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एसएमओ और एमओ को सौंपे अतिरिक्त विभागीय कार्य, मरीजों को होगी परेशानी
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नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़।
- फोटो : Narnol
नवनियुक्त सिविल सर्जन ने डिप्टी सीएमओ के साथ एसएमओ और एमओ को मरीजों को देखने के साथ अन्य विभागीय कार्य सौंपे हैं। इसमें दो डिप्टी सीएमओ के अलावा दस डॉक्टरों को विभिन्न प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें जिला नागरिक अस्पताल के अलावा सतनाली व नांगल चौधरी में तैनात डॉक्टर भी शामिल हैं। ऐसे में यदि डॉक्टर विभागीय कार्य देखेंगे तो मरीजों को असुविधा का सामना करना होगा।
बता दें कि जिला अस्पताल, पीएचसी व सीएचसी में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे ओपीडी के साथ इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज जिला अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं। लेकिन, कई बार डॉक्टर न होने से उन्हें निराशा हाथ लगती है। डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन ने कंसलटेंट व गायनी वार्ड में निजी डॉक्टरों की सेवाएं ले रहा हैं। फिर भी मरीजों को राहत नहीं मिल रही है। डॉक्टरों पर मरीजों को देखने का दबाव है। सभी डॉक्टरों के कमरों के आगे मरीजों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे में यदि डॉक्टरों से दूसरे कार्य कराएं जाएंगे तो इसका भी असर मरीजों पर पड़ेगा। दूसरी ओर नवनियुक्त सिविल सर्जन ने डॉ. अशोक कुमार ने शुक्रवार को विभाग के कुछ कार्यों को डॉक्टरों को सौंप दिया है। इससे अब डॉक्टर विभागीय कार्यों के साथ मरीजों भी देखेंगे। डॉक्टरों का कहना है कि इससे इन पर कार्य का दबाव होगा। वैसे भी मरीजों की भीड़ रहती है। ऐसे में दूसरे कार्य कैसे होंगे। इसका असर मरीजों पर पड़ना तय है।
किसको क्या मिली जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार सीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने डिप्टी सीएमओ संजय बिश्नोई को परिवार कल्याण, मलेरिया, आईडीएसपी, एनवीएससीपी, एमएमआईवाई की जिम्मेदारी सौंपी है। जबकि, डिप्टी सीएमओ डॉ. धर्मेश सैनी को मेडिकल, आयुष्मान भारत व सीएम विंडो का कार्य भार दिया है। नांगल चौधरी सीएचसी के एसएमओ डॉ. अरुण कालरा को पीएनडीटी, एलएमएस पोर्टल, नांगल सिरोही के एसएमओ डॉ. राम निवास को प्रतिरक्षण व चाइल्ड केयर, टीबी अस्पताल के डॉ. जितेंद्र को आरएनटीसीबी, एड्स, ट्रेनिंग्र ट्रांसपोर्ट व सक्षम युवा, जीएच के डॉ. नवीन को एनएचआरएम, आरटीआई, जीएच के डॉ. नरेंद्र कुमार को स्कूल हेल्थ, तम्बाकू कंट्रोल व एनसीडी, सीएचसी नांगल चौधरी से डॉ. अभिषेक को प्लोरोसिस, जीएच के डॉ. पवन को मेंटर हेल्थ प्रोग्राम, जीएच के डॉ. सर्वेश कुमार को जिला अंधता कार्यक्रम, सीएचसी सतनाली को डॉ. नवीन को हेल्थ, बीपी, सीएम घोषणा, जन्म-मृत्यु व अन्य, जीएच के डॉ. प्रमोद को एनडीसीपी कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि पूर्व सीएमओ डॉ. संतलाल ने डिप्टी सीएमओ से मलेरिया कार्यक्रम को लेकर जूनियर को सौंप दिया था। अब डॉ. अशोक ने इसे दोबारा दूसरे डिप्टी सीएमओ को सौंपा है।
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बाहरी सेंटरों के डॉक्टरों को सौंपा
सीएमओ ने चार बाहरी सेंटरों के डॉक्टरों को कार्य भार दिया है। ऐसे में इन डॉक्टरों के नारनौल बैठक में आने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ेगी क्योंकि इनके सेंटर पर भी डॉक्टरों की कमी है। जीएच में मरीजों का वैसे भी दबाव होता है। वहीं पीएनडीटी जैसे मामले को लेकर सरकार गंभीर है। इसे नांगल चौधरी सीएचसी के डॉक्टर को दिया गया। ऐसे डॉक्टर मरीज देखेगा या पीएनडीसी पर कार्य करेगा।
