शहरवासियों द्वारा उठाई जा रही है। मृतकों में जहा नितिन की डेढ़ वर्ष पहले ही शादी हुई थी तो आकाश परिवार का इकलौता सहारा था। इसके अलावा शिवम के परिवार पर तो मानों दुखों का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि ढाई माह पहले ही उसके पिता का भी निधन हो गया था। इसके अलावा निकुंज को अगले दिन नर्सिंग की परीक्षा देने थी इससे पहले ही हादसा हो गया। शहरवासियों द्वारा 15 सितंबर शाम चार से पांच बजे तक शहर के माता मसानी चौक पर शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा मोहल्ला ढाणी व शहरवासियों द्वारा मंगलवार को उपायुक्त से मिलकर पीड़ित परिवारों की आर्थिक सहायता के लिए भी गुहार लगाई जाएगी।
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पिता की ऑटो मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान पर हाथ बंटाता था आकाश
शहर के मोहल्ला ढाणी निवासियों ने बताया कि 19 वर्षीय आकाश परिवार का इकलौता सहारा था। आकाश की छोटी बहन के अलावा परिवार में माता-पिता हैं। आकाश आईटीआई करने के बाद महेंद्रगढ़-दादरी रोड पर स्थित स्टेट हाईवे पर अपने पिता की ऑटो मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान पर हाथ बंटाने का काम करता था। पिता सुरेश सैनी का रो-रोकर बुरा हाल है। शहरवासी भी लगातार उन्हें सांत्वना दे रहे हैं।
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नितिन की पत्नी है सात माह की गर्भवती
मोहल्लावासियों के अनुसार 27 वर्षीय नितिन उर्फ नवीन की डेढ़ वर्ष पूर्व शादी हुई थी तथा पत्नी भी सात माह की गर्भवती है। ऐसे में परिवार पर नितिन के जाने से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी अपनी बार-बार पति को याद कर बेहोशी की हालत में चली जाती है। परिजन व आसपास के लोग लगातार सांत्वना दे रहे हैं। पिता जरनैल सिंह शहर में हेयर सेल्यून का काम करते हैं। नितिन शहर के एक निजी शिक्षण संस्थान में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ अपने पिता की दुकान पर हाथ बंटाता था।
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पिता के निधन से उबरा भी नहीं था शिवम का परिवार
24 वर्षीय शिवम उर्फ टिंकू के पिता का ढाई माह पूर्व ही निधन हुआ था। परिवार अभी पिता के निधन से उबरा भी नहीं था कि अब शिवम चला गया। परिवार की रोजीरोटी का सहारा हेयर सेल्यून से चल रहा था जिससे शिवम ही चलाता था। अब परिवार में मां-भाई और भाभी हैं। इस परिवार पर शिवम के जाने से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

निकुंज की मां हो रही बार-बार बेसुध
18 वर्षीय निकुंज का शनिवार को ही नर्सिंग बीएससी की परीक्षा थी। शुक्रवार देर शाम हादसे में मौत होने के बाद से ही मां बार-बार बेसुध हो रही है। पिता हलवाई का काम कर परिवार का खर्च चलाते हैं। जवान बेटे के जाने के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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