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Mahendragarh-Narnaul News: रास्ता अतिक्रमण मामले में एडीजे ने एसडीएम का आदेश किया रद्द
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नारनौल। गांव श्यामपुरा में सार्वजनिक रास्ते पर कथित अतिक्रमण के मामले में जिला अदालत ने एसडीएम कनिका गोयल के आदेश को रद्द कर दिया है। एडीजे हर्षाली चौधरी ने शिकायतकर्ता हरिओम की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए पाया कि पहले दिया गया आदेश कई कानूनी खामियों से भरा हुआ था।
शिकायतकर्ता हरिओम ने गांव के ओमप्रकाश पर आरोप लगाया था कि उसने ग्राम पंचायत की गली में पत्थर, निर्माण सामग्री और चबूतरा बनाकर रास्ता बाधित कर दिया। इस पर महेंद्रगढ़ की एसडीएम कनिका गोयल ने 8 जनवरी को सतनाली थाना प्रभारी को एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एसडीएम की ओर से जिस तहसीलदार रिपोर्ट का हवाला दिया गया, वह रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थी। साथ ही, बिना उचित पैमाइश के अतिक्रमण का निष्कर्ष निकाल लिया गया।
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आदेश जारी करने के बाद शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया जाना भी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि माना गया। अदालत ने टिप्पणी की कि एक ओर अतिक्रमण हटाने का आदेश देना और दूसरी ओर उसी समय रिपोर्ट मंगाना निर्णय प्रक्रिया में असंगति को दर्शाता है।
पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने एसडीएम को निर्देश दिए कि दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाए और केवल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। इससे पहले भी यह मामला सत्र न्यायालय में आया था जहां 11 जनवरी 2024 को मामले को वापस एसडीएम कोर्ट भेजा गया था, ताकि दोनों पक्षों को साक्ष्य देने का अवसर मिले।
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शिकायतकर्ता हरिओम ने गांव के ओमप्रकाश पर आरोप लगाया था कि उसने ग्राम पंचायत की गली में पत्थर, निर्माण सामग्री और चबूतरा बनाकर रास्ता बाधित कर दिया। इस पर महेंद्रगढ़ की एसडीएम कनिका गोयल ने 8 जनवरी को सतनाली थाना प्रभारी को एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एसडीएम की ओर से जिस तहसीलदार रिपोर्ट का हवाला दिया गया, वह रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थी। साथ ही, बिना उचित पैमाइश के अतिक्रमण का निष्कर्ष निकाल लिया गया।
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आदेश जारी करने के बाद शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया जाना भी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि माना गया। अदालत ने टिप्पणी की कि एक ओर अतिक्रमण हटाने का आदेश देना और दूसरी ओर उसी समय रिपोर्ट मंगाना निर्णय प्रक्रिया में असंगति को दर्शाता है।
पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने एसडीएम को निर्देश दिए कि दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाए और केवल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। इससे पहले भी यह मामला सत्र न्यायालय में आया था जहां 11 जनवरी 2024 को मामले को वापस एसडीएम कोर्ट भेजा गया था, ताकि दोनों पक्षों को साक्ष्य देने का अवसर मिले।