जिले में आठ डिप्टी सीएमओ की जरूरत है। अभी दो डिप्टी सीएमओ कार्यरत हैं। उसमें भी एक ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। ऐसे में सरकारी योजनाओं को चलाने के लिए एसएमओ/एमओ को अतिरिक्त कार्य भार दिया गया है। हमारा प्रयास है कि डॉक्टर मरीजों के साथ सरकारी योजनाओं को भी देखें।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ नारनौल
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बता दें कि जिला अस्पताल, पीएचसी व सीएचसी में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे ओपीडी के साथ इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज जिला अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं। लेकिन, कई बार डॉक्टर न होने से उन्हें निराशा हाथ लगती है। डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन ने कंसलटेंट व गायनी वार्ड में निजी डॉक्टरों की सेवाएं ले रहा हैं। फिर भी मरीजों को राहत नहीं मिल रही है। डॉक्टरों पर मरीजों को देखने का दबाव है। सभी डॉक्टरों के कमरों के आगे मरीजों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे में यदि डॉक्टरों से दूसरे कार्य कराएं जाएंगे तो इसका भी असर मरीजों पर पड़ेगा। दूसरी ओर नवनियुक्त सिविल सर्जन ने डॉ. अशोक कुमार ने शुक्रवार को विभाग के कुछ कार्यों को डॉक्टरों को सौंप दिया है। इससे अब डॉक्टर विभागीय कार्यों के साथ मरीजों भी देखेंगे। डॉक्टरों का कहना है कि इससे इन पर कार्य का दबाव होगा। वैसे भी मरीजों की भीड़ रहती है। ऐसे में दूसरे कार्य कैसे होंगे। इसका असर मरीजों पर पड़ना तय है।
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किसको क्या मिली जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार सीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने डिप्टी सीएमओ संजय बिश्नोई को परिवार कल्याण, मलेरिया, आईडीएसपी, एनवीएससीपी, एमएमआईवाई की जिम्मेदारी सौंपी है। जबकि, डिप्टी सीएमओ डॉ. धर्मेश सैनी को मेडिकल, आयुष्मान भारत व सीएम विंडो का कार्य भार दिया है। नांगल चौधरी सीएचसी के एसएमओ डॉ. अरुण कालरा को पीएनडीटी, एलएमएस पोर्टल, नांगल सिरोही के एसएमओ डॉ. राम निवास को प्रतिरक्षण व चाइल्ड केयर, टीबी अस्पताल के डॉ. जितेंद्र को आरएनटीसीबी, एड्स, ट्रेनिंग्र ट्रांसपोर्ट व सक्षम युवा, जीएच के डॉ. नवीन को एनएचआरएम, आरटीआई, जीएच के डॉ. नरेंद्र कुमार को स्कूल हेल्थ, तम्बाकू कंट्रोल व एनसीडी, सीएचसी नांगल चौधरी से डॉ. अभिषेक को प्लोरोसिस, जीएच के डॉ. पवन को मेंटर हेल्थ प्रोग्राम, जीएच के डॉ. सर्वेश कुमार को जिला अंधता कार्यक्रम, सीएचसी सतनाली को डॉ. नवीन को हेल्थ, बीपी, सीएम घोषणा, जन्म-मृत्यु व अन्य, जीएच के डॉ. प्रमोद को एनडीसीपी कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि पूर्व सीएमओ डॉ. संतलाल ने डिप्टी सीएमओ से मलेरिया कार्यक्रम को लेकर जूनियर को सौंप दिया था। अब डॉ. अशोक ने इसे दोबारा दूसरे डिप्टी सीएमओ को सौंपा है।
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बाहरी सेंटरों के डॉक्टरों को सौंपा
सीएमओ ने चार बाहरी सेंटरों के डॉक्टरों को कार्य भार दिया है। ऐसे में इन डॉक्टरों के नारनौल बैठक में आने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ेगी क्योंकि इनके सेंटर पर भी डॉक्टरों की कमी है। जीएच में मरीजों का वैसे भी दबाव होता है। वहीं पीएनडीटी जैसे मामले को लेकर सरकार गंभीर है। इसे नांगल चौधरी सीएचसी के डॉक्टर को दिया गया। ऐसे डॉक्टर मरीज देखेगा या पीएनडीसी पर कार्य करेगा।
जिले में आठ डिप्टी सीएमओ की जरूरत है। अभी दो डिप्टी सीएमओ कार्यरत हैं। उसमें भी एक ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। ऐसे में सरकारी योजनाओं को चलाने के लिए एसएमओ/एमओ को अतिरिक्त कार्य भार दिया गया है। हमारा प्रयास है कि डॉक्टर मरीजों के साथ सरकारी योजनाओं को भी देखें।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ नारनौल