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Mahendragarh-Narnaul News: स्पाइनल इंजरी के बाद पैर लाचार तो हाथों ने साधा सटीक निशाना
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फोटो 01 मैडल के साथ संगीता यादव। संवाद
नारनौल। गांव डेरोली अहीर में 15 दिसंबर 1984 को एक किसान परिवार में जन्मी संगीता यादव 18 साल की उम्र में खेलते समय छत से गिर गई थी। इस दौरान स्पाइनल इंजरी के चलते उनके पैर नाकाम हो गए थे लेकिन संगीता ने इससे अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती ही चलीं गई।
साल 2006 में संगीता का विवाह राजस्थान के सिमला गांव में हो गया। पति व ससुराल के लोगों ने उनका पूरा साथ दिया। इसकी बदौलत साल 2012 में बैंक ऑफ इंडिया में लिपिक के पद पर नौकरी हासिल की। साल 2020 में उनका प्रमोशन ऑफिसर कैडर में हो गया है।
संगीता का अब एक ही लक्ष्य है कि जी जान से मेहनत कर ओलंपिक में भाग लेकर देश को एक गोल्ड मैडल दिलवाना है। इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है और इंडियन टीम के वर्ल्ड कप ट्रायल में क्वालीफाई भी कर लिया है।
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फुटबॉल खेलते देखा जगी खेल की भावना
अपनी स्पाइनल की इंजरी के इलाज के चलते दिल्ली आना जाना होता रहता था। इस दौरान साल 2022 में स्पाइनल सेंटर में लोगों को फुटबॉल खेलते देखा तो मन में खेल भावना ने जन्म लिया। जानकारी जुटाई तो कोच सुरेश चौहान के बारे में पता चला जो शूटिंग का प्रशिक्षण देते हैं। बस फिर क्या था संगीता ऑफिस के बाद देर शाम कोच के पास आकर लगातार तीन से चार घंटे शूटिंग का अभ्यास करने लगी।
कड़े अभ्यास के बाद जीता पहला कांस्य
संगीता ने थर्ड जोनल लेवल मऊं में आयोजित प्रतियोगिता में कांस्य, नेशनल टीम प्रतियोगिता में कांस्य, प्री स्टेट प्रतियोगिता में रैंकिंग वन रही। इसके बाद साल 2023 मे दिल्ली में आयोजित राज्य स्तर प्रतियोगिता में गोल्ड व सिल्वर, 2024 में दिल्ली में हुई एनआरआई के तहत नॉर्थ जॉन प्रतियोगिता में दो कांस्य, और इसके बाद सालद 2025 में नवंबर में आयोजित 13 से 17 नवंबर को देहरादून में आयोजित प्री नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड व 10 दिसंबर को दिल्ली में हुई नेशनल पैरा शूटिंग टीम इवेंट में गोल्ड अपने नाम किया है।
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साल 2006 में संगीता का विवाह राजस्थान के सिमला गांव में हो गया। पति व ससुराल के लोगों ने उनका पूरा साथ दिया। इसकी बदौलत साल 2012 में बैंक ऑफ इंडिया में लिपिक के पद पर नौकरी हासिल की। साल 2020 में उनका प्रमोशन ऑफिसर कैडर में हो गया है।
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संगीता का अब एक ही लक्ष्य है कि जी जान से मेहनत कर ओलंपिक में भाग लेकर देश को एक गोल्ड मैडल दिलवाना है। इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है और इंडियन टीम के वर्ल्ड कप ट्रायल में क्वालीफाई भी कर लिया है।
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फुटबॉल खेलते देखा जगी खेल की भावना
अपनी स्पाइनल की इंजरी के इलाज के चलते दिल्ली आना जाना होता रहता था। इस दौरान साल 2022 में स्पाइनल सेंटर में लोगों को फुटबॉल खेलते देखा तो मन में खेल भावना ने जन्म लिया। जानकारी जुटाई तो कोच सुरेश चौहान के बारे में पता चला जो शूटिंग का प्रशिक्षण देते हैं। बस फिर क्या था संगीता ऑफिस के बाद देर शाम कोच के पास आकर लगातार तीन से चार घंटे शूटिंग का अभ्यास करने लगी।
कड़े अभ्यास के बाद जीता पहला कांस्य
संगीता ने थर्ड जोनल लेवल मऊं में आयोजित प्रतियोगिता में कांस्य, नेशनल टीम प्रतियोगिता में कांस्य, प्री स्टेट प्रतियोगिता में रैंकिंग वन रही। इसके बाद साल 2023 मे दिल्ली में आयोजित राज्य स्तर प्रतियोगिता में गोल्ड व सिल्वर, 2024 में दिल्ली में हुई एनआरआई के तहत नॉर्थ जॉन प्रतियोगिता में दो कांस्य, और इसके बाद सालद 2025 में नवंबर में आयोजित 13 से 17 नवंबर को देहरादून में आयोजित प्री नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड व 10 दिसंबर को दिल्ली में हुई नेशनल पैरा शूटिंग टीम इवेंट में गोल्ड अपने नाम किया है।